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गर्मी में पेशाब करते वक्त ये 6 लक्षण देते हैं UTI का संकेत! जानें यूटीआई से बचने के लिए कौन सी आदतें करे फॉलो

गर्मी के दिनों में यूटीआई जैसी परेशानी से बचने के लिए जरूरी है कि आप अपने खान-पान के साथ-साथ अपने शौच की आदतों का भी ध्यान रखें।

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Written By: Jitendra Gupta | Published : May 11, 2023 3:03 PM IST

गर्मियों की शुरुआत के साथ अचानक गर्म और उमस भरे तापमान में बदलाव ने महिलाओं और बच्चों में मूत्र पथ के संक्रमण (यूटीआई) के मामलों में वृद्धि हो रही है। यह समस्या पुरुषों के मुकाबले महिलाओं में ज्यादा देखी जा रही है। डॉक्टरों का कहना है कि हर महीने करीब 15 से 20 मरीज इलाज के लिए आ रहें हैं। गर्मी के दिनों में यूटीआई जैसी परेशानी से बचने के लिए जरूरी है कि आप अपने खान-पान के साथ-साथ अपने शौच की आदतों का भी ध्यान रखें। आइए बताते हैं कैसे आप गर्मी के दिनों में यूटीआई से बच सकते हैं और खुद को सेफ रख सकते हैं।

गर्मी में यूटीआई के लक्षण

तनावपूर्ण जीवनशैली में महिलाओं में यूटीआई (यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन) यानी यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन सबसे बड़ी समस्या बनकर उभर रहा है। काम के लिए बाहर जाने वाली महिलाओं में यह समस्या बढ़ती देखी जा रही है। गर्मी के दिनों में ज्यादातर महिलाएं यूटीआई इंफेक्शन की चपेट में आ जाती हैं। गर्मी के दिनों में यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन एक आम और बेहद दर्दनाक समस्या है। गर्म और आर्द्र गर्मी का मौसम इस समस्या के जोखिम को बढ़ा देता है। इस बीमारी के लक्षणों में शामिल हैंः

1-पेशाब करते समय जलन

2- बार-बार पेशाब आना

3-पेशाब में खून आना

4- पेशाब से दुर्गंध आना

5- पेट में दर्द

6- जी मिचलाना और उल्टी

क्या कहते हैं एक्सपर्ट

मुंबई के अपोलो स्पेक्ट्रा अस्पताल में यूरोलॉजिस्ट डॉ. जितेंद्र सखरानी का कहना है कि गर्मियों में बाहर घूमने जाना या पानी में तैरने जैसे कारक सभी उम्र के लोगों में यूटीआई के मामलों को बढ़ा सकते हैं। तापमान और यूटीआई के मामलों के बीच संबंध डिहाइड्रेशन के कारण भी हो सकता है क्‍योंकि जब लोग डिहाइड्रेट हो जाते हैं तो यूरिन कम हो जाता है। इसलिए मूत्रमार्ग से कम पेशाब निकलता है। इसका मतलब है कि बैक्टीरिया लंबे समय तक जीवित रह सकते हैं और संक्रमित हो सकते हैं। काम पर जाते समय पेशाब रोक लेने से यूटीआई हो सकता है।

यूटीआई की दूसरी वजह

डॉ. जितेंद्र सखरानी का कहना है कि इसके अलावा गर्मियों में पर्याप्त पानी नहीं पीने, मासिक धर्मऔर व्यक्तिगत स्वच्छता पर ध्यान न देने से भी यूटीआई हो सकता है। गर्मी के दिनों में यह समस्या महिलाओं में ज्यादा देखने को मिलती है। बाह्यरूग्ण विभाग में हर महीने 15 से 20 फीसदी महिलाएं इन शिकायतों को लेकर इलाज के लिए आ रही हैं।

कैसे करें बचाव

Zynova shalby अस्पताल के यूरोलॉजिस्ट डॉ. आशीष चौरसिया ने कहा कि यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन से बचाव के लिए रोजाना कम से कम ढाई से तीन लीटर पानी पीना जरूरी है। नियमित व्यायाम करें, शराब या कैफीनयुक्त भोजन से बचें। यूरिन को ज्यादा देर तक स्टोर करके न रखें। इंटरकोर्स के तुरंत बाद ब्लैडर खाली कर दें, इससे इंफेक्शन का खतरा कम हो जाता है।

बार-बार क्यों होता है यूटीआई

मेडिकवर हॉस्पिटल में कंसल्टेंट यूरोलॉजिस्ट एंटरोलॉजिस्ट और ट्रांसप्लांट सर्जन डॉ. विकास भिसे का कहना है कि यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन बार-बार होने की संभावना अधिक होती है। क्योंकि यह समस्या छह महीने में दो बार से अधिक और साल में तीन बार से अधिक होने का खतरा रहता है। पुरुषों की तुलना में महिलाओं को संक्रमण होने की संभावना 30 गुना अधिक होती है। मूत्रमार्ग में संक्रमण महिलाएं योनि और एनल कैनाल के करीब होती हैं। बैक्टीरिया आसानी से महिलाओं के मूत्र पथ और मूत्राशय में प्रवेश कर जाते हैं। इससे बार-बार संक्रमण होता है।

उन्होंने कहा कि यहां तक कि विवाहित महिलाओं को भी यौन क्रिया के बाद यूटीआई होने का खतरा होता है। योनि से बैक्टीरिया मूत्र पथ में प्रवेश करते हैं और बैक्टीरिया मूत्राशय में बढ़ते हैं जिसके परिणामस्वरूप संक्रमण होता है। इसलिए जादातर महिलाओं को गर्मी के मौसम में सेहत का ध्यान रहना जरूरी हैं।