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Written By: Jitendra Gupta | Published : June 21, 2022 2:26 PM IST
60 फीसदी लोग करते हैं खराब तंत्रिका स्वास्थ्य के लक्षण! कितना जरूरी है नर्व सिस्टम का हेल्दी होना
आपका चलना, बात करना, किसी एक हाथ को हिलाना या फिर शरीर के अंगों द्वारा काम करना, पाचन और भी बहुत से काम, जिनके बारे में आप सोचते तक नहीं है उन्हें आप अपने-आप होने वाली प्रतिक्रिया के रूप में लेते हैं। बता दें कि तंत्रिका तंत्र हमारे शरीर का कमांड सेंटर होता है, जो शरीर में मौजूद अकेला ऐसा तंत्र है, जो पूरे शरीर को काम करने का निर्देश देता है और सभी अंग उसी के आस-पास घूमते हैं। तंत्रिका तंत्र का हमारे स्वास्थ्य के हर पहलू में एक अहम भूमिका निभाता है इसलिए तंत्रिका तंत्र को हेल्दी बनाना एक चिंता का विषय है।
जब भी बात हमारे स्वास्थ्य को लेकर होती है तो हमारे जीवनशैली में हुए परिवर्तन और शरीर में मौजूद कमियों के मद्देनजर तंत्रिका स्वास्थ्य समस्याओं से निपटना बहुत ही जरूरी हो जाता है और इसलिए जरूरी है कि लोगों के बीच जागरूकता फैलाई जाए ताकि उन्हें अपने तंत्रिका स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद मिले।
बता दें कि न्यूरोपैथी और तंत्रिका स्वास्थ्यको लेकर अभी भी लोगों के बीच जागरूकता की कमी है और इतना ही नहीं इसके लक्षणों के बारे में भी लोगों को पता नहीं है। पिछले साल पीएंडजी हेल्थ और हील हेल्थ एंड हंस रिसर्च द्वारा किए गए एक अध्ययन में जागरूकता की कमी और लोगों के बीच तंत्रिका सवास्थ्य के बारे में सवाल पूछा गया था।
अध्ययन के मुख्य निष्कर्ष ये बताते हैं कि 91 फीसदी जवाबदाताओं का मानना है कि तंत्रिका स्वास्थ्य बहुत ही जरूरी है हालांकि 62 फीसदी को ये पता नहीं है कि तंत्रिका और रक्त वाहिकाएं अलग-अलग होती हैं। यही कारण है कि अक्सर इसके लक्षणों को मरीज नजरअंदाज कर देते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि ये परेशानी मस्कुलर या ब्लड सर्कुलेशन से जुड़ी हुई है।
अध्ययन से ये भी सामने आया है कि सिर्फ 50 फीसदी लोग ही तंत्रिका स्वास्थ्य से जुड़े हुए लक्षणों को पहचान पाते हैं जबकि 60 फीसदी से ज्यादा लोग खराब तंत्रिका स्वास्थ्य के लक्षणों को नजरअंदाज कर देते हैं। न्यूरोपैथी में बहुत से कारक योगदान देते हैं और कुछ मामलों में गलत निदान या फिर निदान न हो पाने के कारण मरीजों को बहुत ज्यादा क्षति पहुंचाते हैं।
तंत्रिका स्वास्थ्य को प्रभावित करने वाले कारकों में सबसे आम डायबिटीज और शराब हैं। दरअसल इस अध्ययन में ये सामने आया है कि बहुत कम लोगों में तंत्रिका क्षति डायबिटीज और शराब के साथ जुड़ी हुई है। डायबिटिक पेरिफेरल न्यूरोपैथी (DPN) डायबिटीज की सबसे आम जटिलताओं में से एक है, जो संवेदना, मोटर और ऑटोनॉमिक लक्षण को रोजाना प्रभावित करने का काम करती है। ये अध्ययन भारत में तंत्रिका स्वास्थ्य की समस्या को हल करने की जबरदस्त जरूरत पर जोर देते हैं।