
रश्मि उपाध्याय
रश्मि उपाध्याय साल 2014 से मीडिया क्षेत्र से जुड़ी हैं और TheHealthSite.Com में बतौर एडिटर काम कर रही हैं। इन्हें ... Read More
Dr Ruchi Garg, who is on a COVID-19 emergency duty, shares how her life has changed after the pandemic.
डॉक्टर्स इस धरती पर एक ऐसे इंसान होते हैं जिन्हें कई मयानों में भगवान माना जाता है। यह जिंदगी बचाने के साथ ही जिंदगी देते भी हैं। कोरोनावायरस ने पिछले कुछ समय से देश ही नहीं बल्कि दुनियाभर में आतंक मचाया हुआ है। ऐसे नाजुक समय में हर इंसान बाहर निकलने से डर रहा है। इसके बावजूद डॉक्टर्स ही वह फ्रंटलाइन वॉरियर्स हैं जो अपनी जान को जोखिम में डालकर कोविड-19 कोरोना मरीजों का इलाज कर रहे हैं। क्या आपने कभी सोचा है कोरोना मरीजों का इलाज करते वक्त डॉक्टर्स का कैसा अनुभव होता है? उन्हें किन चुनौतियों का सामना करना पड़ता है? और वह खुद को और अपने परिवार को कैसे सुरक्षित रख पाते हैं? तो आज राष्ट्रीय डॉक्टर्स डे के मौके पर कौशांबी स्थित यशोदा हॉस्पिटल में एमेरजेंसी मेडिसन विभाग की कन्सलटेंट एंड एचओडी डॉक्टर रुचि हमें बता रही हैं कि कोरोना मरीजों के साथ उनका दिन कैसा बीतता है। तो आइए सवालों और जवाबों से माध्यम से जानते हैं।
प्रश्न-1. कोरोनावायरस की वजह से डॉक्टर्स की जिंदगी में क्या बदलाव आया है?
उत्तर- 1. कोरोनावायरस से पहले डॉक्टर्स अपना उस तरह से शायद ध्यान नहीं रखते हैं जैसे अब रख रहे हैं। डॉक्टर रुची कहती हैं कि जब से वह कोरोना मरीजों का इलाज कर रही हैं तब से उनके लाइफस्टाइल में बहुत बदलाव आ गया है। अब उनके दिन की शुरुआत मल्टीविटामिंस के सेवन और नियमित रूप से योगा और एक्सरसाइज भी करती हैं। इसके साथ ही वह इन दिनों सुरक्षा प्रदान करने वाले अन्य चीजों पर भी निर्भर हो गए हैं।
2. डॉक्टर कहती हैं कि पहले डॉक्टर्स सीधे एमरजेंसी रूम में चले जाते थे लेकिन अब रूम में एंटर करने से पहले उन्हें कई चीजें प्राथमिक तौर पर करनी पड़ती है। जैसे कि पीपीई किट, फेस मास्क, स्प्रे, फेस शील्ड, दस्ताने और सिर से लेकर पैरों के तलवे तक खुद को पैक रखना आदि।
3. हम डॉक्टर को अपनी सुरक्षा के साथ साथ उन लोगों की सुरक्षा के बारे में भी सोचना पड़ता है जो कोरोना के मरीज नहीं है। इन दिनों अस्पतालों में कोरोना मरीजों की संख्या काफी बढ़ गई है साथ ही अन्य मरीज भी भारी संख्या में एमरजेंसी रूम में आते हैं। ऐसे में अब हमारे ऊपर खुद की सेफटी के साथ साथ सामान्य मरीजों को सेफ रखने की भी जिम्मेदार आ गई है।
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प्रश्न-2. कोरोना के इस दौर में डॉक्टर पर इमोशनली प्रेशर कितना बढ़ गया है?
उत्तर- हां, यह सच है कि कोरोनावायरस के दौर में डॉक्टर्स पर इमोशनल प्रेशर काफी बढ़ गया है। मरीजों को अच्छा महसूस हो और वह जल्दी रिकवर करें यह सोचकर जहां एक ओर हम कोरोना मरीजों के साथ स्माइल और पर्सनल होकर बात कर रहे हैं वहीं, उसी ढंग से अपनी फैमिली को भी मैनेज कई बार बहुत मुश्किल हो जाता है। डॉक्टर रुचि कहती हैं कि वह जब घर जाती हैं तो सबसे अलग होकर पहले अपने हाथ सैनिटाइज़ करती है, फिर नहाती हैं और उसके बाद ही अपने बच्चों से और घर के अन्य लोगों से मिलती हैं। हॉस्पिटल के प्रेशर को हम घर पर नहीं दिखा सकते, क्योंकि घरवाले और बच्चे हमें लेकर पहले से ही काफी डरे हुए होते हैं और घर आने के बाद कई सवाल करते हैं। हालांकि इन सवालों में उनका प्यार होता है लेकिन एक अकेले इंसान के लिए ये सब एक ही समय पर मैनेज करना कभी कभी मुश्किल हो जाता है।
प्रश्न-3. इतने नाजुक समय में डॉक्टर कैसे खुद को पॉजीटिव रख रहे हैं?
उत्तर- यह बात सच है कि वक्त बहुत नाजुक है। डॉक्टर्स फ्रंटलाइन वॉरियर्स हैं इसलिए मरीजों का इलाज करने के दौरान वह जल्दी संक्रमण का शिकार हो जाते हैं। यही कारण है कि खुद की जान बचान के लिए कई डॉक्टर्स ने रिजाइन तक दे दिया है। लेकिन एक डॉक्टर के लिए वो पल बहुत स्पेशल होता है जब उसकी वजह से किसी व्यक्ति की जान बचती है। डॉक्टर रुचि कहती हैं कि जब उनके इलाज करने से कोई कोरोना का मरीज सही होकर घर वापिस जाता है तो मरीज के चेहरे पर ऐसी खुशी होती है जैसे कि उसका दूसरा जन्म हुआ है और यही चीज मुझे मोटिवेट भी करती है और पॉजीटिव वाइब्स भी देती है।
प्रश्न-4. कोरोना मरीजों का इलाज करते वक्त सबसे बड़ा चैलेंज क्या है?
उत्तर- कई बार डॉक्टर्स एमरजेंसी वार्ड में लगातार आ रहे क्रिटिकल केसेस को लेकर पहले ही स्ट्रेस में रहते हैं, ऐसे में यदि कोई पेशेंट डॉक्टर पर चिल्लाता हैं या ऊंची आवाज में बात करता है तो बहुत बुरा लगता है। अक्सर ऐसा तब होता है जब पेशेंट को अस्पताल में बेड नहीं मिलता है और वह इलाज के लिए यहां वहां भटकता है। हालांकि ऐसा नहीं है कि हर बार ऐसा होता है। कई मरीज ऐसे भी आते हैं जो हमारे साथ बहुत कॉर्पेट करते हैं। इसके अलावा कई बार डॉक्टर्स को भी सुरक्षा के इंतजामों से जूझना पड़ता है। चाहे प्राईवेट हॉस्पिटल हो या सरकारी, नर्स, वॉर्ड ब्वॉय और डॉक्टर्स को मिलाकर इतने लोग हो जाते हैं कि कभी-कभी हमें खुद संक्रमण की चपेट में आने से डर लगने लगता है। लेकिन फिर भी मरीजों का इलाज करते हैं।
प्रश्न-5. क्या ऐसा कुछ है जो डॉक्टर्स सरकार से चाहते हों?
उत्तर- जिस हिसाब से लगातार कोरोना के मरीजों की संख्या बढ़ रही है उसे देखकर फिर से लॉकडाउन किया जाना चाहिए। साथ ही गरीबों को इलाज में भी छूट मिलनी चाहिए। क्योंकि सरकारी अस्पताल हो या प्राईवेट, कोरोना का इलाज काफी महंगा है और बेड मिलना भी मुश्किल हो गया है। इसलिए गरीबों के लिए सरकार को कुछ करना चाहिए। अगर फिर से लॉकडाउन होगा तो शायद कोरोना के मरीजों की संख्या में कुछ कमी आएं।
प्रश्न-6. कुछ ऐसी टिप्स जो आप एक डॉक्टर होने के नाते लोगों को देना चाहेंगी?
उत्तर- कोरोना मरीजों को तो मास्क पहनना ही है साथ ही सामान्य लोगों को भी बाहर निकलते वक्त हमेशा मास्क पहनना चाहिए। साथ ही इन दिनों बाहर के खाने और जंक फूड को अवाइड करें। अपनी इम्युनिटी बढ़ाने के लिए जितना हो सके हेल्दी चीजों का सेवन करें और दिन में एक बार काढ़ा पीएं।