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Afebrile Dengue : बिना बुखार का डेंगू है ज्‍यादा खतरनाक, रहें सावधान

बिना बुखार के भी डेंगू के होने की संभावना रहती है। इसे एफेब्रिल डेंगू (Afebrile Dengue) कहा जाता है। यह सामान्‍य डेंगू बुखार से ज्‍यादा खतरनाक है और कमजोर इम्‍यूनिटी वाले लोगों को ही अपना शिकार बनाता है।

अकसर डेंगू को बुखार के तौर पर पहचाना जाता है। पर यह जरूरी नहीं है कि बुखार से ही डेंगू की पहचान हो। कई बार बिना बुखार के भी डेंगू हो सकता है। जिसे एफेब्रिल डेंगू (Afebrile Dengue) कहा जाता है। यह डेंगू बुखार से ज्‍यादा खतरनाक है क्‍योंकि लक्षण न होने के कारण मरीज इसे साधारण थकान या वायरल समझ लेता है।

क्‍या है 'एफेब्रिल डेंगू' (Afebrile Dengue)

'एफेब्रिल डेंगू' यानी बिना बुखार वाला डेंगू। मधुमेह के मरीज़ों, बूढ़े लोगों और कमज़ोर इम्यूनिटी वाले लोगों में बुखार के बिना भी डेंगू हो सकता है। ऐसे मरीज़ों को बुखार तो नहीं होता, लेकिन डेंगू के दूसरे लक्षण ज़रूर होते हैं। ये लक्षण भी इतने हल्‍के होते हैं कि मरीज इस ओर ध्‍यान ही नहीं दे पाता। इस तरह का डेंगू ख़तरनाक हो सकता है, क्योंकि मरीज को पता ही नहीं होता कि उसे डेंगू हो गया है। कई बार वो डॉक्टर के पास भी नहीं जाते।

'एफेब्रिल डेंगू' (Afebrile Dengue) के लक्षण

इस तरह के डेंगू में बहुत हल्का इंफेक्शन होता है। मरीज़ को बुखार नहीं आता, शरीर में ज़्यादा दर्द नहीं होता, चमड़ी पर ज़्यादा चकत्ते भी नहीं होते। कई बार मरीज़ को लगता है कि उसे नॉर्मल वायरल हुआ है, लेकिन टेस्ट कराने पर उनके शरीर में प्लेटलेट्स की कमी, व्हाइट और रेड ब्लड सेल्स की कमी होती है। जरनल ऑफ़ फिजिशियन ऑफ़ इंडिया की एक स्टडी के मुताबिक थाईलैंड में बच्चों में बिन बुखार वाले डेंगू के बहुत से मामले आए हैं। स्टडी के मुताबिक वहां के 20 फ़ीसदी बच्चों में इस तरह का डेंगू पाया गया है।

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[caption id="attachment_676273" align="alignnone" width="655"]Dengue without fever, Afebrile dengue. इस तरह के डेंगू में बहुत हल्का इंफेक्शन होता है। मरीज़ को बुखार नहीं आता, शरीर में ज़्यादा दर्द नहीं होता, चमड़ी पर ज़्यादा चकत्ते भी नहीं होते। ©Shutterstock.[/caption]

ये लोग होते हैं ज्‍यादा शिकार

  • बुज़ुर्गों, छोटे बच्चों
  • कमज़ोर इम्यूनिटी वाले लोगों
  • मधुमेह के मरीज़
  • कैंसर के मरीज़
  • या जिनका ट्रांसप्लांट हुआ हो

इस मौसम में रहें सावधान

विशेषज्ञ मानते हैं कि जुलाई से अक्टूबर के दौरान अगर किसी को शरीर में दर्द, थकान, भूख ना लगना, हल्का-सा रैश, लो ब्लड प्रेशर जैसी समस्या हो, लेकिन बुखार की हिस्ट्री ना हो, तो वो बिना बुखार वाला डेंगू (Afebrile Dengue) हो सकता है। इसलिए डॉक्टर की सलाह अवश्य लें। अगर मरीज़ सही समय पर प्लेटलेट्स चेक नहीं कराता, तो दिक्कत हो सकती है।

यह भी पढ़ें - घर में ही मौजूद है डेंगू से बचने के उपाय

बुखार ना हो तब भी रहें सावधान

कई बार जब डेंगू का मच्छर काटता है तो वो खून में बहुत कम वायरस छोड़ता है। इसलिए डेंगू के लक्षण भी बहुत हल्के होते हैं। वायरस की मात्रा के अनुसार ही लक्षण नजर आते हैं। कई बार वायरस इतना कम होता है कि लक्षण नजर ही नहीं आते। पर भीतर ही भीतर वह फैलता रहता है (Afebrile Dengue) , जिससे प्लेजटलेट्स कम होते जाते हैं और यह स्थिति खतरनाक हो सकती है।

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