सिर्फ 6 साल की उम्र में 2 बार ब्लड कैंसर को हराया, उम्मीद टूटने के बाद Targeted Therapy से मिला नया जीवन

आज वर्ल्ड ब्लड कैंसर डे है और आज के दिन हम जानेंगे कि कैसे एक छोटे बच्चे के बारे में जानेंगे कैसे उसने ब्लड कैंसर को एक बार नहीं बल्कि दो बाहर हराया। चलिए जानते हैं कैसे नन्हें बच्चे ने रक्त कैंसर को मात दी।

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Written By: Mukesh Sharma | Updated : May 31, 2026 12:39 PM IST

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Medically Verified By: Dr Vipin Khandelwal

ब्लड कैंसर को दुनिया के सबसे खतरनाक कैंसर के प्रकारों में से एक गिना जाता है और ब्लड कैंसर के मरीज यहां तक कि कई बार तो जीने की उम्मीद ही छोड़ देते हैं। लेकिन आज वर्ल्ड ब्लड कैंसर के मौके पर हम आपको एक ऐसे ही 6 साल के बच्चे के बारे में बताएंगे जिसने ब्लड कैंसर को एक बार नहीं बल्कि दो बार हराया। जहां लोग ब्लड कैंसर का नाम सुनकर ही डर जाते हैं, वहां 6 साल का छोटा सा आरव, जिसे अभी खिलौनों की दुनिया देखनी थी उसने कैंसर से एक बार नहीं दो बार लड़ाई लड़ी ब्लड कैंसर जैसी गंभीर बीमारी ने उसके बचपन को बार-बार अस्पताल के कमरों, इंजेक्शन, दवाइयों और दर्द के बीच कैद कर दिया।

अपोलो हॉस्पिटल में आरव को लाया गया

6 साल के नन्हें आरव दास को जब दूसरी बार एक्यूट लिम्फोब्लास्टिक ल्यूकेमिया (ALL) हुआ, तो उसे नवी मुंबई के अपोलो हॉस्पिटल में लाया गया। एक्यूट लिम्फोब्लास्टिक ल्यूकेमिया एक प्रकार का ब्लड कैंसर है, जो व्हाइट ब्लड सेल्स को नुकसान पहुंचाता है। जब आरव को पहली बार ब्लड कैंसर हुआ था तो एक बड़े राष्ट्रिय कैंसर केंद्र में उसका इलाज कराया गया और जब ब्लड कैंसर फिर से विकसित हो गया तो परिवार आगे के इलाज की तलाश में अपोलो पहुंचे। जब आरव अपोलो हॉस्पिटल आया तो उस समय गंभीर इन्फेक्शन व बेहद कमजोर इम्यूनिटी जूझ रहा था और उसका ब्लड काउंट भी बहुत अस्थिर था।

एक्यूट लिम्फोब्लास्टिक एनीमिया के बारे में समझें

एक्यूट लिम्फोब्लास्टिक एनीमिया (Acute Lymphoblastic Leukemia) ब्लड कैंसर का सबसे आम प्रकार है, लेकिन अगर यह एक बार ठीक होकर फिर विकसित हो जाता है तो स्थिति बहुत ज्यादा गंभीर हो सकती है। बच्चों में दोबारा या बार-बार होने वाला ब्लड कैंसर एक बेहद गंभीर व क्रिटिकल कंडीशन पैदा करता है, जिसका इलाज बेहद स्पेशलाइज तरीके से किया जाता है और लंबे समय तक मरीज को जांच व देखभाल में रखा जाता है।

आरव को जरूरत थी स्पेशलाइज ट्रीटमेंट की

आरव के शरीर में विकसित होने वाला कैंसर बार-बार विकसित होने वाला बन चुका था, जिस कंडीशन को अग्रेसिव या रिकरेंट ब्लड कैंसर कहा जाता है। बच्चों में विकसित होने वाली इस कंडीशन में सर्वाइल बढ़ाने के लिए एडवांस इन पेडिएट्रिक हीमेटो-ऑन्कोलॉजी ट्रीटमेंट और स्टेम सेल ट्रांसप्लांटेशन ट्रीटमें शुरू करना जरूरी होता है।

आरव के पापा ने डोनेट की स्टेम सेल

स्टेम सेल ट्रांसप्लांट ब्लड कैंसर के एक्यूट लिम्फोब्लास्टिक ल्यूकेमिया के ट्रीटमेंट का एक बेहद जरूरी हिस्सा होता है। जब आरव की कंडीशन थोड़ी ठीक होने लगी को ऑन्कोलॉजी टीम ने इनोटूजमैब नाम का एक खास टारगेटेड ट्रीटमेंट शुरू किया, ताकि ब्लड कैंसर को कंट्रोल किया जा सके। इसके बाद आरव हेल्पोआइडेंटिकल हीमोटोपोएटिक स्टेम सेल ट्रांसप्लांट किया गया, जिसमें उनके पिता ने उनके स्टेम सेल्स डोनेट की। ट्रांसप्लांट सफलतापूर्वक होने के बाद आरव 200 दिन तक ठीक रहा।

ब्लड कैंसर दूसरी बार विकसित होने के बाद जो परिवार हमारे पास आते हैं, वे अक्सर मानसिक और शारीरिक रूप से थक चुके होते हैं। उनके लिए यह जानना जरूरी है कि इलाज अभी भी उपलब्ध है और इस तरह कुछ खास मामलों को कंट्रोल करने का लक्ष्य इस ट्रीटमेंट का होता है। हाइपोआइडेंटिकल ट्रांसप्लांट जैसी एडवांस तकनीकों ने ऐसी स्थितियों में काफी बदलाव किया है और इस तकनीक की मदद से आज पूरी तरह से डोनर का मैच होना जरूरी नहीं है बल्कि कई बार पूरा मैच न होने के बाद भी मरीज को ट्रीटमेंट मिल सकता है।

Dr Vipin Khandelwal, Consultant - Paediatric Hemato-Oncology & BMT, Apollo Hospitals Navi Mumbai.

बच्चों में सिर्फ बीमारी का इलाज ही काफी नहीं

ब्लड कैंसर का मरीज अगर एक बच्चा हो तो मामला और ज्यादा पेचीदा हो जाता है। बच्चों में होने वाले कैंसर के इलाज के अलावा इन्फेक्शन कंट्रोल, पोषण का धअयान रखना, परिवार को भावनात्मक मदद और यहां तक कि लंबे समय तक रखी जाने वाली देखभाल का ध्यान भी रखना पड़ता है। क्योंकि यही छोटी-छोटी चीजें हैं, जो बच्चे को जल्दी ठीक होने और अपनी रोजाना के जीवन में वापस लौटने में मदद करते हैं।

बीमारी के इलाज के अलावा, बच्चों में होने वाले ब्लड कैंसर के प्रबंधन में संक्रमण पर नियंत्रण, पोषण संबंधी सहायता, परिवारों को भावनात्मक संबल, बारीकी से निगरानी और लंबे समय तक चलने वाली देखभाल भी शामिल होती है। ये कारक बच्चों को गहन उपचार सहन करने और धीरे-धीरे अपनी सामान्य दिनचर्या में लौटने में मदद करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

अब धीरे-धीरे रिकवर हो रहा है आरव

स्टेम सेल ट्रांसप्लांट के बाद आरव अब धीरे-धीरे रिकवर हो रहा है और उसका शरीर अभी भी कैंसर से मुक्त है। हालांकि, ऐसे मामलों में कैंसर फिर से विकसितो होने का खतरा बना रहा है। लेकिन आरव की रिकवरी इस बात को दर्शाती है कि एडवांस ट्रीटमेंट और सही देखभाल, आरव की तरह अन्य बच्चों में ब्लड कैंसर का इलाज की उम्मीद जगाती है।

डिसक्लेमर: इस लेख का उद्देश्य केवल बच्चों में ब्लड कैंसर से जुड़ी कुछ जरूरी जानकारियां देना है और इस कहानी को सहमति के साथ शेयर किया गया है। इसमें दी गई किसी भी जानकारी का इस्तेमाल किसी भी बीमारी के इलाज के रूप में नहीं किया जाना चाहिए। इसके लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।

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