Don’t Miss Out on the Latest Updates.
Subscribe to Our Newsletter Today!
- लेटेस्ट
- डिज़ीज़
- डाइट
- फिटनेस
- ब्यूटी
- घरेलू नुस्खे
- वीडियो
- पुरुष स्वास्थ्य
- मेंटल हेल्थ
- सेक्सुअल हेल्थ
- फोटो स्टोरी
- आयुष
- पेरेंटिंग
- न्यूज
Air pollution and heart diseases: हर साल सर्दियों की शुरुआत होते ही प्रदूषण का स्तर काफी बढ़ जाता है। भारत की राजधानी और आसपास के इलाकों में तो प्रदूषण को कंट्रोल करने के लिए सरकार को भी हस्तक्षेप करना पड़ता है। जब प्रदूषण का स्तर अपने चरम पर होता है तो लोगों को सांस लेने में कठिनाई, गले में खराश के साथ दर्द, आंखों में दर्द और स्किन संबंधी समस्याएं दिखते लगती हैं। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि वायु प्रदूषण की वजह से कई गंभीर हार्ट की समस्याएं भी हो सकती हैं। आज इस आर्टिकल के माध्यम से मुंबई के एशियन हार्ट इंस्टीट्यूट में इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. अभिजीत बोरसे हमें प्रदूषण से होने वाले खतरे और इसे रोकने के तरीके बता रहे हैं।
वायु प्रदूषण में हानिकारक पदार्थों का एक जटिल मिश्रण होता है, जिसमें पार्टिकुलेट मैटर (PM2.5 और PM10), नाइट्रोजन डाइऑक्साइड (NO2), सल्फर डाइऑक्साइड (SO2), ओजोन (O3), और कार्बन मोनोऑक्साइड (CO) शामिल हैं। ये प्रदूषक, जब सांस के साथ शरीर में जाते हैं, तो हृदय प्रणाली में जबरदस्त हलचल करते हैं, जिससे प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, वायु प्रदूषण हर साल लगभग 7 मिलियन लोगों की समय से पहले मौत का कारण बनता है, जिसमें हृदय संबंधी बीमारियां एक प्रमुख कारण हैं। भारी यातायात, औद्योगिक उत्सर्जन और अपर्याप्त प्रदूषण नियंत्रण उपायों वाले शहरी क्षेत्र बढ़े हुए हृदय संबंधी जोखिमों के हॉटस्पॉट हैं।
निष्कर्ष: वायु प्रदूषण के कारण बढ़ रही हार्ट डिजीज के चलते हमें ये जल्द से जल्द समझना होगा कि प्रदूषण सिर्फ वातावरण को ही खराब नहीं कर रहा है, बल्कि ये एक हेल्थ एमरजेंसी भी बन गई है। सिर्फ सोसाइटी ही नहीं बल्कि निजी तौर पर भी इसके रिस्क और बचाव के तरीकों को समझते हुए जल्द से जल्द एक्शन लेना होगा ताकि प्रदूषण के कारण बढ़ रही कार्डियोवैस्कुलर डिजीज को कम किया जा सके।
पॉलिसी में बदलावों से लेकर व्यक्तिगत सावधानियों तक, सामूहिक प्रयास से प्रदूषण को मात देकर हार्ट हेल्थ को दुरुस्त रखा जा सकता है।