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वैक्सीन लगवा चुके लोगों के मन में अक्सर ये ख्याल आता है कि वैक्सीन कितने दिन तक उनकी सुरक्षा कर सकती है। आखिर ये सवाल आना लाजमी भी है क्योंकि यहां बात जीने और मरने की है। हाल ही में हुई एक स्टडी में इस बात का खुलासा हुआ है कि आखिर आप कितने दिनों तक वैक्सीन लगवाने के बाद भी सुरक्षित रहते हैं। द लांसेट रेस्पिरेटरी मेडिसिन में प्रकाशित एक नए अध्ययन के मुताबिक, अगर आप बूस्टर शॉट्स नहीं लेते हैं तो आपकी लगी कोविड वैक्सीन की क्षमता धीमे-धीमे 6 महीने बाद कम होना शुरू हो जाती है।
स्टडी में इस बात का खुलासा हुआ है कि बूस्टर शॉट लेनेके 50 से 100 दिन बाद तक वैक्सीन आपको अस्पताल में भर्ती होने की 94 फीसदी क्षमता रखती है। लेकिन 200 से 250 दिन बाद ये क्षमता 80.4 फीसदी ही रह जाती है और 250 दिन बाद ये तेजी से गिरने लगती है।
प्रोवीडेंज चीफ क्लीनिकल ऑफिसर एमी कॉम्पटन फिलिप्स का कहना है कि ये डेटा हमें वैक्सीन के प्रकार से मिलने वाली सुरक्षा में होती कमी के अंतर को समझने और गंभीर रूप से संक्रमण के जोखिम कारकों को पहचानने में मदद करेगा ताकि संभावित वैक्सीन बूस्टर कार्यक्रम के लक्ष्यों की सूचना जुटाने में मदद मिल सके।
उनहोंने कहा कि ज्यादातर दूसरे अध्ययनों के विपरीत हमारा डेटा छह महीनों से ज्यादा की सुरक्षा पर ध्यान केंद्रित करता है। इस अध्ययन में हमने ये पाया कि कैसे वैक्सीन 80 साल और उससे ज्यादा उम्र के मरीजों में सुरक्षा कितनी तेजी से कम होती जाती है।
इसके अलावा समय के साथ-साथ वैक्सीन की क्षमता में कमी को भी जानने की कोशिश की गई। अध्ययन में वैक्सीन की क्षमता में कमी से जुड़े जोखिम कारकों को भी पहचानने की भी कोशिश की गई। गंभीर इंफेक्शन के मुख्य जोखिम कारकों में शामिल हैंः
1-बढ़ती उम्र (80 से ज्यादा)
2-कैंसर, ट्रांसप्लांट, क्रोनिक किडनी डिजीज, हाइपटेंशन और हार्ट फेल्योर जैसी गंभीर बीमारियां
3-वैक्सीन लगवाने के बाद समय
4-कौन सी वैक्सीन, जो आपको लगी
अध्ययन में पाया गया कि माडर्ना वैक्सीन समय के साथ-साथ सबसे ज्यादा सुरक्षा प्रदान करती है जबकि फाइजर-बायोएनटेक वैक्सीन शुरुआत में माडर्ना जितनी सुरक्षा प्रदान करती है लेकिन समय के साथ-साथ इसकी क्षमता में कमी आती जाती है।
वहीं जैनसेन वैक्सीन लगवाने वाले व्यक्तियों को भी मॉडर्न की तुलना में गंभीर संक्रमण का शिकार होने की संभावना कम होती है।
अध्ययन के लिए, शोधकर्ताओं ने अप्रैल और नवंबर 2021 के बीच लगभग 50,000 अस्पताल में दाखिल कोविड रोगियों से प्राप्त आंकड़ों की जांच की।