हेपेटाइटिस ए क्या है? हेपेटाइटिस ए के कारण, लक्षण, इलाज
World Hepatitis Day 2021: हेपेटाइटिस ए कितना खतरनाक? क्या होते हैं इसके लक्षण, कारण, उपचार जानें यहां...
हेपेटाइटिस एक प्रकार का वायरल संक्रमण होता है, जिस से लिवर (यकृत) में सूजन होने लगती है। यह शराब का अधिक सेवन करने, किसी दवा से होने वाले विषाक्त दुष्प्रभाव या किसी ऑटोइम्यून रोग के कारण भी हो सकता है। हेपेटाइटिस कई अलग-अलग प्रकार के होते हैं जैसे हेपेटाइटिस ए, बी, सी, डी और ई। इसका हर प्रकार अलग-अलग कारणों से विकसित होता है। हेपेटाइटिस ए का कारण बनने वाले वायरस को हेपेटाइटिस ए वायरस (HAV) कहा जाता है, जिससे होने वाले लक्षण अचानक से विकसित होते हैं और थोड़े समय तक ही रह पाते हैं। हेपेटाइटिस ए संक्रमण अचानक से गंभीर रूप धारण कर लेता है और इस कारण से यह एक छोटी संख्या में लोगों के लिए जानलेवा भी हो सकता है। हेपेटाइटिस ए से होने वाली कुल मौतों में 0.5 फीसद मौत हेपेटाइटिस ए से ही होती है। यह आमतौर पर उचित स्वच्छता न बरत पाने के कारण होता है और भोजन से होने वाले संक्रमण (Foodborne infections) भी हेपेटाइटिस ए के प्रमुख कारणों में से एक है। ऐसा इसलिए है क्योंकि यह वायरस भोजन बनाने की कई प्रक्रियाओं के दौरान जिंदा रह सकता है, जिसमें अन्य रोगाणु मर जाते हैं। हेपेटाइटिस ए का निदान लक्षणों की जांच करके किया जाता है और कुछ टेस्टों की मदद से इसकी पुष्टि की जा सकती है। हेपेटाइटिस ए के इलाज के रूप में कोई एंटी-वायरल थेरेपी मौजूद नहीं हैं। हालांकि, डॉक्टर मरीज की जीवनशैली में कुछ महत्वपूर्ण बदलाव करने की सलाह देते हैं।
हेपेटाइटिस ए का इनक्यूबेशन पीरियड आमतौर पर 28 दिन का होता है। सरल शब्दों में कहें तो जब कोई व्यक्ति हेपेटाइटिस ए वायरस के संपर्क में आता है, तो उसको लक्षण महसूस होने में 28 दिन तक का समय लगता है। हालांकि, कुछ लोगों को लक्षण जल्दी ही महसूस होने लगते हैं, तो वहीं कुछ लोगों को लक्षण महसूस होने में 50 दिन तक का सम भी लग सकता है। हालांकि, आपको लक्षण महसूस होने से लगभग दो हफ्ते पहले ही आप संक्रामक हो जाते हैं, जिसका मतलब है कि आप यह बीमारी अन्य लोगों में भी फैला सकते हैं। हेपेटाइटिस ए वायरस से संक्रमित व्यक्ति में आमतौर पर निम्न लक्षण देखे जा सकते हैं -
हेपेटाइटिस ए के प्रमुख कारणों में आमतौर पर निम्न शामिल हो सकते हैं -
हेपेटाइटिस ए का निदान करने के लिए सबसे पहले मरीज के लक्षणों की जांच की जाती है और उसका शारीरिक परीक्षण भी किया जाता है। इसके साथ-साथ कुछ टेस्ट किए जाते हैं, जिनसे मिले परिणाम हेपेटाइटिस ए की पुष्टि करते हैं। हालांकि, बिलीरुबिन का स्तर बढ़ा हुआ होना, प्रोथ्रोम्बिन का समय बढ़ना और लिवर बढ़ना आदि विशेष रूप से हेपेटाइटिस ए के निदान की पुष्टि नहीं करते हैं। इसलिए कुछ सेरोलॉजिकल टेस्ट भी किए जाते हैं, जो हेपेटाइटिस ए वायरस की पुष्टि करते हैं। इसमें सीरम की जांच की जाती है और उसमें हेपेटाइटिस ए वायरस के विरुद्ध बनी एंटीबॉडी की जांच की जाती है। यह टेस्ट कई बार किया जा सकता है, क्योंकि कई बार इससे गलत परिणाम भी मिल जाते हैं। उदाहरण के लिए जिन लोगों को हाल ही में हेपेटाइटिस ए वायरस की वैक्सीन लगी है, उनके हेपेटाइटिस ए से ग्रसित न होने पर भी परिणाम पॉजिटिव दिख सकता है।
वायरस के कारण होने वाले हेपेटाइटिस ए का इलाज करने के लिए कोई विशेष एंटीवायरल थेरेपी तैयार नहीं हो पाई है। हालांकि, अगर डॉक्टर हेपेटाइटिस ए के लक्षणों की पहचान कर लेते हैं, तो मरीज को कुछ खास दिशा निर्देश दिए जाते हैं और साथ ही सीरम में एंटीबॉडी का पता लगाने के लिए टेस्ट शुरू कर दिए जाते हैं। इन दिशा निर्देशों में आमतौर पर अच्छा आहार लेना, खूब तरल पेय पदार्थ पीना और शरीर को पर्याप्त आराम देने जैसी बातें सिखाई जाती हैं।
वैसे हेपेटाइटिस ए का इलाज करने के लिए कोई दवा अभी तक तैयार नहीं हो पाई है, हालांकि, लक्षणों को नियंत्रित करने कुछ दवाओं का इस्तेमाल किया जा सकता है जैसे -
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हेपेटाइटिस की बीमारी खतरनाक बीमारी है। कई बार Viral Hepatitis की वजह से लिवर का कैंसर भी हो जाता है। इस बीमारी से बचाव ही इसका इलाज है। आज ‘वर्ल्ड हेपेटाइटिस डे 2021’ के मौके पर सर गंगा राम हॉस्पिटल (नई दिल्ली) के गैस्ट्रोएन्टरोलॉजिस्ट डॉ. पीयूष रंजन हमें लिवर से जुड़ी इस गंभीर बीमारी के बारे में कई महत्वपूर्ण जानकारी दे रहे हैं।
हर साल वायरल हेपेटाइटिस के कारण लगभग 2,50,000 लोगों की मृत्यु हो जाती है। वायरल हेपेटाइटिस अब तीन घातक संक्रामक बीमारियों- एचआईवी/एड्स, मलेरिया और टीबी के समकक्ष है।
हेपेटाइटिस मुख्य रूप से पांच प्रकार का होता है- ए, बी, सी, डी और ई। यह जानलेवा भी हो सकता है। लाखों लोग हेपेटाइटिस बी और सी के कारण गंभीर बीमारी का शिकार हैं, जो लिवर सिरोसिस और लिवर कैंसर का रूप ले सकता है। हालांकि, समय पर निदान के द्वारा 80 फीसदी मामलों में इसका इलाज संभव है।
Hepatitis Symptoms : हेपेटाइटिस के लक्षण की जानकारी ही बचा सकती है जान
मानसून में इम्यून सिस्टम धीमी गति में काम करता है, इसलिए इस मौसम में लोगों को बुखार सबसे ज्यादा होता है। कुछ बुखार तो आसानी से ठीक हो जाते हैं, लेकिन कुछ को ठीक करने के लिए उचित मेडिकल टेस्ट करना पड़ता है। यहां हम कुछ ऐसी बीमारियों के बारे में बता रहे हैं जो मॉनसून (Monsoon Diseases) में सबसे ज्यादा होती हैं और उनसे संबंधित जरूरी (Test of monsoon diseases) टेस्ट क्या हैं, उसे भी जानें।
पीलिया की बीमारी अगर आपको एक बार हो गयी है तो वह दोबारा भी हो सकती है। कुछ लोगों में बार-बार पीलिया की बीमारी होती है जो जानलेवा साबित होती है। अगर आपको भी बार-बार पीलिया की बीमारी हो रही है तो आपको कुछ खास बातों पर ध्यान देने की जरूरत है।
हेपेटाइटिस के मरीज़ों को बिना डॉक्टर से पूछे कोई पेनकिलर या अन्य प्रकार की दवा नहीं खानी चाहिए।
हेपेटाइटिस के संक्रमण से तुरंत राहत के लिए पर्याप्त पोषण और संतुलित आहार आवश्यक है।
बाथरूम से आने के बाद हाथ न साफ करनेवाले व्यक्ति से हेपेटाइटिस ए फैलता है।
पीलिया या जॉन्डिस दूषित पानी और भोजन से फैलता है।
दुनिया भर में लगभग 36 करोड़ लोग हेपेटाइटिस बी या सी से पीड़ित हैं।
क्या हेपेटाइटिस का उपचार केवल आयुर्वेदिक और हर्बल दवाओं से संभव है।
दुनिया भर में चालीस करोड़ लोग हैं इस बीमारी से पीडि़त।
भारत की आबादी में 2 से 8 प्रतिशत लोगों में हेपेटाइटिस बी है।
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