हेपेटाइटिस ए (Hepatitis A)

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हेपेटाइटिस एक प्रकार का वायरल संक्रमण होता है, जिस से लिवर (यकृत) में सूजन होने लगती है। यह शराब का अधिक सेवन करने, किसी दवा से होने वाले विषाक्त दुष्प्रभाव या किसी ऑटोइम्यून रोग के कारण भी हो सकता है। हेपेटाइटिस कई अलग-अलग प्रकार के होते हैं जैसे हेपेटाइटिस ए, बी, सी, डी और ई। इसका हर प्रकार अलग-अलग कारणों से विकसित होता है। हेपेटाइटिस ए का कारण बनने वाले वायरस को हेपेटाइटिस ए वायरस (HAV) कहा जाता है, जिससे होने वाले लक्षण अचानक से विकसित होते हैं और थोड़े समय तक ही रह पाते हैं। हेपेटाइटिस ए संक्रमण अचानक से गंभीर रूप धारण कर लेता है और इस कारण से यह एक छोटी संख्या में लोगों के लिए जानलेवा भी हो सकता है। हेपेटाइटिस ए से होने वाली कुल मौतों में 0.5 फीसद मौत हेपेटाइटिस ए से ही होती है। यह आमतौर पर उचित स्वच्छता न बरत पाने के कारण होता है और भोजन से होने वाले संक्रमण (Foodborne infections) भी हेपेटाइटिस ए के प्रमुख कारणों में से एक है। ऐसा इसलिए है क्योंकि यह वायरस भोजन बनाने की कई प्रक्रियाओं के दौरान जिंदा रह सकता है, जिसमें अन्य रोगाणु मर जाते हैं। हेपेटाइटिस ए का निदान लक्षणों की जांच करके किया जाता है और कुछ टेस्टों की मदद से इसकी पुष्टि की जा सकती है। हेपेटाइटिस ए के इलाज के रूप में कोई एंटी-वायरल थेरेपी मौजूद नहीं हैं। हालांकि, डॉक्टर मरीज की जीवनशैली में कुछ महत्वपूर्ण बदलाव करने की सलाह देते हैं।

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हेपेटाइटिस ए के लक्षण

हेपेटाइटिस ए का इनक्यूबेशन पीरियड आमतौर पर 28 दिन का होता है। सरल शब्दों में कहें तो जब कोई व्यक्ति हेपेटाइटिस ए वायरस के संपर्क में आता है, तो उसको लक्षण महसूस होने में 28 दिन तक का समय लगता है। हालांकि, कुछ लोगों को लक्षण जल्दी ही महसूस होने लगते हैं, तो वहीं कुछ लोगों को लक्षण महसूस होने में 50 दिन तक का सम भी लग सकता है। हालांकि, आपको लक्षण महसूस होने से लगभग दो हफ्ते पहले ही आप संक्रामक हो जाते हैं, जिसका मतलब है कि आप यह बीमारी अन्य लोगों में भी फैला सकते हैं। हेपेटाइटिस ए वायरस से संक्रमित व्यक्ति में आमतौर पर निम्न लक्षण देखे जा सकते हैं -


  • थकान महसूस होना

  • जी मिचलाना या उल्टी आना

  • भूख न लगना या कम भूख लगना

  • दस्त लगना

  • पेट में दर्द

  • त्वचा में खुजली होना

  • स्लेटी रंग का मल आना

  • पेशाब का रंग गहरा होना

  • पीलिया


एक अनुमान के अनुसार लगभग हेपेटाइटिस ए से ग्रसित लगभग 70 फीसदी वयस्कों व बच्चों में पीलिया केलक्षण देखे जाते हैं। हेपेटाइटिस ए के लक्षण शरीर में आमतौर पर दो हफ्तों से कम समय तक ही रहते हैं, हालांकि कुछ गंभीर मामलों में ये लक्षण मरीज को छह महीनों तक भी रह सकते हैं।

डॉक्टर को कब दिखाएं?


हेपेटाइटिस ए से होने वाली गंभीर जटिलताओं से बचने के लिए जल्द से जल्द इसका इलाज शुरू करना जरूरी होता है। इसलिए अगर आपको उपरोक्त में से कोई भी लक्षण महसूस होता है, तो आपको जल्द से जल्द डॉक्टर से संपर्क कर लेना चाहिए। वहीं अगर आपको लग रहा है कि हाल ही में आप किसी हेपेटाइटिस के रोगी के संपर्क में आए हैं, तो ऐसे में आपको जल्द से जल्द डॉक्टर से संपर्क कर लेना चाहिए।

हेपेटाइटिस ए के कारण

हेपेटाइटिस ए के प्रमुख कारणों में आमतौर पर निम्न शामिल हो सकते हैं -


  • हेपेटाइटिस ए के रोगी के मल से दूषित हुए भोजन का सेवन करना

  • दूषित या अस्वच्छ पानी या अन्य किसी तरल पेय पदार्थ का सेवन करना

  • हेपेटाइटिस ए के रोगी या उनकी देखभाल करने वाले लोगों के करीबी संपर्क में रहना

  • रोगी या उनके आसपास रहने वाले व्यक्ति के साथ यौन संबंध बनाना

  • हेपेटाइटिस ए के रोगी की इंजेक्शन सुई का इस्तेमाल करना


ध्यान देने योग्य बात यह है कि अगर आप हेपेटाइटिस ए से ग्रसित व्यक्ति के आसपास हैं और वह खांस या छींक रहा है, तो ऐसे में यह बीमारी अप तक नहीं फैलती है। साथ ही हेपेटाइटिस ए के रोगी से गले मिलना या उसके पास बैठने से भी आपको हेपेटाइटिस ए नहीं हो सकता है। यहां तक कि हेपेटाइटिस ए से ग्रसित महिला के स्तन का दूध पीने वाला बच्चा भी इस रोग से संक्रमित नहीं होता है।

हेपेटाइटिस ए के जोखिम कारक


कुछ ऐसे कारक भी हैं, जो हेपेटाइटिस ए होने के खतरे को बढ़ा देते हैं -

  • ऐसी जगहों पर यात्रा करना जहां हेपेटाइटिस ए के ज्यादा मामले पाए जाते हैं जैसे विकासशील देश

  • दो पुरुषों के बीच यौन संपर्क होना

  • हेपेटाइटिस ए के रोगी के साथ यौन संबंध बनाना

  • लंबे समय से लिवर संबंधी रोग होना

हेपेटाइटिस ए का निदान

हेपेटाइटिस ए का निदान करने के लिए सबसे पहले मरीज के लक्षणों की जांच की जाती है और उसका शारीरिक परीक्षण भी किया जाता है। इसके साथ-साथ कुछ टेस्ट किए जाते हैं, जिनसे मिले परिणाम हेपेटाइटिस ए की पुष्टि करते हैं। हालांकि, बिलीरुबिन का स्तर बढ़ा हुआ होना, प्रोथ्रोम्बिन का समय बढ़ना और लिवर बढ़ना आदि विशेष रूप से हेपेटाइटिस ए के निदान की पुष्टि नहीं करते हैं। इसलिए कुछ सेरोलॉजिकल टेस्ट भी किए जाते हैं, जो हेपेटाइटिस ए वायरस की पुष्टि करते हैं। इसमें सीरम की जांच की जाती है और उसमें हेपेटाइटिस ए वायरस के विरुद्ध बनी एंटीबॉडी की जांच की जाती है। यह टेस्ट कई बार किया जा सकता है, क्योंकि कई बार इससे गलत परिणाम भी मिल जाते हैं। उदाहरण के लिए जिन लोगों को हाल ही में हेपेटाइटिस ए वायरस की वैक्सीन लगी है, उनके हेपेटाइटिस ए से ग्रसित न होने पर भी परिणाम पॉजिटिव दिख सकता है।

हेपेटाइटिस ए का इलाज

वायरस के कारण होने वाले हेपेटाइटिस ए का इलाज करने के लिए कोई विशेष एंटीवायरल थेरेपी तैयार नहीं हो पाई है। हालांकि, अगर डॉक्टर हेपेटाइटिस ए के लक्षणों की पहचान कर लेते हैं, तो मरीज को कुछ खास दिशा निर्देश दिए जाते हैं और साथ ही सीरम में एंटीबॉडी का पता लगाने के लिए टेस्ट शुरू कर दिए जाते हैं। इन दिशा निर्देशों में आमतौर पर अच्छा आहार लेना, खूब तरल पेय पदार्थ पीना और शरीर को पर्याप्त आराम देने जैसी बातें सिखाई जाती हैं।

हेपेटाइटिस ए के इलाज में दवाएं

वैसे हेपेटाइटिस ए का इलाज करने के लिए कोई दवा अभी तक तैयार नहीं हो पाई है, हालांकि, लक्षणों को नियंत्रित करने कुछ दवाओं का इस्तेमाल किया जा सकता है जैसे -


  • उल्टी और मतली आदि को रोकने के लिए एंटीमेटिक्स

  • बुखार को कम करने के लिए एंटीपाइरेटिक्स

  • खुजली आदि को कम करने के लिए को कोलिस्टेरामिन और अर्सोडियोक्सिकोलिक


जिन मरीजों को बार-बार हेपेटाइटिस ए हो रहा है या फिर लगातार 6 महीने से ज्यादा जिनमें कोलिस्टेसिस के लक्षण देखने को मिल रहे हैं, ऐसे में कोर्टिकोस्टेरॉय दवाओं का कोर्स चलाया जाता है। हालांकि, कोर्टिकोस्टेरॉयड दवाओं से कुछ साइड इफेक्ट भी हो सकते हैं।

हेपेटाइटिस ए के लिए सर्जरी


हेपेटाइटिस ए के लक्षण कुछ लोगों में अचानक से शुरू होते है और गंभीर हो जाते हैं, जिस कारण से व्यक्ति का लिवर गंभीर रूप से प्रभावित हो जाता है। ऐसी स्थितियों में डॉक्टर लिवर ट्रांसप्लांट सर्जरी करने पर भी विचार कर सकते हैं।

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