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इन 3 बीमारियों में बेहद खतरनाक हो सकता है बढ़ता वायु प्रदूषण, एक्सपर्ट्स के सुझाए ये टिप्स करें फॉलो। © Shutterstock.
Side Effects of Air Pollution in Hindi: कोरोनावायरस के कारण जब से लोग अपने घरों में रह रहे थे, तब से देश के कई शहरों का प्रदूषण लेवल कम और वातावरण शुद्ध और साफ हो गया था। लेकिन, एक बार फिर से शहरों में प्रदूषण का स्तर बढ़ने लगा है। इसकी वजह है लोगों का अपनी गाड़ी से निकलना, ट्रक, बसों, कार, ऑटो आदि का सड़कों पर दौड़ना। प्रदूषण का स्तर देश की राजधानी दिल्ली और एनसीआर के इलाके में (Delhi-NCR pollution) में सबसे अधिक देखने के मिल रहा है। हर साल यहां दशहरा खत्म होने के बाद प्रदूषण लेवल में बढ़ोतरी दर्ज की जाने लगती है। पड़ोसी राज्यों में पराली जलाना, दिवाली के पटाखे और सर्दी के मौसम के शुरुआत से ही प्रदूषण लेवल बढ़ने लगता है।
पिछले दिनों पराली जलाने से भी वायु प्रदूषण (Air pollution in Delhi-NCR) का स्तर काफी बढ़ा है। हर साल दिवाली के बाद वायु प्रदूषण (Delhi air pollution) में हुए इजाफे से अस्पतालों में मरीजों की संख्या भी बढ़ने लगती है। हालांकि, इस बार कोरोना का प्रकोप इतना है कि आपको हॉस्पिटल जाने से बचना ही चाहिए। ऐसे में कोशिश करनी होगी कि दिवाली के कारण वायु प्रदूषण ना बढ़े। प्रदूषण के कारण सबसे ज्यादा सांस की तकलीफ, फेफड़ों से संबंधित समस्या, अस्थमा और आंखों की समस्याओं (Eye problem due to pollution) में इजाफा होता है। यहां दो खास एक्सपर्ट्स बता रहे हैं वायु प्रदूषण किस तरह सेहत (air pollution harmful effects on health) को पहुंचा सकता है नुकसान...
दिल्ली की हवा अभी से प्रदूषित हो गई है। प्रत्येक वर्ष दिल्ली और इससे सटे इलाकों में सर्दियां शुरू होते ही वायु प्रदूषण का स्तर काफी बढ़ जाता है। अब तक दिल्ली के कई हॉस्पिटल में सांस लेने (Breathing problem) में कठिनाई वाले रोगियों के मामलों में इजाफा दर्ज किया गया है। जिन लोगों को श्वसन संबंधी बीमारियां हैं, उन्हें खराब हवा के संपर्क में आते ही दूसरी समस्याएं भी हो सकती हैं।
डॉ. अरुणेश कुमार, सीनियर कंसलटेंट पल्मोनोलॉजी एंड हेड, पारस चेस्ट इंस्टिट्यूट, पारस हॉस्पिटल (गुरुग्राम) का कहना है कि हर साल की तरह एक बार फिर से ठंड के मौसम की शुरुआत के साथ प्रदूषण का स्तर (Side effects of Air Pollution) बढ़ रहा है। कोविड-19 की समस्या (covid-19 pandemic) अभी भी व्याप्त है। बढ़ते प्रदूषण के स्तर (Pollution level) से फेफड़ों से संबंधित बीमारियों के होने का खतरा काफी हद तक बढ़ जाता है, ऐसे में जिन लोगों को पहले से ही फेफड़ों के रोग हैं, उन्हें अपना खास ख्याल रखने की जरूरत होगी।
खांसी, सांस की तकलीफ, सीने में जकड़न, घरघराहट, बुखार जैसे लक्षण इस कंडीशन के सामान्य लक्षण होते हैं। इन सभी लक्षणों के नजर आने पर लोगों को डाक्टर से जरूर कंसल्ट करना चाहिए ताकि लक्षणों की स्पष्ट तरीके से पहचान हो सके। दशहरा के बाद भी प्रदूषण के स्तर में वृद्धि होने की संभावना है, इसलिए आधारभूत मैनेजमेंट प्लांट को फॉलो करना सबसे जरूरी है।
डॉ. पीयूष गोयल, कंसलटेंट, पल्मोनोलॉजी एंड क्रिटिकल केयर, कोलंबिया एशिया हॉस्पिटल, (गुरुग्राम) का कहना है कि हर साल दशहरा के बाद शहर में प्रदूषण के स्तर में बहुत ज्यादा वृद्धि होती है। यह वह समय होता है, जब अस्थमा (Asthma) और सांस की बीमारियों (Respiratory diseases) से ग्रस्त लोगों को अधिक देखभाल करनी चाहिए। शहर में प्रदूषण का खतरनाक स्तर (Pollution level in city) न केवल सांस की बीमारियों से पीड़ित लोगों के लिए हानिकारक है, बल्कि सामान्य लोगों के लिए भी यह नुकसानदायक हो सकता है।
हम बच्चों, बुजुर्गों और सांस की बीमारी वाले लोगों को घर के अंदर रहने और एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल करने की सलाह देते हैं। तापमान में कमी होने से भी अपर रेस्पिरेटरी ट्रैक्ट के इंफेक्शन, वायरल फीवर, खांसी और कोल्ड के केसेज में बढ़ोतरी कर सकता है। दिन और रात के तापमान में अंतर होने से इम्यूनिटी सिस्टम प्रभावित होती है और इस वजह से इंफेक्शन भी हो सकता है, क्योंकि किसी व्यक्ति के शरीर को अचानक से तापमान के गिरने और तापमान बढ़ने में संभलने का मौका नहीं मिल पाता है।
Air Pollution Hazards : जानें, वायु प्रदूषण से होने वाले स्वास्थ्य पर हानिकारक प्रभाव, बचने के उपाय