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Constipation in children : अगर आपका बच्चा या फिर पड़ोसी का बच्चा रात को पेट दर्द से करहा उठे तो आप क्या करेंगे? जब व्यक्ति किसी ऐसी स्थिति में फंसा हो कि रात-बेरात उसे कुछ समझ न आए तो अस्पताल ही आखिरी विकल्प होता है। कभी-कभी तो डॉक्टर बच्चे के पेट के एक्स-रे की बात तक कह देते हैं, जो आपको काफी परेशान कर सकता है। लेकिन जब कुछ नहीं निकलता तो दिक्कत और बढ़ जाती है कि आखिर हुआ क्या। बच्चे के पेट में जमा जबरदस्त कब्ज की वजह से भी आपका पेट दर्द हो सकता है। आइए जानते हैं बच्चों के पेट में जमा कब्ज के ऐसे संकेत, जिन्हें देखकर आप आसानी से पता लगा सकते हैं बच्चा इस वजह से तो नहीं करहा रहा।
बहुत से बच्चे कब्ज की वजह से परेशान रहते हैं। कब्ज का सबसे आम संकेत है पेट में लगातार दर्द रहना और मल का कठोर हो जाना, जिसे बाहर निकालने में आपके बच्चे को काफी मशकक्त करनी पड़ती है। बहुत से माता-पिता सोचते हैं कि सिर्फ बच्चे को पॉटी करने में हो रही दिक्कत ही कब्ज है। लेकिन चिकित्सीय रूप से कब्ज की तीन संभावनाएं हो सकती हैंः
1-पहली, मल निकालाने में परेशानी
2-दूसरा, रोजाना शौच न जाना
3-तीसरा, सूख-सूखा मल निकालना
4-मल में तेज गंध आना
5-थोड़ी-थोड़ी मात्रा में मल का निकलना
अगर आपका बच्चा शौच के वक्त दर्द महसूस करता है, उसे पेट में दर्द महसूस होता है, बच्चे की चड्ढी में मल का चिपकना। इसका मतलब ये है कि बच्चे का मल वापस से रेक्टम में चला गया है। इसके अलावा सख्त मल के साथ अगर खून आता है तो निश्चित रूप से एक चिंता का संकेत हो सकता है। अगर आपका बच्चा शौच नहीं जा रहा है तो इसकी वजह से उसकी भूख में कमीआ सकती है। गंभीर मामलों में बच्चे पॉटी वाली जगह पर कटने और छिलने जैसी समस्या का शिकार हो जाते हैं।
बच्चे को दर्द से डर लगता है, जिसकी वजह से वह वापस से मल को अंदर खींच लेता है, जो और भी घातक है। अगर कब्ज का इलाज न किया जाए तो बच्चा कुपोषण का शिकार हो सकता है और वह ज्यादातर वक्त नाखुश रहता है।
कब्ज की परेशाी में बच्चे को दूध देना बंद कर दें। बच्चा जितना ज्यादा दूध पिएगा वह उतना ही पोषक तत्वों से भरी दूसरी चीजों को कम खाएगा। मैदा से बने बिस्किट भी कब्ज की सबसे बड़ी वजह हो सकते हैं। इसके अलावा बहुत से माता-पिता बच्चों को सादे चावल खाने को दे देते हैं। अगर बच्चे की डाइट में सब्जी नहीं होगी तो उसे शौच के वक्त ऐंठन होगी।
अगर आपका बच्चा क्रोनिक कब्ज की शिकायत से परेशान है तो आपको लक्षणों को कम करने के लिए डाइट में कुछ बदलाव करने की जरूरत हैः
1-उन्हें फाइबर से संपन्न डाइट दें।
2-केला, अंजीर और आलूबुखारा जैसे फूड्स खिलाएं।
3-ध्यान रखें कि बच्चा डेली एक्सरसाइज करे।
4-खूब सारा पानी पिलाएं।
5-अगर फिर भी बच्चा ठीक नहीं होता है तो उसे डॉक्टर की लिखी दवा दें।