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वायु प्रदूषण से कौन-कौन सी हार्ट डिजीज होती हैं? जानिए शुरुआती लक्षण और बचाव के तरीके

Air pollution ke nuksan: वायु प्रदूषण से हार्ट को नुकसान हो सकता है और हार्ट से जुड़ी गंभीर बीमारियों का रिस्क बढ़ सकता है।

वायु प्रदूषण से कौन-कौन सी हार्ट डिजीज होती हैं? जानिए शुरुआती लक्षण और बचाव के तरीके
VerifiedVERIFIED By: Dr Abhijit Borse

Written by Sadhna Tiwari |Updated : December 5, 2024 7:40 PM IST

Air pollution and heart diseases: हर साल सर्दियों की शुरुआत होते ही प्रदूषण का स्तर काफी बढ़ जाता है। भारत की राजधानी और आसपास के इलाकों में तो प्रदूषण को कंट्रोल करने के लिए सरकार को भी हस्तक्षेप करना पड़ता है। जब प्रदूषण का स्तर अपने चरम पर होता है तो लोगों को सांस लेने में कठिनाई, गले में खराश के साथ दर्द, आंखों में दर्द और स्किन संबंधी समस्याएं दिखते लगती हैं। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि वायु प्रदूषण की वजह से कई गंभीर हार्ट की समस्याएं भी हो सकती हैं। आज इस आर्टिकल के माध्यम से मुंबई के एशियन हार्ट इंस्टीट्यूट में इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. अभिजीत बोरसे हमें प्रदूषण से होने वाले खतरे और इसे रोकने के तरीके बता रहे हैं।

वायु प्रदूषण और हार्ट डिजीज में क्या लिंक है?

वायु प्रदूषण में हानिकारक पदार्थों का एक जटिल मिश्रण होता है, जिसमें पार्टिकुलेट मैटर (PM2.5 और PM10), नाइट्रोजन डाइऑक्साइड (NO2), सल्फर डाइऑक्साइड (SO2), ओजोन (O3), और कार्बन मोनोऑक्साइड (CO) शामिल हैं। ये प्रदूषक, जब सांस के साथ शरीर में जाते हैं, तो हृदय प्रणाली में जबरदस्त हलचल करते हैं, जिससे प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

वायु प्रदूषण हृदय को कैसे प्रभावित करता है?

  • सूजन और ऑक्सीडेटिव तनाव: प्रदूषित हवा में छोटे कण प्रणालीगत सूजन और ऑक्सीडेटिव तनाव को ट्रिगर कर सकते हैं, जिससे रक्त वाहिकाओं और हृदय को नुकसान होता है।
  • एथेरोस्क्लेरोसिस त्वरण: लंबे समय तक प्रदूषण के संपर्क में रहने से धमनियों में फैट का जमाव हो सकता है, जिसे एथेरोस्क्लेरोसिस कहते हैं। इस कंडीशन में दिल के दौरे और स्ट्रोक का खतरा काफी बढ़ जाता है।
  • हार्ट रिदम डिसऑर्डर: प्रदूषण हार्ट रिदम को आसामान्य कर सकता है, जिससे संभावित रूप से अतालता हो सकती है।
  • उच्च रक्तचाप: वायु प्रदूषण के संपर्क में आने से रक्तचाप बढ़ सकता है, जो हृदय रोग के लिए एक महत्वपूर्ण जोखिम कारक है।

WHO क्या बोलता है?

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, वायु प्रदूषण हर साल लगभग 7 मिलियन लोगों की समय से पहले मौत का कारण बनता है, जिसमें हृदय संबंधी बीमारियां एक प्रमुख कारण हैं। भारी यातायात, औद्योगिक उत्सर्जन और अपर्याप्त प्रदूषण नियंत्रण उपायों वाले शहरी क्षेत्र बढ़े हुए हृदय संबंधी जोखिमों के हॉटस्पॉट हैं।

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वायु प्रदूषण से बचने के लिए क्या करें?

  • वायु प्रदूषण से निपटने के लिए प्रणालीगत प्रयासों की आवश्यकता है। हालांकि निम्न तरीकों को अपनाकर भी काफी हद तक खुद को सुरक्षित रखा जा सकता है।
  • दैनिक वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) जांचने के लिए ऐप्स और वेबसाइटों का उपयोग करें। उच्च प्रदूषण स्तर वाले दिनों में बाहरी गतिविधियों को सीमित करें।
  • घर में एयर प्यूरीफायर का उपयोग करें, खासकर शहरी या औद्योगिक क्षेत्रों में।
  • घर के अंदर धूम्रपान करने से बचें और मोमबत्तियों या लकड़ी जलाने वाले स्टोव का उपयोग कम से कम करें।
  • प्रदूषित क्षेत्रों में सूक्ष्म कणों को फ़िल्टर करने के लिए डिज़ाइन किए गए मास्क (N95 मास्क) पहनें।
  • नियमित व्यायाम, फलों, सब्जियों और साबुत अनाज से भरपूर संतुलित आहार और तनाव प्रबंधन हृदय स्वास्थ्य को मजबूत कर सकते हैं।
  • वायु प्रदूषण से निपटने के लिए सरकार और संगठनों को भी हस्तक्षेप करना चाहिए।
  • उद्योगों और वाहनों के लिए सख्त उत्सर्जन मानक लागू होने चाहिए।
  • लोगों को सार्वजनिक वाहनों से ट्रेवल करने के लिए प्रेशर दिया जाना चाहिए।

निष्कर्ष: वायु प्रदूषण के कारण बढ़ रही हार्ट डिजीज के चलते हमें ये जल्द से जल्द समझना होगा कि प्रदूषण सिर्फ वातावरण को ही खराब नहीं कर रहा है, बल्कि ये एक हेल्थ एमरजेंसी भी बन गई है। सिर्फ सोसाइटी ही नहीं बल्कि निजी तौर पर भी इसके रिस्क और बचाव के तरीकों को समझते हुए जल्द से जल्द एक्शन लेना होगा ताकि प्रदूषण के कारण बढ़ रही कार्डियोवैस्कुलर डिजीज को कम किया जा सके।

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पॉलिसी में बदलावों से लेकर व्यक्तिगत सावधानियों तक, सामूहिक प्रयास से प्रदूषण को मात देकर हार्ट हेल्थ को दुरुस्त रखा जा सकता है।