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शरीर में ये 6 बदलाव महिलाओं को बनाते हैं गायनेकोलॉजिकल कैंसर का शिकार, जानें बचाव के 3 उपाय

वे महिलाएं, जो अपने जीवनकाल में इस 6 तरह के लक्षणों को महसूस करती हैं उन्हें कैंसर की जांच करानी चाहिए। ये संकेत गायनेकोलॉजिकल कैंसर के लक्षण हो सकते हैं, जो किसी महिला की जान लेने के लिए काफी हैं।

शरीर में ये 6 बदलाव महिलाओं को बनाते हैं गायनेकोलॉजिकल कैंसर का शिकार, जानें बचाव के 3 उपाय
शरीर में ये 6 बदलाव महिलाओं को बनाते हैं गायनेकोलॉजिकल कैंसर का शिकार, जानें बचाव के 3 उपाय

Written by Jitendra Gupta |Published : January 30, 2021 3:55 PM IST

मौजूदा वक्त में कोरोना इन्फेक्शन का डर और महिलाओं में कैंसर के प्रति जागरूकता की कमी के कारण कुछ प्रकार के कैंसर की स्क्रीनिंग ठीक से नहीं हो पा रही है, जिसके परिणामस्वरूप बहुत सी महिलाएं बिना किसी इलाज के दम तोड़ देती हैं। एक्सपर्ट का कहना है कि हॉस्पिटल आने से इन्फेक्शन पकड़ने का डर लोगों में है लेकिन अभी तक ऐसा किसी को नहीं हुआ है, रेगुलर मेडिकल स्क्रीनिंग न कराने से सर्वाइकल कैंसर गायनेकोलॉजिकल कैंसर में 20% की वृद्धि हो सकती है।

मिराकल्स मेडीक्लीनिक और अपोलो क्रेडल हॉस्पिटल, गुरुग्राम के ऑब्स्टेट्रिसियन और गायनेकोलॉजिस्ट डॉ. वीनू अग्रवाल कहती हैं, " नेशनल कैंसर इंस्टीटयूट, अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (NCI-AIIMS) के अनुमान के मुताबिक भारत में हर 8 मिनट के दौरान एक महिला सर्वाइकल कैंसर से जान गंवाती है। 2016 से हर साल 1 लाख नए सर्वाइकल कैंसर के केसेस मिलते हैं। यह बहुत दुःख की बात है क्योंकि सर्वाइकल कैंसर को होने से रोका जा सकता है अगर

  • रूटीन पैप स्मीयर टेस्ट कराया जाए।
  • ह्युमन पेपिलोमावायरस के खिलाफ वैक्सीन लगवाई जाए।
  • सुरक्षित सेफ सेक्स और पर्सनल हाइजीन को बनाये रखा जाए।

ह्युमन पेपिलोमावायरस से वजाइनल कैंसर हो सकता है। दरअसल ज्यादातर गायनेकोलॉजिकल कैंसर को उनके लक्षणों के बारें में जागरूकता फैला करके और समय पर डायग्नोसिस कराके उनसे बचा जा सकता है। रूटीन स्क्रीनिंग होने से भी इस तरह के कैंसर से बचा जा सकता है लेकिन भारत में अभी भी अन्तरंग अंगो में कोई भी समस्या होने पर इसका चेकअप कराने में बहुत ज्यादा संकोच किया जाता है। गायनेकोलॉजिकल कैंसर से बचे रहने का सबसे अच्छा तरीका है कि रेगुलर स्क्रीनिंग करायी जाए लेकिन कोविड-19 वायरस के डर से लोग रेगुलर स्क्रीनिंग नहीं करा रहे हैं। मिराकल्स मेडीक्लीनिक में हमने देखा है कि अगर रेगुलर स्क्रीनिंग में कमी आयी तो कैंसर से प्रभावित महिलाओं की संख्या बढ़ सकती है।"

गायनेकोलॉजिकल कैंसर का तात्पर्य महिला के शरीर के प्रजनन अंगों में कैंसर या ट्यूमर कोशिकाओं के विकास से होता है। युटेरीन कैंसर का सबसे कॉमन रूप सर्वाइकल कैंसर और ओवेरियन कैंसर हैं जबकि वुल्वर कैंसर, वजाइनल कैंसर और गेस्तेश्नल ट्रोफोब्लास्टिक ट्यूमर अपेक्षाकृत दुर्लभ कैंसर होते हैं। कोविड महामारी से पहले की तुलना में अब महिलाएं स्क्रीनिंग के लिए कम आ रही है इससे उनमे ब्रेस्ट कैंसर के केसेस में चिंताजनक वृद्धि होने से डॉक्टर चिंतित है।

डॉ वीनू अग्रवाल ने कहा, " हालांकि ब्रेस्ट कैंसर एक टिपिकल गायनेकोलॉजिकल कैंसर नहीं है लेकिन इस तरह के कैंसर के बारें में जागरूकता की कमी होने से ब्रेस्ट कैसर से भारत में महिलाएं ज्यादा मर रही है क्योंकि ज्यादातर महिलाएं लास्ट स्टेज में कैंसर से डायग्नोज होती है इससे ट्रीटमेंट प्रभावित होता है। एक अनुमान के मुताबिक भारत में हर 2 महिला ब्रेस्ट कैंसर से हाल ही में डायग्नोज होती है और एक महिला मरती है।"

लक्षण को जानें

- असामान्य वजाइनल ब्लीडिंग या डिस्चार्ज- वुल्वर कैंसर के अलावा यह हर तरह के गायनेकोलॉजिकल कैंसर का एक कॉमन लक्षण होता है।

- सेक्सुयल इंटरकोर्स के बाद वजाइना में गंध आना या ब्लीडिंग- यह सर्वाइकल कैंसर का कॉमन लक्षण है

- ओवेरियन और युटेरिन कैंसर के लिए पेल्विक दर्द या प्रेशर होना कॉमन लक्षण है।

- ओवेरियन और वजाइनल कैंसर में बार-बार पेशाब करने और / या कब्ज की समस्या होती है।

- बहुत जल्दी पेट भरा हुआ महसूस करना या खाने में कठिनाई, पेट फूलना और पेट या पीठ में दर्द , ये लक्षण केवल ओवेरियन कैंसर में दिखते है।

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- योनि में खुजली, जलन, दर्द या कोमलता, और योनी या त्वचा की जलन के रंग में परिवर्तन, जैसे कि दाने, घाव, या मस्से - यह वुल्वर कैंसर में होता हैं।

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