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मस्तिष्क में होने वाला ट्यूमर यानि ब्रेन ट्यूमर, अत्यंत घातक बीमारी है। अगर सही समय पर इसका इलाज न किया जाए तो यह बीमारी जानलेवा साबित हो सकती है। मनुष्य के मस्तिष्क में कोशिकाओं और टिश्यू की गांठ बन जाती है और यह ब्रेन ट्यूमर कहलाती है। हालांकि ब्रेन ट्यूमर किसी को भी किसी भी उम्र में हो सकता है लेकिन अगर किसी के परिवार में पहले से ब्रेन ट्यूमर का इतिहास है तो उन्हें यह बीमारी होने की संभावना अधिक बढ़ जाती है। दिल्ली स्थित धर्मशिला नारायणा सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल रेडिएशन ऑन्कोलॉजी, सीनियर कंसल्टेंट डॉक्टर पूजा खुल्लर का कहना है कि यह समस्या वृद्ध लोगों में अधिकतर देखने को मिलती है। ब्रेन ट्यूमर का इलाज अत्यंत कठिन है लेकिन अगर इसका इलाज शुरू किया जाए तो काफी हद तक नियंत्रण पाया जा सकता है।
सर्जरी का विकल्प तब अपनाया जाता है जब यह देखा जाता है कि इससे ट्यूमर को आसानी से निकाला जा सकेगा। सर्जरी में यह भी देखा जाता है कि इसमें पूरा ट्यूमर निकाला जाएगा या आधा। यह अत्यंत जटिल प्रक्रिया है, जिसके साइड इफेक्ट भी हो सकते हैं। इससे इन्फेक्शन या ब्लीडिंग की समस्या भी हो सकती है।
एक्स-रे तकनीकी के प्रयोग के माध्यम से ट्यूमर की कोशिकाओं को खत्म करने के लिए रेडिएशन थेरेपी प्रक्रिया अपनाई जाती है। इसके कारण शरीर में थकान, त्वचा में कालापन और सिरदर्द जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं।
कीमोथेरेपी प्रक्रिया के द्वारा दवाओं को इंजेक्शन की मदद से दिया जाता है, जिससे ट्यूमर की कोशिकाओं को नष्ट किया जा सकता है। इसके साइड इफेक्ट भी हैं कीमोथेरेपी में मरीज के बाल झड़ने लगते हैं, भूख नहीं लगती, उसे उल्टी या मतली महसूस हो सकती है।
ब्रेन ट्यूमर के इलाज के बाद भी यह कैंसर दोबारा लौट सकता है और इसलिए इसके लक्षणों को कंट्रोल करने के लिए डॉक्टर दवाइयां देते हैं। इसमें दौरा पड़ने पर एंटीसीजर दवाई भी दी जाती है, यह दवाएं ब्रेन ट्यूमर के कारण आई सूजन को कमकरने में भी मदद करते हैं।
कैंसर के साइड इफेक्ट को कम करने के लिए पैलिएटिव केयर की मदद ली जाती है इसके माध्यम से इलाज करा रहे व्यक्ति को मानसिक व शारीरिक तौर पर काफी राहत मिलती है क्योंकि कैंसर के कारण व्यक्ति बहुत कमजोर हो जाता है और ऐसे में उसे पैलिएटिव केयर के माध्यम से ठीक किया जाता है। इसमें दवाएं, पोषण और आराम के तरीके अपनाकर मानसिक स्वास्थ्य को सही करने का प्रयास किया जाता है।