hamburger icon
A
Read in English

बच्चों के फेफड़ों पर अटैक कर रहा है एडिनोवायरस, ऐसे बनाएं बच्चों के लंग्‍स को जल्दी स्‍ट्रांग

एडिनोवायरस (Adenovirus) से संक्रमित व्यक्ति में संक्रमण के हल्के और गम्भीर लक्षण दिखायी दे सकते हैं। कमजोर फेफड़ों के कारण बच्चों और बुजुर्गों को यह वायरस अधिक प्रभावित करता है।

WrittenBy

Written By: Sadhna Tiwari | Updated : February 27, 2023 10:33 PM IST

Tips For Healthy Lungs: कोलकाता में एडिनोवायरस के बढ़ते मामलों (Adenovirus cases in Kolkata) ने चिंता बढ़ा दी है । रविवार को कोलकाता शहर में 3 और बच्चों की मौत एडिनोवायरस के कारण हो गयी। हेल्थ डिपार्टमेंट की रिपोर्ट के अनुसार, शनिवार और रविवार को दर्ज आंकड़ों के अनुसार शहर में 3 बच्चों की मौत एडिनोवायरस की वजह से हो गयी। मिली जानकारी के अनुसार मृतक बच्चों में से एक 9 महीने की बच्ची है, जो हावड़ा के उदयनारायणपुर इलाके की रहने वाली थी। (Tips For Healthy Lungs Of Kids In Hindi)

क्या है एडिनोवायरस? (What is Adenovirus ?)

एडिनोवायरस (Adenovirus)हवा से फैलने वाला एक वायरस है। यह श्वसन मार्ग यानि रेस्परेटरी सिस्टम (Respiratory System) में होने वाला एक संक्रमण है। इससे संक्रमित व्यक्ति में संक्रमण के हल्के और गम्भीर लक्षण दिखायी दे सकते हैं। यह बच्चों से लेकर बुजुर्गों में किसी को भी हो सकता है क्योंकि इन दोनों का ही इम्यून सिस्टम और फेफड़े कमजोर होते हैं और संक्रमण और बीमारियों की चपेट में आने का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में बच्चों के फेफड़ों को मजबूत बनाने के लिए इस तरह के उपाय किए जा सकते हैं।

पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. चेतन जैन (Dr. Chetankumar D Jain, Respiratory Diseases, Pulmonologist, Zynova Shalby Hospital) ने कहा कि, एडिनोवायरस बच्चों में हल्के से गंभीर संक्रमण का कारण बनता है। एडिनोवायरस से संक्रमित होने वाले बच्चों में जो लक्षण दिखायी देते हैं उनमें, बुखार, कॉमन कोल्ड, गले में खिचखिच, ब्रोंकाइटिस, निमोनिया और कंजक्टिवाइटिस जैसी समस्याएं मुख्य हैं। वहीं, बच्चों में गैस्ट्रोएंटेराइटिस जैसे लक्षण भी दिखायी दे सकते हैं।

च्चों के फेफड़ों को स्ट्रॉन्ग बनाने के लिए टिप्स (Tips to make lungs healthy and strong)

एडिनोवायरस संक्रमण के खतरे के बीच बच्चों को सुरक्षित रखने और बच्चों के लंग्स को मजबूत बनाने के लिए डॉ. चेतन जैन कुछ बातों का ख्याल रखने की सलाह देते हैं-

प्रदूषण से बचें (Stay away from pollution)

बच्चों को प्रदूषण से बचाने का प्रयास करें। बच्चों को घर से बाहर भेजने से पहले हो सके तो उन्हें मास्क जरूर पहनाएं। इसी तरह स्कूल से आने और स्कूल जाते समय उन्हें ऐसे रास्तों से ले जाएं जहां प्रदूषण और धुआं कम हो। घर से निकलने से पहले ऑनलाइन ट्रैफिक और प्रदूषण का स्तर देख लें।

प्रदूषण वाले दिनों में ना निकलें घर से बाहर (Stay indoor)

मौसम बदलने के साथ और खासकर, सर्दियों में कई बार कुछ दिनों तक लगातार धूल-मिट्टी, धुआं और स्मॉग बना रहता है। ऐसे में बच्चों को बाहर ना ले जाएं। उन्हें घर में ही रखें और फेस मास्क का इस्तेमाल करने के लिए कहें। ( Stay indoors on polluted days)

बाहर पार्क में खेलने ना दें (Don't play outside)

जब भी प्रदूषण का स्तर बढ़ जाए या किसी वायरस का खतरा बढ़ जाए तब बच्चों को घर के बाहर खेलने से रोकें। बाहर खेलने से बच्चे वायरस की चपेट में आ सकते हैं। इसीलिए, बच्चों को प्रदूषण वाले दिनों में घर के भीतर ही खेलने के लिए कहें।

पीएं ढेर सारा पानी (Drink enough water)

बच्चों को दिन में थोड़ी-थोड़ी देर में पानी पीने के लिए दें। अधिक मात्रा में पानी पीने से शरीर में जमा गंदगी और टॉक्सिंस बाहर निकल जाती है। साथ ही हाइ्ड्रेटेड रहने से सुस्ती और थकान भी कम महसूस होती है।(Benefits of drinking water)

हेल्दी डाइट खाएं

प्रदूषण के नुकसान से बचने का एक सबसे अच्छा तरीका है हेल्दी डाइट खाना। इससे शरीर को पर्याप्त मात्रा में पोषक तत्व प्राप्त होते हैं और बीमारियों और इंफेक्शन से शरीर सुरक्षित रहता है। अपनी डाइट में विटामिन सी और विटामिन ई से भरपूर फूड्स शामिल करें। ताजे फल और सब्जियों से डाइटरी फाइबर (dietary fiber) और एंटीऑक्सीडेंट्स (antioxidants) भी मिलते हैं जो इम्यून पॉवर को बढ़ाते हैं।

ये टिप्स भी आएगी काम (Tips for healthy lungs)

  • बच्चे के आसपास सिगरेट ना पीएं और स्मोकिंग करने वालों से बच्चों को दूर रखें।
  • बच्चे को रोजाना डीप ब्रीदिंग एक्सरसाइज करने के लिए कहें।
  • बच्चे को ताजे फल, सब्जियां, साबुत अनाज, दालें और बींस वाली डाइट खिलाएं।
  • सेब, बीटरूट, साग, कद्दू, हल्दी, ब्लूबेरी और ड्राई फ्रूट्स खिलाएं।
  • बच्चे को बीमार लोगों से दूर रखें।
  • थोड़ी-थोड़ी देर पर बच्चे को हाथ धोने के लिए कहें।
  • घर में साफ-सफाई का ध्यान रखें। बार-बार छूने वाली सतहों जैसे नल, दरवाजे के हैंडल, फर्नीचर और सिंक को सैनिटाइज करते रहें।
  • बच्चे को पर्याप्त आराम देना चाहिए।
  • रूटीन चेकअप कराएं।