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अर्थराइटिस और घुटनों के दर्द से तुरंत राहत देते हैं ये 7 प्राकृतिक उपचार, जानिए सर्दियों में क्यों होता है जोड़ों में दर्द

ठंड के मौसम में नियमित शारीरिक गतिविधियों के साथ संतुलित आहार लेने से मांसपेशियाँ दुरुस्त रहती हैं और जोड़ (ज्‍वाइंट्स) स्वस्थ रहते हैं। इन बुनियादी तरकीबों से जोड़ों के कष्ट दूर करने, लचीलापन बढ़ाने और मासपेशियों की शक्ति बढ़ाने में मदद मिलेगी।

Written By Atul Modi
Published : December 17, 2021 11:41 PM IST

सर्दी का मौसम आने के साथ ही जोड़ों (ज्‍वाइंट्स) का कड़ापन अनेक लोगों और विशेषकर बुजुर्गों के लिए बड़ी समस्या बन जाता है। यह समस्‍या सामान्यतः गठिया (आर्थराइटिस) और जोड़ों तथा मांसपेशियों के दर्द के अन्य संभावित कारणों से जुड़ी होती है। ठंड का असर किसी भी आयु के व्यक्ति पर हो सकता है और उनके नियमित जीवन की क्षमता प्रभावित हो सकती है। तापमान में गिरावट के साथ लोगों के लिए जोड़ों का कष्ट बढ़ जाता है। कुछ लोग तापमान में बार-बार बदलावों के प्रति संवेदनशील होते हैं, जबकि कुछ लोगों पर केवल सर्दियों का विपरीत प्रभाव होता है।

सर्दियों के मौसम में हवा का दबाव प्रभावित करता है जोड़ों का दर्द (ज्‍वाइंट पेन)

सर्दियों में तापमान में गिरावट होने पर मांसपेशियों में ऐंठन हो सकती है और जोड़ो में खिंचाव और अकड़न का सामना करना पड़ता है। कम तापमान जोड़ों के भीतर के द्रव को भी गाढ़ा कर सकता है जिसके कारण ज्यादा अकड़न महसूस होती है। घुटने के अस्थिसंधिशोथ (ऑस्टियोआर्थराइटिस) वाले लोगों के लिए गठिया के कष्ट में वृद्धि के लिए तापमान में 10 डिग्री की कमी और वायु दाब की संयुक्त भूमिका होती है। वायु दाब में कमी के कारण टेंडन्स (नसों), मांसपेशियों और आस-पास के ऊतकों में फैलाव होता है और इसके कारण विशेषकर गठिया से प्रभावित जोड़ों में कष्ट होता है। नतीजतन, पहले से प्रभावित जोड़ों, भले थोड़ा ही सही, पीड़ा होने लगती है। कूल्हे के ऑस्टियोआर्थराइटिस के शिकार लोगों को वातावरण में औसत से अधिक वायु दाब और नमी होने पर दर्द और कड़ापन बढ़ जाता है। अत्यधिक तापमान के अचानक संपर्क में आने से जोड़ों पर प्रभाव पड़ता है और ऊतकों और जोड़ों के आसपास रक्त प्रवाह बाधित होता है।

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एक और जोखिम विटामिन डी की कमी है, क्योंकि अन्य महीनों के विपरीत सर्दियों के पूरे मौसम के दौरान शरीर को धूप कम मिल पाती है। इसके फलस्वरूप विटामिन डी उत्पन्न होने में बाधा आती है और पीड़ायुक्त मांसपेशियों तथा जोड़ों में अधिक दर्द होता है। जो लोग जोड़ों के दर्द, विशेषरूप से गठिया से पीड़ित हैं, वे वायु के दबाव में बदलाव के प्रति अधिक संवेदनशील हो सकते हैं। गठिया और गाउट (वात रोग) जैसे अन्तर्निहित संयुक्त विकारों वाले लोग अक्सर पूरी सर्दी के दौरान बेचैनी का अनुभव करते हैं।चूँकि जोड़ों के भीतर हड्डियों को ढँकने वाली उपास्थि (कार्टिलेज) क्षीण हो जाती है, इसलिए अनावृत जोड़ों में नसों को दबाव में गिरावट का अनुभव हो सकता है।

सर्दियों में जोड़ों के दर्द से आराम के लिए सक्रिय रहें

डॉ. जयेश पाटिल, (सीनियर जॉइंट रिप्लेसमेंट सर्जन, शैल्बी मल्टीस्पेशिलिटी हॉस्पिटल्स) के अनुसार, सर्दियों में जोड़ों के दर्द बेचैनी पैदा कर सकते हैं, लेकिन इस मौसम में जोड़ों के दर्द के जोखिम कम करने के कुछ तरीके नीचे दिए गए हैं:

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1. ठंडे मौसम में खुद को गर्म रखें

ठंडा मौसम न केवल जोड़ों के दर्द को बढ़ाता है बल्कि सर्दी से सम्बंधित अनेक प्रकार की गड़बड़ियों का ख़तरा भी बढ़ाता है। बाहर निकलते समय शरीर को गर्म रखने और सर्द मौसम का असर कम करने के लिए कई परतों के कपड़े पहनना ज़रूरी है। जब वातावरण का तापमान गिरना शुरू होता है तब दिन के समय गर्म पानी से नहाने और एक से अधिक वस्त्र पहनने (दस्ताने और गर्म मोज़े सहित) से आप खुद को गर्म रख सकते हैं। जोड़ों पर कसे वस्त्र पहनने या जोड़ों, जैसे कि घुटनों पर सपोर्ट बैंड के साथ लपेटने से जोड़ों की स्थिरता बढ़ सकती है।

2. पैराफिन स्नान या हीटिंग पैड लगायें

जोड़ों पर हीटिंग पैड और पैराफिन मोम लगाने से पीड़ादायक मांसपेशियों में आराम मिल सकता है। पैराफिन स्नान में एक छोटी मशीन का प्रयोग होता है जो पैराफिन मोम को पिघलाती है। यह स्नान हाथों और पैरों की त्वचा पर मोम को जमने देने के लिए लिया जाता है। गर्मी को शरीर सोख लेता है जिससे जोड़ पर कष्ट से आराम मिलता है। पैराफिन मोम के साथ गर्म पानी से भी जोड़ों के कष्ट से काफी आराम मिल सकता है। हीटिंग पैड्स भी मांसपेशियों को आराम पहुंचाते है और पीड़ादायक जगहों तथा कष्ट में मदद पहुंचा सकते हैं।

3. विटामिन डी युक्त खाद्य पदार्थ और सप्‍लीमेंट

शरीर में विटामिन डी का अपर्याप्त स्तर संवेदनशीलता को बढ़ा सकता है। सर्दियों के मौसम में धूप में समय बिताकर विटामिन डी के सेवन को बढ़ाना फायदेमंद साबित हो सकता है। अधिक विटामिन डी से युक्त खाद्य पदार्थ, जैसे कि भिन्डी, मशरूम और डेरी उत्पाद ठण्ड की संवेदनशीलता को कम करने में मदद कर सकते हैं। पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन, कैल्शियम और विटामिन डी एवं विटामिन सी के साथ जोड़ों और मांसपेशियों के लिए उचित पोषण भी आवश्यक है।

4. फिट और फुर्तीले बने रहने के लिए व्यायाम करें

व्यायाम के जरिए मांसपेशियों और हड्डियों की मजबूती को बढ़ाया जा सकता है। इससे जोड़ों पर दबाव कम हो जाता है जिससे उन्हें कष्ट होने की आशंका कम हो जाती है। आसान गतिविधियाँ, जैसे कि उठना, टहलना और घर के अन्दर और बाहर सक्रिय रहने से स्थायी लाभ मिल सकता है। बाहर निकलने से पहले अंगड़ाई लेने से सख्त जोड़ों को ढीला करने में मदद मिलती है।

5. वजन को संतुलित करें

जोड़ों, विशेषकर घुटनों पर तनाव को कम करने के लिए स्वस्थ वजन बनाए रखना आवश्यक है। यहाँ तक कि तैराकी और योग जैसे व्यायाम, जो जोड़ों के लिए आसान होते हैं, न केवल वजन नियंत्रित रखने में मदद करेंगे, बल्कि मांसपेशियों और हड्डियों की समग्र शक्ति में भी वृद्धि करेंगे।

6. बेहतर नींद की आदत

पौष्टिक भोजन के सेवन के साथ पर्याप्त नींद लेना तंदुरुस्त रहने की कुंजी है। पर्याप्त कपड़े पहनना, गर्म पानी से नहाना और रात में मोटे कम्बल के साथ सोना ठीक रहता है। रात के दौरान एक कम्बल या कमरे में गर्मी बढ़ाने वाले विद्युत उपकरणों के प्रयोग से आरामदायक वातावरण बनाने में मदद मिलेगी।

7. स्वास्थ्य विशेषज्ञ से परामर्श लें

जोड़ो में स्थायी रूप से दर्द और असमय सूजन होने पर चिकित्सक के पास अवश्य जाएँ। यदि लगातार बेचैनी और दर्द में वृद्धि हो रही है तो दर्दनिवारक उपाय को अपनाने की जगह विशेषज्ञों के पास जाएँ और उनसे परामर्श लें। यदि जोड़ों और अंगों को घुमाने में कष्ट हो रहा हो या इस क्षेत्र में लालिमा हो तो इसे नजरअंदाज नहीं करें और तुरंत चिकित्सीय परामर्श और देखभाल लें। इस कष्ट से जुड़े किसी भी बुखार का इलाज जल्द से जल्द किया जाना चाहिए ताकि और समस्याएँ न हों और आगे की जटिल समस्याओं से बचा जा सके।

संक्षेप में, दर्द और कष्ट का सम्बन्ध आमतौर पर मौसम में बदलावों के साथ, विशेषकर ठंड के मौसम में अधिक ठंडे तापमान के साथ होता है। गर्म सेंक या पैराफिन स्नान मांसपेशियों को आराम देने और हाथ-पैर को गर्म रखने में मददगार हो सकते हैं। हर किसी का शरीर हवा के दाब में अंतर पर प्रतिक्रिया करता है, लेकिन गठिया (आर्थराइटिस) और पुराने दर्द से पीड़ित लोगों को अधिक संवेदनशील कष्ट का अनुभव हो सकता है। पीड़ादायक स्थान पर हीटिंग पैड्स लगाने और पैरों को ऊंचा रखने से जोड़ों का कड़ापन कम करने में मदद मिलती है। मरहम और मालिश के तेल लगाने से भी जोड़ों के कष्ट से राहत मिल सकती है।

(इनपुट्स: डॉ. जयेश पाटिल, सीनियर जॉइंट रिप्लेसमेंट सर्जन, शैल्बी मल्टीस्पेशिलिटी हॉस्पिटल्स, अहमदाबाद)

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