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10 बीमारियों से जूझ रहे लोगों को सबसे ज्यादा होती है Acidity! जानें एसिटिडी को कम करने वाली आपकी 4 अच्छी आदतें
मौजूदा वक्त की सबसे आम बीमारियों में से एक जिससे लगभग हर कोई अपने रोजाना के जीवन में कम से कम एक बार जूझता है, वह है एसिडिटी। सीधे शब्दों में कहें तो यह एक ऐसी स्थिति है जिसके परिणामस्वरूप पेट बहुत अधिक एसिड पैदा करता है। इससे न केवल पेट खराब होता है बल्कि अपच, मुंह में खट्टा स्वाद और निगलने में कठिनाई जैसे अन्य लक्षण भी सामने आते हैं। हैदराबाद के कामिनेनी अस्पताल में सीनियर गैस्ट्रोएनटेरोलॉजिस्ट डॉ. किशन का कहना है कि एसिडिटी एक चिकित्सीय स्थिति है जो अत्यधिक अम्ल उत्पादन के कारण होती है। यह एसिड पेट में मौजूद ग्रंथियों द्वारा बनाया जाता है। एसिडिटी के लक्षणों में पेट में अल्सर, गैस्ट्रिक सूजन और अपच शामिल हैं।
हमारे खाना खाने के बाद जब भोजन हमारे पेट में पहुंचता है तो पेट की जठर ग्रंथियां एसिड का उत्पादन करती हैं, जिसकी आवश्यकता भोजन को तोड़ने और किसी भी सूक्ष्मजीव को मारने के लिए होती है। जब जठर ग्रंथियां पाचन के लिए आवश्यकता से अधिक अम्ल का उत्पादन करती हैं, तो इस स्थिति को एसिडिटी के रूप में जाना जाता है। पेट के ठीक ऊपर या छाती की हड्डी के ठीक नीचे जलन होना इस स्थिति को परिभाषित करता है। भारतीयों द्वारा अधिक मात्रा में फैटी फूड्स और मसालेदार भोजन का सेवन एसिडिटी का कारण बनता है।
1-जो लोग अक्सर मसालेदार भोजन करते हैं,
2- अत्यधिक मात्रा में शराब पीते हैं
3-अक्सर मांसाहारी भोजन करते हैं
1-मोटापे से ग्रस्त
2-मेनोपॉज वाली महिलाओं में
3-गर्भवती महिलाओं को
4-जोलिंगर-एलिसन सिंड्रोम
5-डायबिटीज
6- अस्थमा
7-- हाइटल हर्निया
8- पेप्टिक अल्सर
9- अस्थमा रोगियों को
10- नॉन स्टेरॉयड एंटी-इंफ्लेमेटरी दवा लेने वाले लोगों में
1-जलन से दर्द या बेचैनी जो पेट में उत्पन्न हो सकती है और छाती, पेट, या यहा तक कि गले तक फैल सकती है।
2-जब खट्टा या कड़वा स्वाद वाला एसिड मुंह या गले में वापस आ जाता है, तो यह धब्बों पर घाव का कारण बनता है।
3-पेट फूलना, खूनी या काला मल, बार-बार डकार आना, निगलने में समस्या, लगातार हिचकी, मतली, उल्टी, लगातार भरा हुआ महसूस होना, गले में खराश, लगातार सूखी खांसी, बेचैनी, अपच, और बिना किसी वजह के वजन कम होना ये सभी लक्षण हैं।
एक अध्ययन के अनुसार, कम कार्ब वाली डाइट एसिडिटी के लक्षणों को कम कर सकती है, खासकर मोटे लोगों में। ऐसा इसलिए क्योंकि बहुत अधिक कार्बोहाइड्रेट खाने से आप फूला हुआऔर गैसी महसूस करते हैं, जिससे सीने में जलन हो सकती है।
एसिड के जोखिम को कम करने के आसान तरीकों में से एक बार-बार भोजन करना। ऐसा इसलिए क्योंकि अधिक खाने से निचले एसोफेजल स्फिंकर (एलईएस) पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है, एक वाल्व जैसी मांसपेशी जो पेट में एसिड सामग्री को पेट में प्रवेश करने से रोकती है।
धीरे-धीरे भोजन करना और अपने भोजन को अच्छी तरह चबाना पाचन रसों को भोजन को तोड़ने और पचाने के लिए पर्याप्त समय देता है।
पाचन संबंधी समस्याओं के लिए प्रमुख कारणों मे से एक है खराब खान-पान। काम के दबाव के कारण रात में देर से खाने से या शाम को ढेर सारे स्नैक्स खाने से सीने में जलन हो सकती है। इसलिए देर रात या सोने से ठीक पहले खाने से परहेज करें।