
विद्या शर्मा
विद्या शर्मा को डिजिटल मीडिया में लगभग 3 साल का अनुभव है। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता ... Read More
stone (Image CreditGPT)
कई बार ऐसा होता है कि हम पेट में होने वाले दर्द को या तो आम समझ लेते हैं या फिर गैस और अपच से होने वाली परेशानी। इस तरह के लंबे समय से हो रहे दर्द को अनदेखा करना भारी पड़ सकता है। ऐसा ही बुलंदशहर के 83 साल के एक बुजुर्ग के साथ हुआ। दरअसल बुलंदशहर के रहने वाले 83 साल के वकील मरीज को लगभग छह साल से पेट के ऊपरी हिस्से में दर्द हो रहा था जो पीठ तक फैल रहा था, साथ ही उन्हें छाती के पीछे भी बेचैनी महसूस हो रही थी।
शुरू में उन्होंने लक्षणों को नजरअंदाज किया और डॉक्टर से सलाह लेने में देरी की। समय के साथ, दर्द ज्यादा बार और गंभीर होने लगा, जिसके बाद उन्होंने यशोदा मेडिसिटी में एक्सपर्ट से जांच कराने का फैसला किया।
हॉस्पिटल ने 83 साल के एक मरीज की एक दुर्लभ लैप्रोस्कोपिक सर्जरी सफलतापूर्वक की और उनके पित्ताशय से लगभग 2,000 छोटी-छोटी पथरी निकालीं। इस सर्जरी में 90 मिनट का समय लगा। पित्त की थैली में पथरी की समस्या ठीक करने के लिए की गई इस तकनीकी सर्जरी की लीडरशिप यशोदा मेडिसिटी के 'इंस्टीट्यूट ऑफ मिनिमल एक्सेस, रोबोटिक एंड बैरिएट्रिक सर्जरी' के वाइस चेयरमैन और हेड, डॉक्टर प्रदीप के. दीवान ने की।
बुलंदशहर के रहने वाले 83 साल के वकील मरीज को लगभग छह साल से पेट के ऊपरी हिस्से में दर्द हो रहा था जो पीठ तक फैल रहा था, साथ ही उन्हें छाती के पीछे भी बेचैनी महसूस हो रही थी। जांच से पता चला कि उनका पित्ताशय पूरी तरह से पित्त की पथरी से भरा हुआ था और लंबे समय से चली आ रही बीमारी के कारण उसकी दीवार मोटी हो गई थी।
इन पथरियों का आकार सरसों के छोटे दानों से लेकर चने के दाने जितना था और इनका कुल वजन लगभग 150-200 ग्राम था। लगभग 2,000 छोटी पथरी का होना- जो क्लिनिकल प्रैक्टिस में बहुत ही दुर्लभ बात है- इस सर्जरी को बहुत चुनौतीपूर्ण बना रहा था।
मामले की तकनीकी जटिलता के बावजूद, सर्जिकल टीम ने 90 मिनट की इस मुश्किल मिनिमली इनवेसिव सर्जरी को पूरा किया, जिससे मरीज तेजी से ठीक हो सका और सर्जरी के बाद उसे बहुत कम तकलीफ हुई।
डॉ. प्रदीप के. देवान ने कहा, "इतनी बड़ी संख्या में पित्त की पथरी के मामले बहुत कम देखने को मिलते हैं। हमें सबसे ज्यादा चिंता इस बात की थी कि मरीज इलाज कराने से पहले कई सालों से चुपचाप तेज दर्द सह रहा था। हमें राहत है कि उसने सही समय पर इलाज कराया, क्योंकि और देरी होने पर पीलिया, पैंक्रियाटाइटिस या दुर्लभ मामलों में गॉल ब्लैडर कैंसर जैसी गंभीर जटिलताएं हो सकती थीं।”
डॉक्टर बताते हैं “पित्त की पथरी की इतनी बड़ी संख्या और मरीज की ज्यादा उम्र को देखते हुए सर्जरी अपने आप में बहुत चुनौतीपूर्ण थी। ऐसी जटिल प्रक्रियाओं के लिए बहुत ज्यादा सर्जिकल एक्सपर्टीज और सटीकता की जरूरत होती है ताकि आस-पास के ऊतकों और जरूरी अंगों को नुकसान पहुंचाए बिना बीमार गॉल ब्लैडर को सुरक्षित रूप से निकाला जा सके।”
“इन कठिनाइयों के बावजूद, हमने लैप्रोस्कोपिक तरीके से सर्जरी पूरी की, जिससे मरीज बहुत अच्छी तरह से ठीक हो पाया और अगले ही दिन घर लौट सका। उसे इतनी तेजी से ठीक होते देखना हमारी पूरी टीम के लिए बहुत संतोषजनक था।"
83 साल की उम्र और हाइपरटेंशन व सीरम इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन जैसी अन्य मेडिकल समस्याओं के बावजूद, डॉक्टरों की टीम ने सावधानी से प्री-ऑपरेटिव तैयारी, एडवांस्ड लैप्रोस्कोपिक सर्जरी और व्यापक पेरी-ऑपरेटिव देखभाल के जरिए मरीज का सफलतापूर्वक इलाज किया। उन्हें 15 जून 2026 को भर्ती किया गया, 16 जून 2026 को सर्जरी हुई और प्रक्रिया के चार घंटे के भीतर ही उन्हें चलने-फिरने लायक बना दिया गया। मिनिमली इनवेसिव अप्रोच और बेहतर पोस्ट-ऑपरेटिव देखभाल की वजह से वे आसानी से ठीक हो गए और अगले ही दिन, 17 जून 2026 को उन्हें छुट्टी दे दी गई।
यह मामला पेट में लगातार दर्द और बार-बार होने वाली पाचन संबंधी समस्याओं के लिए समय पर मेडिकल जांच कराने के महत्व को भी रेखांकित करता है, क्योंकि पित्त की पथरी की बीमारी का शुरुआती दौर में पता चलने और इलाज होने से पीलिया, पैंक्रियाटाइटिस और दुर्लभ मामलों में गॉल ब्लैडर कैंसर जैसी गंभीर जटिलताओं को रोकने में मदद मिल सकती है, साथ ही मिनिमली इनवेसिव सर्जरी से तेजी से ठीक होने में भी मदद मिलती है।
डिस्क्लेमर: अगर आपको लंबे समय तक पेट दर्द रहता है या कोई अन्य परेशानी लंबे समय से बनी हुई है, तो तुरंत डॉक्टर के पास जाएं और सलाह अनुसार बताए गए टेस्ट या अन्य चेकअप करवाएं। या कोई अन्य परेशानी लंबे समय से बनी हुई है।