सिर्फ आपके सोने के तरीके की जांच करके 100 से भी ज्यादा बीमारियों का पता लगा सकता है AI

नींद हमारी दिनचर्या का एक बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो हमे स्वस्थ रखने में मदद करता है। लेकिन यह कई बार हमारे शरीर में चल रही किसी न किसी बीमारी का संकेत भी हो सकता है। एक रिसर्च में पता चला कि किस प्रकार सोने के तरीके से एआई बीमारियों का पता लगा सकता है।

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Written By: Mukesh Sharma | Updated : May 8, 2026 4:51 PM IST

हम में से अधिकतर लोग सोचते थे कि कोई ऐसी तकनीक विकसित हो जाए, जिससे बिना ढेरों टेस्ट कराएं बीमारी का पता लग जाए। आज हम आपके लिए ऐसी ही एक खुशखबरी लेकर आए हैं। असल में वैज्ञानिकों ने एक ऐसा ही अत्याधुनिक एआई तकनीक विकसित कर ली है, आपके सोने के तरीके से ही होने वाली बीमारियों का पता लगा सकती है। हालांकि इसके लिए आपको स्लीप लैब में सोना होगा। स्लीप लैब आपके मस्तिष्क की रिकॉर्डिंग का विश्लेषण करेगा और 100 से ज्यादा बीमारियों के खतरे का अनुमान लगाएगा। इससे जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले समय में सिर्फ एक रात की नींद इंसान की पूरी हेल्थ रिपोर्ट तैयार करने में सक्षम होगी।

नींद बनी सेहत का आईना

इस बात का हर किसी को पता होना जरूरी है कि बीमारियों से बचाव करने के लिए कौन से टेस्ट कराना जरूरी है। जैसा कि हमने कहा कि अब तक डॉक्टर ब्लड टेस्ट, स्कैन और मेडिकल हिस्ट्री के जरिए बीमारियों का पता लगाते थे। मगर अब इस नई एआई तकनीक से नींद हेल्थ मॉनिटरिंग का एक बड़ा माध्यम बन जाएगी। शोधकर्ताओं के बताया कि सोने के दौरान मस्तिष्क की गतिविधियां शरीर के अंदर चल रही कई समस्याओं का संकेत देती हैं, जिसे स्लीप लैब में इलेक्ट्रोएन्सेफेलोग्राम रिकॉर्डिंग के जरिए एआई समझ सकता है।

इन बीमारियों का चलता है पता?

वैज्ञानिकों के अनुसार, एआई आधारित यह तकनीक कई गंभीर बीमारियों के शुरुआती संकेतों को पकड़ सकती है। इनमें मुख्य रूर से हार्ट डिजीज, हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, डिप्रेशन, पार्किंसन, अल्जाइमर और स्ट्रोक जैसी समस्याएं शामिल हैं। विशेषज्ञों ने बताया कि नींद के पैटर्न में बदलाव अक्सर शरीर के अंदर हो रहे बदलावों का संकेत होता है, जिसे अक्सर ही आप समझ नहीं पाते हैं, उदाहरण के लिए, बार-बार नींद टूटना, डरकर उठना, मस्तिष्क की असामान्य गतिविधियां या गहरी नींद की कमी मानसिक और न्यूरोलॉजिकल बीमारियों से जुड़ी होती है। एआई इन सूक्ष्म बदलावों को इंसानों से कहीं अधिक तेजी और सटीकता से पहचान सकता है, जिससे कई परेशानियों को बढ़ने से रोका जा सकता है।

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कैसे काम करती है यह AI तकनीक

यह एआई सिस्टम स्लीप लैब में सोए हुए व्यक्ति की रिकॉर्ड की गई ब्रेन वेव्स का विश्लेषण करता है। इस एआई मॉडल को 585,000 घंटे के पॉलीसोम्नोग्राफी डेटा पर प्रशिक्षित किया है, जिनकी नींद का मूल्यांकन विभिन्न नींद क्लीनिकों में किया गया था, जिससे यह अलग-अलग नींद पैटर्न और उनसे जुड़ी बीमारियों के बीच सही संबंध को समझ पाता है। असल में जब कोई भी व्यक्ति सोता है, तब उसकी मस्तिष्क गतिविधियां, सांस लेने की गति, हार्ट रेट और शरीर की मूवमेंट अलग-अलग तरह की होती, जिसे यह सिस्टम रिकॉर्ड करता है।

हेल्थ सेक्टर में क्या बदल सकता है?

वैज्ञानिकों का कहना है कि भविष्य में यह तकनीक अस्पतालों के अलावा घरों में इस्तेमाल होने वाले स्मार्ट डिवाइस में भी शामिल हो सकती है। यानी की अगर यह तकनीक बड़े स्तर पर सफल होती है, तो मेडिकल क्षेत्र में बीमारी पहचानने का तरीका पूरी तरह बदल जाएगा और डॉक्टर किसी भी बीमारी के गंभीर होने से पहले ही मरीज को अलर्ट कर सकेंगे। सबसे खास बात यह है कि इससे ग्रामीण और दूरदराज इलाकों में जहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी है, वहां यह तकनीक बेहद काम आएगी। इसके अलावा हेल्थ चेकअप का खर्च भी कम से कम हो जाएगा, क्योंकि केवल नींद की रिकॉर्डिंग से ही कई जरूरी संकेत मिल जाएंगे।

कुछ चुनौतियां और चिंताएं भी

इस समय यह तकनीक बेहद आधुनिक और उपयोगी मानी जा रही है, लेकिन इसके साथ कुछ चुनौतियां भी जुड़ी हैं। आज के समय में एआई से जुड़ी सबसे बड़ी चिंता डेटा प्राइवेसी को लेकर है। किसी व्यक्ति की नींद और मस्तिष्क से जुड़ी जानकारी बेहद संवेदनशील होती है, जो किसी का भविष्य खराब कर सकती है। इसके अलावा एआई की सटीकता हर व्यक्ति में समान रहेगी या नहीं, इस पर भी रिसर्च होना बाकि है। विशेषज्ञों का भी कहना है कि एआई डॉक्टरों की जगह नहीं ले सकता, केवल उनके काम को आसान बना सकता है। मगर फिर भी, यह तकनीक भविष्य की हेल्थकेयर इंडस्ट्री को अधिक स्मार्ट, तेज और प्रिवेंटिव बनाने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है।

डिसक्लेमर: इस लेख का उद्देश्य केवल नींद खराब लाइफस्टाइल से स्वास्थ्य को होने वाली परेशानियों से जुड़ी सही जानकारी देना है इसमें दी गई किसी भी जानकारी का इस्तेमाल किसी भी बीमारी के इलाज के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। इसके लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।

FAQs

नींद की कमी से दिमाग पर क्या असर पड़ता है?

आपको किसी भी चीज या काम करने में ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई महसूस हो सकती है। बीच-बीच में मूड स्विंग्स या चिड़चिड़ापन हो सकता है। कोई काम करने या किभी तरह का निर्णय लेने की क्षमता में गिरावट।

अनिद्रा की समस्या क्यों होती है?

तनाव, रात में देर से खाना खाने, देर तक गैजेट्स का इस्तेमाल करने और चाय-कॉफी का अधिक सेवन करने से अनिद्रा की समस्या हो सकती है।

नींद की कमी के कारण क्या समस्याएं हो सकती हैं?

अनिद्रा  और नींद की कमी के कारण सिरदर्द, थकान, कब्ज और चिड़चिड़़ापन बढ़ने जैसी  समस्याएं हो सकती हैं।

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