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Air Pollution Effects On Brain: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में पिछले कुछ दिनों से बढ़ते वायु प्रदूषण (Air Pollution In Delhi) के चलते चिंता का माहौल है। खराब एयर क्वालिटी (Poor Air Quality) से लोगों के स्वास्थ्य के लिए पर इसका बुरा असर पड़ने की आशंकाएं भी बढ़ रही हैं। एक्सपर्ट्स ने लोगों को खुद को प्रदूषित हवा के सम्पर्क में आने से बचने और अपनी सुरक्षा का खास ख्याल रखने की सलाह दी है। वहीं विभिन्न रिपोर्ट्स में आशंका जतायी गयी है कि, वायु प्रदूषण के कारण लोगों में सांस से जुड़ी बीमारियों, आंखों में जलन और एलर्जिक रिएक्शन्स जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। वहीं, इस बढ़ते वायु प्रदूषण का बुरा प्रभाव बच्चों पर भी पड़ सकता है।
दरअसल, यूनीसेफ (United Nations Children’s Fund) और विश्व स्वास्थ्य संगठन (World Health Organization) की रिपोर्ट्स में ऐसा कहा गया है कि छोटे बच्चों का इम्यून सिस्टम (Immune System) कमज़ोर होने के कारण वायु प्रदूषण का बुरा असर उनपर अधिक पड़ सकता है। इसी तरह बच्चों के दिमाग पर भी वायु प्रदूषण का बुरा प्रभाव पड़ने की आशंका जतायी गयी हैं। (Air Pollution Effects On Kid's Brain In Hindi.)
यूनीसेफ की रिपोर्ट के अनुसार, पूरे दक्षिण एशियाई क्षेत्र में प्रति वर्ष 5 वर्ष से कम आयु के लगभग 1.30 लाख बच्चों की मृत्यु वायु प्रदूषण (Death due to air pollution) और उससे जुड़े कारकों से हो जाती है। इन रिपोर्ट्स में कहा गया है कि जब बच्चे लम्बी अवधि तक प्रदूषित वायु के सम्पर्क में रहते हैं तो उनके फेफड़ों पर इसका बुरा असर पड़ सकता है। वहीं, आगे चलकर उम्र बढ़ने के साथ बच्चों को फेफड़ों से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं । साथ ही बच्चोंके ब्रेन और आंखों पर भी प्रदूषित हवा का बुरा प्रभाव पड़ सकता है।
साल 2017 में यूनिसेफ द्वारा एक रिपोर्ट जारी की गयी जिसका शीर्षक डेंजर इन दि एयर (Danger in the air) था। इस रिपोर्ट दिमाग पर प्रदूषित वायु के बुरे प्रभावों के बारे में लिखा गया। इस रिपोर्ट के अनुसार ब्रेन डैमेज के कई कारण हो सकते हैं जिनमें वायु प्रदूषण भी एक कारण है।
इस रिपोर्ट के अनुसार, वायु प्रदूषण बच्चों में न्यूरो-डेवलपमेंट (Neuro Development) और कॉग्निटिव फंक्शन (Cognitive Function) यानि संज्ञानात्मक क्षमता पर प्रभाव डाल रहा है। इसके अलावा बच्चों में वायु प्रदूषण अस्थमा और कैंसर के ट्रिगर के तौर पर भी काम कर सकता है। स्टडीज़ और रिपोर्ट्स के अनुसार, वायु प्रदूषण के बुरे प्रभावों के प्रति बच्चों के अधिक संवेदनशील होने की एक वजह उनकी तेज गति से सांस लेने की प्रवृति भी है। बच्चे वयस्कों की तुलना में ज़्यादा तेज गति से सांस लेते हैं जिसके चलते प्रदूषित हवा और प्रदूषण फैलाने वाले कण बच्चों के शरीर में जल्दी और अधिक मात्रा में प्रवेश कर सकते हैं। इससे शरीर के अंदरूनी अंगों को नुकसान पहुंच सकता है और विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा भी बढ़ सकता है।
(डिस्क्लेमर:इस लेख में दी गई बीमारी से जुड़ी सभी जानकारियां सूचनात्मक उद्देश्य से लिखी गयी है। किसी बीमारी की चिकित्सा से जुड़े किसी भी निष्कर्ष तक पहुंचने के लिए कृपया अपने चिकित्सक का परामर्श लें।)