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टाइट कैरोटिड आर्टरी स्टेनोसिस में दिमाग की धमनी प्लाक जमने के कारण बहुत संकरी हो जाती है। © Shutterstock
दिमाग की जानलेवा बीमारी से पीड़ित 71 वर्षीय इंदिरा शर्मा को इन्द्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल में नया जीवन मिला है। वह दिमाग की एक बीमारी 'कैरोटिड स्टेनोसिस'' से पीड़ित थीं जिसमें ब्रेन आर्टरी (दिमाग को खून ले जाने वाली धमनी) में प्लाक जमने के कारण धमनी संकरी हो जाती है। एक आधुनिक तकनीक के जरिए बिना ओपन सर्जरी के उनका सफल इलाज किया गया, ताकि दिमाग को फिर से खून की सही आपूर्ति हो सके। धमनी में मेश कवर्ड स्टेंट डालकर उन्हें जानलेवा स्ट्रोक से बचा लिया गया। इस मुश्किल प्रक्रिया को इन्द्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल (दिल्ली) के सीनियर कंसलटेंट, इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. प्रोफेसर एन. एन. खन्ना ने सफलतापूर्वक पूरा किया।
मरीज की स्थिति के बारे में बात करते हुए डॉ. एन.एन. खन्ना ने कहा, ‘‘जब वे हमारे पास आईं, तब वह अपने शरीर के दाएं हिस्से में बहुत ज्यादा कमजोरी महसूस कर रही थीं। पिछले दस दिनों से उन्हें चक्कर आ रहे थे। मरीज में पहले से हाइपरटेंशन, टाईप 2 डायबिटीज की समस्या थी और उनमें कोरोनरी आर्टरी बायपास सर्जरी, इलियक स्टेंटिंग (टांग की धमनी से एंजियोप्लास्टी), पर्मानेंट पेसमेकर इन्सटॉलेशन किया जा चुका था। ऐसे में कैरोटिड आर्टरी में स्टेंट डालना बहुत मुश्किल था।’’
डॉ. खन्ना ने कहा, ‘‘उनके इलाज के लिए हमने सेलेब्रल प्रोटेक्शन के साथ कैरोटिड एंजियोप्लास्टी की। हमने फाइन मेश स्टेंट का इस्तेमाल किया, जो भारत में ब्रेन आर्टरी की एंजियोप्लास्टी के लिए आधुनिक तकनीक है। इस तकनीक का इस्तेमाल सबसे पहले यूरोप में किया गया था, हाल ही में भारत में इसकी शुरुआत हुई है। यह हमारे द्वारा किया गया पहला ऑपरेटिव केस है।’’
71 वर्षीय श्रीमती इंदिरा शर्मा।
इस आधुनिक तकनीक के बारे में बताते हुए डॉ. खन्ना ने कहा, ‘‘कवर्ड स्टेंट के विपरीत फाइन मेश स्टेंट अपने अंदर से खून तो बहने देता है लेकिन कोलेस्ट्रॉल नहीं इसलिए दिमाग में स्ट्रोक पैदा करने वाला क्लॉट दिमाग तक नहीं पहुंच पाता। स्टेंट इसे फिल्टर कर देता है। कैरोटिड एंजियोप्लास्टी की इस प्रक्रिया में तकरीबन 25 मिनट का समय लगता है।
सर्जरी के बाद पेशेंट इंदिरा शर्मा ने कहा, ‘‘जब मैं इलाज के लिए डॉ. खन्ना के पास आई तो मुझे चक्कर आ रहे थे। मेरी जांच करने के बाद उन्होंने बताया कि मेरी दाईं कैरोटिड आर्टरी 99 फीसदी ब्लॉक हो चुकी है। मुझे पहले से हाइपरटेंशन और डायबिटीज है। ऐसे में ब्लॉक के बारे में सुनकर मैं डर गई लेकिन मुझे इस नई तकनीक के बारे में बताया गया। डॉ. खन्ना जैसे अनुभवी डॉक्टर की वजह से मुझे नया जीवन मिला है।’’
क्या है कैरोटिड स्टेनोसिस
कैरोटिड स्टेनोसिस की प्रक्रिया ठीक वैसी ही होती है जैसे दिल की धमनी में ब्लॉक हो जाता है। इसमें दिमाग की धमनी में कोलेस्ट्रॉल जमने लगता है। यह कोलेस्ट्रॉल दिमाग में जाकर स्ट्रोक का कारण बन सकता है। स्ट्रोक के 50 फीसदी मामले सफल कैरोटिड स्टेंटिंग के बाद होते हैं, क्येांकि पारम्परिक स्टेंट कोलेस्ट्रॉल और प्लाक को फिल्टर नहीं कर पाता। इस आधुनिक तकनीक में इस्तेमाल किया जाने वाला फाइन मेश स्टेंट प्लाक को दिमाग के अंदर नहीं जाने देता और भविष्य के लिए दिमाग को स्ट्रोक से सुरक्षित रखता है।