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बिहार में एईएस के कहर से 7 बच्चों की मौत, जानें एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम के लक्षण और कारण।© Shutterstock.
Acute Encephalitis Syndrome: एक तरफ बिहार (Bihar) में कोरोनावायरस के मामले (Coronavirus cases in bihar) लगातार बढ़ रहे हैं, तो दूसरी तरफ एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम (Acute encephalitis syndrome) के कारण बच्चों की मौत हो रही है। इन दिनों बिहार में तापमान के बढ़ने के कारण मुजफ्फरपुर सहित कई जिलों में एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम (एईएस) का खतरा (Bihar encephalitis outbreak) बढ़ रहा है। मौसम की तल्खी और हवा में नमी की अधिकता के कारण एईएस नामक बीमारी से अब तक सात बच्चों की मौत हो चुकी है। हालांकि, पिछले साल की तुलना में यह आंकड़ा कम है।
स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी के अनुसार, 31 मई तक राज्य में 76 बच्चे एईएस (AES) की चपेट में आए हैं। इनमें से पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल (पीएमसीएच) में 14, अनुग्रह नारायण मेडिकल कॉलेज अस्पताल (एएनएमसीएच), गया में एक, श्रीकृष्ण मेडिकल कॉलेज अस्पताल (एसकेएमसीएच), मुजफ्फरपुर में 37, केजरीवाल अस्पताल में पांच व पूर्वी चंपारण सहित विभिन्न पीएचसी में 13 बच्चों का इलाज किया गया।
इनमें से एसकेएमसीएच में इलाज करा रहे पांच बच्चों की मौत हो चुकी है। इसके अलावा पीएमसीएच में एक व पीएचसी में इलाज करा रहे एक बच्चे की मौत हुई है। इस बार एईएस से पीड़ित नौ बच्चों में जेई का वायरस पाया गया। मरने वाले एक बच्चे में भी इसी वायरस का असर था। उन्होंने बताया कि इसमें 57 एईएस के रोगी थे, जबकि 19 मामले एईएस (अननोन) की श्रेणी के थे।
एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम को चमकी बुखार (Chamki Bukhar) या मस्तिष्क ज्वर भी कहते हैं। चमकी बुखार को बिल्कुल हल्के में ना लें। अक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम (AES) होने पर शरीर का मुख्य नर्वस सिस्टम यानी तंत्रिका तंत्र प्रभावित होता है। यह गंभीर समस्या बच्चों में अधिक होता है। एईएस से पीड़ित बच्चों में बुखार (Symptoms of Acute encephalitis syndrome) अचानक शुरू होता है। शरीर में ऐंठन होती है। ऐसी स्थिति में पीड़ित बच्चों को इलाज के लिए बिना देरी किए पास के हॉस्पिटल में भर्ती कराना जरूरी होता है। इससे जीवित रहने की संभावना बढ़ जाती है। अब तक ऐसा देखने को मिला है कि एईएस के शिकार ज्यादातर गरीब तबके के बच्चे होते हैं।
इन्सेफ्लाइटिस रोग विषाणु के प्रकोप से होता है। यह विषाणु इतने सूक्ष्म होत हैं कि साधारण सूक्ष्मदर्शी (माइक्रोस्कोप) से भी नहीं देखे जा सकते हैं। इस रोग का वाहक मच्छर किसी स्वस्थ्य व्यक्ति को काटता है, तो विषाणु उस व्यक्ति के शरीर में प्रवेश कर जाते हैं। लगभग 4 दिन से चौदह दिन के अन्दर उस व्यक्ति में इस रोग के लक्षण दिखने लगते हैं।
दिमाग में ज्वर
सिरदर्द
ऐंठन, उल्टी और बेहोशी
शरीर निर्बल हो जाना
कुछ रोगियों के गर्दन में अकड़न आ जाती है।
राष्ट्रीय मानसिक आरोग्य एवं स्नायु विज्ञान संस्थान (निमहांस) इस महीने एईएस यानी मस्तिष्क ज्वर से निपटने और इस पर व्यापक शोध करने जा रही है। निमहांस की टीम एईएस (Acute encephalitis syndrome) पीड़ित बच्चों की लैब जांच एसकेएमसीएच के पीआईसीयू एंड रिसर्च सेंटर में शुरू करेगी। निमहांस के विशेषज्ञों की टीम के आने से पहले यहां भर्ती होने वाले बच्चों व पूर्व में लिए गए ब्लड सैंपल, यूरिन व रीढ़ के पानी की जांच एसकेएमसीएच के माइक्रोबायोलजी की वायरोलॉजी लैब में होगी।
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