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Written By: Atul Modi | Updated : May 28, 2024 12:19 PM IST
UTI in Summer: इस प्रचंड गर्मी में पसीने के साथ ही कई बैक्टीरिया, फंगस और वायरस शरीर पर अटैक करने लगते हैं। यही कारण है कि गर्मी के मौसम में इंफेक्शन होने की आशंका काफी बढ़ जाती है। इन्हीं इंफेक्शन में से एक बहुत ही कॉमन परेशानी है यूटीआई यानी यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन की, जिसे आम बोलचाल की भाषा में यूरिन इंफेक्शन कहा जाता है। एक सर्वे के अनुसार देश में प्रति वर्ष अप्रैल से जुलाई माह के दौरान यूटीआई के सबसे ज्यादा मामले सामने आते हैं। जाहिर है इसका कारण है गर्मी और उमस। यूटीआई का मुख्य कारण ई-कोलाई बैक्टीरिया होता है।
पुरुषों के मुकाबले महिलाओं को यूरिन इंफेक्शन की परेशानी ज्यादा होती है। शोध बताते हैं कि 25 में से करीब 10 महिलाओं और 3 पुरुषों को अपने जीवन काल में यूटीआई जरूर होता है। समय पर इसपर ध्यान नहीं देने के कारण यह किडनी इंफेक्शन का कारण भी बन सकता है। यूटीआई के 75 से 90 प्रतिशत मामले 40 से कम उम्र की महिलाओं में सामने आते हैं। न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. प्रियंका शेरावत ने हाल ही में यूटीआई को लेकर अपने इंस्टाग्राम हैंडल पर विस्तार से जानकारी शेयर की। आइए जानते हैं यूटीआई के बारे में सभी जानकारी।
यूरिन इंफेक्शन होने पर शरीर में कई लक्षण नजर आते हैं, जिनमें से सबसे कॉमन है यूरिन पास करने के दौरान तेज जलन और दर्द होना। अगर आपको ऐसी समस्या हो रही है तो आपको डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। इसी के साथ कुछ अन्य लक्षण भी इस दौरान नजर आते हैं। जैसे बार-बार यूरिन आना, यूरिन में खून आना, यूरिन में तेज गंध आना, कई बार इस इंफेक्शन के कारण पेल्विक एरिया में दर्द भी महसूस होता है। इंफेक्शन बढ़ने पर आपको हल्का बुखार भी हो सकता है।
यूटीआई की समस्या किसी भी मौसम में हो सकती है, लेकिन गर्मियों में यह समस्या ज्यादा बढ़ जाती है। इसके कई कारण हैं। एक तो इस मौसम में पसीना ज्यादा आने के कारण बैक्टीरिया पनपने की आशंका ज्यादा होती है। इसी के साथ पसीना ज्यादा आने के कारण डिहाइड्रेशन होने लगता है, जिसके कारण यूरिन कम पास होता है। इस वजह से भी संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ जाता है। आमतौर पर यूटीआई यूरिनरी ट्रैक्ट के निचले भाग यानी ब्लैडर और यूरेथ्रा में ज्यादा होता है।
(डिस्क्लेमर: हमारे लेखों में साझा की गई जानकारी केवल इंफॉर्मेशनल उद्देश्यों से शेयर की जा रही है इन्हें डॉक्टर की सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए। किसी भी बीमारी या विशिष्ट हेल्थ कंडीशन के लिए स्पेशलिस्ट से परामर्श लेना अनिवार्य होना चाहिए। डॉक्टर/एक्सपर्ट की सलाह के आधार पर ही इलाज की प्रक्रिया शुरु की जानी चाहिए।)
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