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तम्बाकू का धुंआ न सिर्फ सिगरेट पीने वाले व्यक्ति के लिए हानिकर है, बल्कि यह आस-पास मौजूद अन्य व्यक्तियों को भी उतना ही नुकसान पहुंचाता है, जो सैकण्ड हैण्ड स्मोक को अपनी सांसों के साथ भीतर ले लेते हैं। नोएडा के जेपी हॉस्पिटल में रेडिएशन ऑन्कोलॉजी विभाग के एसोसिएट डायरेक्टर डॉ. अभिषेक गुलिया का कहना है कि यह समझना महत्वपूर्ण है कि सैकण्ड हैण्ड स्मोक कैंसर का जोखिम पैदा करता है। हम सभी के लिए धुएं-रहित वातावरण के महत्व पर जागरूकता बढ़ाना जरूरी है ताकि आने वाली पीढ़ी को इससे सबक मिले और कैंसर के मामलों को कम किया जा सके।
सैकण्ड हैण्ड स्मोक जलती सिगरेट के कारण उत्पन्न होने वाला धुंआ है, जो सिगरेट पीने वाले व्यक्ति के आस-पास मौजूद लोगों की सांसों के साथ उनके भीतर चला जाता है। इसमें 7000 कैमिकल्स होते हैं, जिसमें से 70 कार्सिनोजन्स (कैंसर पैदा करने वाले) होते हैं। जब धूम्रपान नहीं करने वाले लोग अपनी सांसों के साथ इस जहरीले धुंए को भीतर लेते हैं, तो उनके स्वास्थ्य पर भी उतना ही बुरा असर पड़ता है, जितना की धूम्रपान करने वाले स्वास्थ्य पर।
सैकण्ड हैण्ड स्मोक फेफड़ों के कैंसर के मुख्य कारणों में से एक है। सैकण्ड हैण्ड स्मोक में सांस लेने से फेफ़डों के कैंसर की संभावना 20-30 फीसदी बढ़ जाती है। अगर कोई व्यक्ति धूम्रपान करने वाले व्यक्ति के साथ रहता है तो फेफड़ों के कैंसर की संभावना 30-40 फीसदी तक बढ़ जाती है।
हाल ही में हुए अध्ययन से पता चला है कि सैकण्ड हैण्ड स्मोक के कारण खासतौर पर उन महिलाओं में स्तन कैंसर का खतरा बढ़ जाता है, जो प्रीमेनोपॉज़ की स्थिति में हैं। बचपन या किशोरावस्था में सैकण्ड हैण्ड स्मोक के संपर्क में रहने से बाद के जीवन में स्तन कैंसर की संभावना अधिक होती है।
सैकण्ड हैण्ड स्मोक के प्रभाव सिर्फ फेफड़ों के कैंसर या स्तन कैंसर तक ही सीमित नहीं हैं। इसकी वजह से गले के कैंसर, नासल साइनस, सरवाइकल और ब्लैडर कैंसर की संभावना भी बढ़ती है। सैकण्ड हैण्ड स्मोक में मौजूद रसायनों से जेनेटिक म्यूटेशन हो जाते हैं और शरीर के विभिन्न हिस्सों में कैंसर की कोशिकाएं बढ़ सकती हैं।
बच्चों पर सैकण्ड हैण्ड स्मोक का हानिकारक प्रभाव पड़ता है। सैकण्ड हैण्ड स्मोक के संपर्क में रहने से बचपन में होने वाले कैंसर जैसे ल्युकेमिया और ब्रेन ट्यूमर की संभावना बढ़ जाती है। इसके अलावा सैकण्ड हैण्ड स्मोक बच्चों में अस्थमा, रेस्पीरेटरी इन्फेक्शन और फेफड़ों के फंक्शन्स में गड़बड़ी का कारण भी बन सकता है।
आम लोगों को सैकण्ड हैण्ड स्मोक के खतरे से सुरक्षित रखने के लिए कार्यस्थलों एवं सार्वजनिक स्थानों पर धुएं-रहित वातावरण बनाना ज़रूरी है। व्यापक धुएं-रहित नीतियां बनाने से न सिर्फ सैकण्ड हैण्ड स्मोक के कारण होने वाले स्वास्थ्य जोखिम की संभावना को कम किया जा सकता है बल्कि हर किसी के लिए सुरक्षित एवं स्वस्थ वातावरण को भी सुनिश्चित किया जा सकता है।
सैकण्ड हैण्ड स्मोक के संपर्क में आने की संभावना को कम करने के लिए ज़रूरी है कि घरों और वाहनों को धुएं-रहित बनाया जाए। धूम्रपान करने वालों को प्रेरित किया जाए कि वे इस बुरी आदत को छोड़ दें और अगर उन्हें धूम्रपान करना ही है तो घर के भीतर न करें। जागरुकता अभियानों के द्वारा धुएं रहित जीवनशैली तथा स्वास्थ्य के लिए इसके फायदों के बारे में लोगों को शिक्षित किया जा सकता है।
तम्बाकू नियन्त्रण के उपाय सैकण्ड हैण्ड स्मोक और इसके कारण होने वाले स्वास्थ्य जोखिमों की संभावना को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान पर प्रतिबंध लगाकर, तम्बाकू उत्पादों पर टैक्स बढ़ाकर, उत्पादों पर ग्राफिक वार्निंग लेबल देकर और सार्वजनिक जागरुकता अभियानों के द्वारा ऐसा संभव है। सामाजिक स्तर पर तम्बाकू के उपयोग को नियन्त्रित कर हम लोगों को सैकण्ड हैण्ड स्मोक के नुकसान से सुरक्षित रख सकते हैं।
सैकण्ड हैण्ड स्मोक स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा है, जो यहां तक धूम्रपान नहीं करने वालों में भी कैंसर के साथ-साथ अन्य बीमारियों का कारण भी बन सकता है। जरूरी है कि हम सैकण्ड हैण्ड स्मोक के कारण कैंसर की संभावना को समझें और धुएं रहित वातावरण के निर्माण की दिशा में प्रयास करें। तम्बाकू नियन्त्रण के उपायों, धुएं रहित नीतियों एवं जागरुकता अभियानों के माध्यम से हम सैकण्ड हैण्ड स्मोक के कारण कैंसर के जोखिम को कम कर स्वस्थ भविष्य के निर्माण में योगदान दे सकते हैं।