
अंजू रावत
अंजू रावत एक अनुभवी हेल्थ, फिटनेस, रिलेशनशिप, ब्यूटी और लाइफस्टाइल लेखक हैं, जिन्हें इन विषयों पर लिखने ... Read More
Written By: Anju Rawat | Published : May 24, 2026 1:47 PM IST
thyroid test
थायराइड आजकल की एक आम समस्या बन गई है, कई लोग इस समस्या से जूझ रहे हैं। वैसे तो थायराइड कई प्रकार का होता है, लेकिन ज्यादातर लोगों में हाइपोथायराइडिज्म और हाइपरथायराइडिज्म देखने को मिलता है। जब किसी व्यक्ति में थायराइड का निदान होता है, तो उसके बाद से उसे जीवनभर थायराइड की दवा का सेवन करना पड़ता है। हालांकि, दवा का डोज कम या ज्यादा होता रहता है। लेकिन, थायराइड में सिर्फ दवा लेना ही एक परेशानी नहीं है, बल्कि बार-बार टेस्ट भी कराना होता है। थायराइड के मरीजों को TSH, T3 और T4 के स्तर का पता लगाने के लिए ब्लड टेस्ट कराना होता है और इसके लिए बार-बार लैब के चक्कर लगाने पड़ते हैं। इसमें समय और पैसे दोनों ही खर्च होते हैं, ऐसे में हेल्थ टेक्नोलॉजी लोगों के लिए राहत लेकर आई है। जिससे भविष्य में थायराइड मॉनिटरिंग को आसान बनाया जा सकता है। जी हां, इस समय कई रिसर्च चल रही है, जिनका कहना है कि आने वाले समय में AI और स्मार्टवॉच की मदद से थायराइड मॉनिटरिंग आसान हो सकती है। आपको बता दें कि लोगों में थायराइड रोग के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से हर साल 25 मई को विश्व थायराइड दिवस मनाया जाता है। आइए, इसी मौके पर जानते हैं कि एआई और स्मार्टवॉच से थायराइड मॉनिटरिंग कैसे आसान हो सकती है
एआई की मदद से आप कई तरह के काम कर सकते हैं। यह सिर्फ चैटबॉट या फोटो एडिटिंग तक सीमित नहीं है। मेडिकल फील्ड में भी AI का तेजी से इस्तेमाल बढ़ रहा है। जब इस पर एक रिसर्च की गई है, तो 175 थायराइड मरीजों को शामिल किया गया। Nature.com में छपी एक रिसर्च के अनुसार, मशीन लर्निंग सिस्टम ने वियरेबल हार्ट रेट डेटा की मदद से थायराइड हार्मोन बढ़ने की स्थिति को प्रिडिक्ट करने की कोशिश की। विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में डॉक्टरों को यह समझने में मदद मिल सकती है कि थायराइड मरीज की स्थिति बिगड़ रही है या स्थिर है। इससे बार-बार थायराइड टेस्ट कराने की जरूरत कम पड़ेगी।
एक रिसर्च में देखा गया है कि स्मार्टवॉच या फिटनेस ट्रेकर की मदद से थायराइड के बारे में अंदाजा लगाया जा सकता है। दरअसल, एक रिसर्च में कई लोगों को शामिल किया गया और उन्हें स्मार्चवॉच ट्रेकर पहनाया गया, इसके जरिए उनके हार्ट रेट को मॉनिटर किया गया। रिसर्च में पाया गया कि हार्ट रेट और थायराइड हार्मोन लेवल के बीच संबंध हो सकता है। क्योंकि, हाइपरथायराइडिज्म में हार्ट रेट अक्सर बढ़ जाती है। जबकि, हाइपोथायराइडिज्म में हार्ट रेट धीमी हो सकती है। ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि किसी व्यक्ति को थायराइड है या नहीं। यानी स्मार्टवॉच की मदद से शरीर में होने वाले बदलावों को पहचानने में मदद मिल सकती है।
NIH में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार, एक ऐसी टेस्टिंग टेक्नोलॉजी पर काम चल रहा है, जिसे अस्पताल या घर के पास आसानी से इस्तेमाल किया जा सकता है। भविष्य में होम टेस्टिंग किट आ सकते हैं, इससे थायराइड के मरीजों को हर छोटे बदलाव नजर आने पर अस्पताल या लैब में जाने की जरूरत कम पड़ सकती है।
हालांकि, नई टेक्नोलॉजी या टेस्टिंग किट आने के बाद भी कई मामलों में लैब में टेस्ट कराने की जरूरत पड़ सकती है। क्योंकि, थायराइड ब्लड टेस्ट को ही सबसे भरोसेमंद माना जाता है। लेकिन, स्मार्ट मॉनिटरिंग की मदद से थायराइड के मरीजों के जीवन को आसान बनाने में मदद मिल सकती है।
Disclaimer: थायराइड मरीजों के लिए भविष्य में कई तरह के बदलाव आ सकते हैं। थायराइड का टेस्ट कराने के लिए बार-बार लैब जाने की जरूरत को कम करने के लिए टेक्नोलॉजी मददगार साबित हो सकती है। आने वाला समय थायराइड रोगियों के लिए बेहतर साबित हो सकता है, थायराइड मॉनिटरिंग आसान हो सकती है।