7 दवाओं के बाद भी नहीं रुके मिर्गी के दौरे, 10 साल की बच्ची को ब्रेन सर्जरी से मिली राहत

क्रनिका मान को महज 10 महीने की उम्र से ही मिर्गी के दौरे पड़ रहे हैं। वह सालों तक रोजाना 7-7 दवा ले रही थी। लेकिन, इसके बावजूद भी उसके दौरे रुक नहीं रहे थे। ऐसे में उसकी ब्रेन सर्जरी की गई, तब से वह सीजर फ्री है।

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Written By: Anju Rawat | Updated : August 11, 2026 6:58 PM IST

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Medically Verified By: Dr. M V Padma Srivastava

10 वर्षीय कर्निका मान को 10 महीने की उम्र से मिर्गी के दौरे पड़ रहे थे। उसे बार-बार दौरे पड़ते रहते थे। कभी-कभार तो दिन में 2-3 दौरे भी पड़ जाते थे। सालों तक दवाइयां खाने के बाद कर्निका की ब्रेन सर्जरी की गई और अब वह सीजर फ्री है। सर्जरी के बाद से उसकी हालत में धीरे-धीरे सुधार हो रहा है। जब बच्ची की जांच की गई, तो उसमें ड्रग-रेजिस्टेंट एपिलेप्सी का निदान हुआ। दरअसल, जब सालों तक रोजाना 7-7 दवाइयां लेने की बाद भी उसके दौरे रुक नहीं रहे थे, तब उसकी ब्रेन सर्जरी की गई और सर्जरी के बाद से दौरे नहीं पड़े हैं।

10 महीने की उम्र से पड़ रहे थे दौरे

बच्ची की मां बताती हैं कि कर्निका को 10 महीने की उम्र से ही बार-बार मिर्गी के दौरे पड़ रहे हैं। जब वह 10 महीने की थी, तब उसे पहली बार दौरा पड़ा था। लगातार दौरे पड़ने की वजह से उसके विकास, पढ़ाई और सीखने की क्षमता पर भी काफी असर पड़ा है।

पायल की मम्मी बताती हैं कि परिवार में किसी को भी गंभीर न्यूरोलॉजिकल बीमारी की हिस्ट्री भी नहीं है, इसके बावजूद भी बच्ची को महज 10 महीने की उम्र से ही दौरे पड़ने शुरू हो गए।

जांच में सामने आई दिमाग की समस्या

इस साल जुलाई महीने में कर्निका को पारस हेल्थ लाया गया और उसे न्यूरोलॉजी विभाग में भर्ती किया गया। इस दौरान बच्ची कई जांचें हुईं, जिनमें पता चला कि उसे मल्टी-ड्रग रेजिस्टेंट या इन्ट्रैक्टेबल एपिलेप्सी है। इसके पीछे दिमाग के बाएं हिस्से में मौजूद लेफ्ट मेसियल टेम्पोरल स्क्लेरोसिस को कारण माना गया। दिमाग के एक अन्य हिस्से में भी दौरे पैदा करने वाली गतिविधि पाई गई।

डॉ. पद्मा बताती हैं कि कर्निका का मामला काफी जटिल था। इस दौरान सबसे ज्यादा चुनौती यह पता करने में आई कि दिमाग का कौन-सा हिस्सा असल में दौरे शुरू कर रहा है।

सर्जरी से पहले हुई ये खास जांच

  • डॉ. पद्मा बताती हैं कि सर्जरी से पहले डॉक्टरों ने कई एडवांस जांचों की मदद ली। इसमें एपिलेप्सी
  • प्रोटोकॉल MRI, न्यूरोनैविगेशन, Diffusion Tensor Imaging (DTI) और PET स्कैन शामिल थे।
  • इन जांचों की मदद से पता लगाया गया कि दौरे किस हिस्से से शुरू हो रहे हैं।
  • साथ ही, यह देखना भी जरूरी था कि सर्जरी के दौरान दिमाग के जरूरी हिस्सों को नुकसान न पहुंचे।

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करीब 4 घंटे चली ब्रेन सर्जरी

  • डॉ. पद्मा बताती हैं कि बच्ची की ब्रेन सर्जरी करीब 4 घंटे तक चली। इस सर्जरी को न्यूरोनैविगेशन की मदद से किया गया।
  • सर्जरी में करीब 1.5 सेंटीमीटर की मिनिमली इनवेसिव कॉर्टिकेक्टॉमी की गई। इसके बाद सिलेक्टिव एमिग्डाला हिप्पोकैम्पेक्टॉमी (Selective Amygdalohippocampectomy) की गई।
  • सर्जरी के दौरान डॉक्टरों ने लगातार इलेक्ट्रोकॉर्टिकोग्राफी (ECoG) की मदद से मस्तिष्क की गतिविधियों पर नजर रखी।

सर्जरी के बाद नहीं आया दौरा

  • सर्जरी के बाद बच्ची की रिकवरी अच्छी हो रही है। सर्जरी के बाद से उसे किसी तरह की न्यूरोलॉजिकल समस्या या दूसरी बड़ी जटिलता नहीं हुई है। सर्जरी के पांच दिन बाद उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
  • फॉलो-अप के दौरान भी बच्ची को कोई दौरा नहीं पड़ा है। डॉक्टरों के मुताबिक, बच्ची फिलहाल सीजर-फ्री है।
  • डॉ. पद्मा बताती हैं कि जैसे-जैसे बच्ची की स्थिति में सुधार होगा, एंटी-एपिलेप्टिक दवाइयों को धीरे-धीरे कम किया जा सकता है।

क्या हर मिर्गी मरीज की सर्जरी हो सकती है?

  • डॉ. पद्मा श्रीवास्तव बताती हैं कि हर एपिलेप्सी मरीज के लिए सर्जरी सही विकल्प नहीं होती है। कुछ मरीज ही lesionectomy based epilepsy surgery के लिए उपयुक्त होते हैं।
  • जिन मरीजों में दवाइयों के बाद भी दौरे कंट्रोल नहीं होते हैं, उनमें सर्जरी का विकल्प चुना जा सकता है।
  • वहीं, अगर जांच में दौरे पैदा करने वाला हिस्सा स्पष्ट रूप से पहचाना जा सकता है, तो भी डॉक्टर सर्जरी का विकल्प चुन सकते हैं।

इन चीजों से ट्रिगर हो सकता है दौरा!

डॉ. पद्मा बताती हैं कि कुछ चीजें मिर्गी के दौरों को ट्रिगर कर सकते हैं, ये हर व्यक्ति में अलग-अलग हो सकते हैं।

  • कुछ लोगों में नींद पूरी न होने पर मिर्गी के दौरे ट्रिगर हो सकते हैं।
  • कुछ लोगों में खाना मिस करने पर दौरे पड़ सकते हैं।
  • लंबे समय तक स्क्रीन देखना और चमकती रोशनी में रहने से भी कुछ लोगों में मिर्गी के दौरे ट्रिगर हो सकते हैं।

Disclaimer: अगर किसी व्यक्ति को दवा लेने के बाद भी बार-बार दौरे पड़ रहे हैं, तो इसे नजरअंदाज बिल्कुल न करें। ऐसे मरीजों को किसी विशेषज्ञ न्यूरोलॉजिस्ट या comprehensive epilepsy centre में जांच करानी चाहिए। अगर समय पर बीमारी की सही पहचान हो जाए और उचित इलाज मिले, तो कई मरीजों में दौरे को बेहतर तरीके से कंट्रोल किया जा सकता है। कुछ ही मामलों में सर्जरी की जरूरत पड़ती है।