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ज्‍यादा हुआ प्रदूषण तो गड़बड़ हो सकता है मैथ्‍स

हाल ही में हुए शोध में हुआ यह नया खुलासा।

क्‍या आपने कभी सोचा है कि आपकी याददाश्‍त, कैलकुलेशन और वर्बल एबिलिटी इतनी कमजोर क्‍यों हैं? हालांकि सबके साथ ऐसा नहीं होगा। पर हाल ही में हुए एक शोध में यह चौंकाने वाला तथ्‍य सामने आया है कि लंबे समय तक प्रदूषण में रहने के कारण उपरोक्‍त तीनों ही क्षमताएं प्रभावित होती हैं। महिलाओं की अपेक्षा पुरुषों पर इसका असर ज्‍यादा दिखाई देता है।

क्‍या कहता है शोध

वायु प्रदूषण से न सिर्फ हमारा श्वसन तंत्र प्रभावित होता है, बल्कि मस्तिष्क पर भी इसका प्रभाव पड़ता है। बुजुर्गों को तो मुंह से शब्द तक निकालने में परेशानी होती है। एक नए शोध में खुलासा हुआ है कि वायु प्रदूषण से हमारा मस्तिष्क भी प्रभावित होता है। खासतौर पर बुजुर्गों के दिमाग पर तो वायु प्रदूषण का इतना बुरा असर होता है कि बहुत से लोग तो बोलने के लिए मुंह से शब्द तक निकालने में संघर्ष करते नजर आते हैं। हिसाब लगाने की क्षमता भी बहुत अधिक घट जाती है।

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यहां हुआ शोध

अमेरिका की येल और चीन की पेकिंग यूनिवर्सिटी के द्वारा किए गए एक साझा शोध में कहा गया है कि अगर कोई इंसान लंबे समय तक वायु प्रदूषण की चपेट में रहता है, तो उसके संज्ञान लेने या अनुभूति करने की क्षमता बुरी तरह से प्रभावित होती है। यह प्रतिकूल प्रभाव महिलाओं की तुलना में पुरुषों में ज्यादा देखा गया, खासतौर पर बुजुर्गों में।

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इस शोध के दौरान साल 2010 से 2014 के बीच चीन के करीब 32 हजार लोगों का सर्वे किया गया और वायु प्रदूषण का उनकी सेहत और दिमाग पर अल्पकालिक और दीर्घकालिक, दोनों ही स्तर पर क्या असर पड़ता है, इसकी जांच की गई।

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पुरुषों पर होता है ज्‍यादा असर

इस शोध के मुख्य लेखक जियाबो जैंग की मानें तो वायु प्रदूषण की वजह से लोगों की बोलने की क्षमता ज्यादा प्रभावित होती है। खासतौर पर पुरुषों में यह समस्या उम्र के साथ बढ़ती जाती है। जैंग कहते हैं कि संज्ञानात्मक कुशलता में किसी भी तरह की कमी या रुकावट अल्जाइमर या डिमेंशिया होने का खतरा बढ़ाती है।

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मैथ्‍स भी हो जाता है खराब

वॉशिंगटन स्थित इंटरनेशनल फूड पॉलिसी रिसर्च इंस्टीट्यूट की मानें तो इस शोध के नतीजे बताते हैं कि वैसे लोग जो लंबे समय तक वायु प्रदूषण की चपेट में रहते हैं, उनकी बोलने और गणित यानी हिसाब लगाने की क्षमता बहुत अधिक घट जाती है।

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