भारतीय वैज्ञानिकों ने बनाया ऐसा पेप्टाइड, जो कोरोना को सेल्स में जाने से रोकने का करता है काम, जानें क्या है ये

भारतीय वैज्ञानिकों ने एक सिंथेटिक पेप्टाइड तैयार किया है, जो कोरोनावायरस को मानव कोशिकाओं में पहुंचने से रोक सकता है। जानिए कैसे करता है ये काम।

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Written By: Jitendra Gupta | Published : July 15, 2022 4:01 PM IST

भारतीय वैज्ञानिकों ने एक नए तरह का सिंथेटिक पेप्टाइड तैयार किया है, जो संभावित रूप से कोरोनावायरस को मानव कोशिकाओं में पहुंचने से रोक सकता है। इस पेप्टाइड में कोविड के वायरस पार्टिकल्स के गुच्छों को एक साथ रोकने की शक्ति है और इस वजह से ये पेप्टाइड वायरस के कोशिकाओं को संक्रमित करने की क्षमता को कम कर देता है।

कोरोनावायरस के इंसानी कोशिकाओं में प्रवेश को रोकने का ये तरीका ऐसे वक्त में सामने आया है जब देश के कुछ हिस्सों में फिर से कोविड के मामले सामने आ रहे हैं। कोविड के बढ़ते मामलों के बीच कुछ राज्यों में फिर से पुराने प्रतिबंध लगाए जाने का डर सता रहा है, जिस तरीके से 2020 और 2021 में दो लॉकडाउन लगाए गए थे।

कैसे काम करता है ये सिंथेटिक पेप्टाइड?

ऐसा जाना जाता है कि प्रोटीन से प्रोटीन का टकराना अक्सर एक ताले और चाबी जैसा होता है। ये टकराव एक सिंथेटिक पेप्टाइड द्वारा रोका जा सकता है, जो वायरस के हमारी कोशिकाओं को संक्रमित करने से रोकने का काम कर सकता है। हाल ही में तैयार ये सिंथेटिक पेप्टाइड कुछ सिद्धांतों पर काम करेगा।

आईआईएससी ने तैयार किया ये पेप्टाइड

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने एक बयान में कहा है कि इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंसेज के वैज्ञानिकों ने सीएसआईआर के इंस्टीट्यूट ऑफ माइक्रोबियल टेक्नोलॉजी के शोधकर्ताओं के साथ मिलकर ये पेप्टाइड तैयार किया है। ये पेप्टाइड कोरोनावायरस की सतह पर मौजूद स्पाइक प्रोटीन को ब्लॉक करने के साथ-साथ उसे रोकने का भी काम करता है।

इस काम पर जुटे हुए हैं वैज्ञानिक

फिलहाल भारतीय वैज्ञानिक कोरोनावायरस के स्पाइक प्रोटीन और ACE2 प्रोटीन के बीच टकराव को निशाना बनाने वाले SIH-5 नाम के पेप्टाइड का प्रयोग कर अपनी हाइपोथिसिस की जांच करने के प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं। ACE2 प्रोटीन, इंसानी कोशिकाओं में कोरोनावायरस का रिसेप्टर है।

भारतीय वैज्ञानिकों के ये निष्कर्ष नेचर पत्रिका में प्रकाशित हुए हैं।

अगली कड़ी के लिए अध्ययन किए जा रहे रहैं, जो कोविड से सुरक्षा के नए तरीकों के लिए उम्मीद जगाने का काम कर रही हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि ये पहल उपचार और वैक्सीनेशन के मौजूद तंत्र को और मजबूत बनाने का काम करेगी।