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WHO के मुताबिक भारत में महिलाओं को अधिक होता है डिप्रेशन, कारण जानकर हैरान रह जाएंगे आप

10 अक्टूबर को वर्ल्ड मेंटल हेल्थ डे (World Mental Health Day) मनाया जाता है। इस हेल्थ डे को मनाने का मकसद लोगों को मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरुक करना होता है और ज्यादा से ज्यादा जानकारी देना होता है। इसलिए आज इस मौके पर हम आपको बता रहे हैं कि आखिर क्यों हमारे देश में पुरुषों की तुलना में महिलाएं अधिक मानसिक रोगों का शिकार बनती हैं। साथ ही हम इसके कारणों और अन्य विषयों पर भी चर्चा करेंगे। तो आइए पढ़ते हैं विस्तार से-

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Written By: Rashmi Upadhyay | Updated : October 7, 2020 8:44 PM IST

हमारे देश भारत में मानसिक रोगों के मामले लगातार बढ़ते ही जा रहे हैं। स्थिति यह है कि हर 7 में से एक व्यक्ति या करीब 19.7 करोड़ लोग किसी न किसी मानसिक रोग से घिरे हुए हैं। मानसिक रोग के इतने भयानक आंकड़े हमारे सामने हैं इसके बावजूद आज भी हमारे देश में मेंटल हेल्थ को एक टैबू समझा जाता है। यदि कोई व्यक्ति किसी मानसिक रोग से पीड़ित होता है तो उसे सबसे छिपाकर डॉक्टर के पास जाना पड़ता है। या फिर वह इस डर से डॉक्टर के पास जाता ही नहीं है कि यदि इस बारे में उसके करीबियों या समाज के अन्य लोगों को पता चल गया तो वह उसे पागल या पता नहीं क्या क्या नहीं कहेंगे! ये बातें इस बात की ओर इशारा करती हैं कि हमारे देश के लोगों को मेंटल हेल्थ के प्रति जागरुक करने की काफी जरूरत है।

10 अक्टूबर को वर्ल्ड मेंटल हेल्थ डे (World Mental Health Day) मनाया जाता है। इस हेल्थ डे को मनाने का मकसद लोगों को मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरुक करना होता है और ज्यादा से ज्यादा जानकारी देना होता है। इसलिए आज इस मौके पर हम आपको बता रहे हैं कि आखिर क्यों हमारे देश में पुरुषों की तुलना में महिलाएं अधिक मानसिक रोगों का शिकार बनती हैं। साथ ही हम इसके कारणों और अन्य विषयों पर भी चर्चा करेंगे। तो आइए पढ़ते हैं विस्तार से-

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जानिए क्या कहती है WHO की रिपोर्ट

हमारे देश में करीब 3.9% महिलाएं एंग्जाइटी की शिकार हैं, जबकि केवल 2.7% पुरुषों को एंग्जाइटी नाम मानसिक रोग है। 'वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम' वेबसाइट के अनुसार WHO का कहना है कि महिलाएं पुरुषों की तुलना में अधिक डिप्रेशन की शिकार हैं। न सिर्फ डिप्रेशन बल्कि महिलाओं में एंग्जाइटी, बाइपोलर डिसऑर्डर और स्किजोफ्रीनिया जैसे मानसिक रोग भी आम हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार दुनियाभर में डिप्रेशन सबसे सामान्य बीमारी बन रही और मौजूद वक्त में करीब 35 करोड़ लोग डिप्रेशन की चपेट में हैं। 'द लांसेट साइकेट्री' में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक डिप्रेशन से ग्रस्त महिलाओं द्वारा आत्महत्या के कदम उठाना आम बात है। रिसर्च में कहा गया है कि साल 1990-2017 के बीच देश में मानसिक स्वास्थ्य संबधी बीमारियां लगभग दोगुना बढ़ गई है।

क्या हैं इसके कारण

कई ऐसे कारण हैं जो महिलाओं को डिप्रेशन का शिकार बनाते हैं। ये कारण कुछ ऐसे हैं जिन्हें सिर्फ एक महिला ही महसूस कर सकती है। जैसे कि जेंडर बेस्ड वॉइलेंस, समाज में बराबरी का दर्जा न मिलना, सेलेरी में अंतर, सामाजिक और पारिवारिक दबाव, लो सोशल स्टेटस और रैंक, सुपर वूमेन बनने की होड़, काम के साथ परिवार की जिम्मेदारी और अपनी पर्सनल समस्याएं आदि महिलाओं में बढ़ते डिप्रेशन का कारण बन रही है।

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मानसिक रोग का पता चलने पर क्या करें?

चाहे कोई भी मानसिक रोग हो, उसके लक्षण व्यक्ति के स्वभाव में दिखने लगते हैं। इसलिए जरूरी है कि अपने शरीर में दिखने वाले हर छोटे से छोटे परिवर्तन पर नजर रखें और नोटिस करते ही तुंरत किसी अच्छे मानसिक डॉक्टर से संपर्क करें। इसके साथ ही ऐसी चीजों से या लोगों से दूर रहें जिनसे आपको नेगेटिव फीलिंग आती हो। दिनभर में अपने लिए थोड़ा सा समय निकालकर कोई ऐसा काम करें जिससे आपको खुशी मिले।