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Cervical Cancer Kya Hota Hai: सर्वाइकल कैंसर महिलाओं में होने वाला एक गंभीर लेकिन समय रहते पहचाना जाए तो पूरी तरह रोका जा सकने वाला कैंसर है। सर्वाइकल कैंसर वह कैंसर होता है जो गर्भाशय ग्रीवा यानी कि सर्विक्स (Cervix) में होने वाला कैंसर है।यह गर्भाशय के निचले हिस्से और योनि के बीच का रास्ता होता है और ज्यादातर ह्यूमन पैपिलोमा वायरस के कारण होता है। लंग्स कैंसर हो या फिर ब्रेस्ट कैंसर, इनके बारे में लोगों को फिर भी जानकारी होती है। लेकिन सर्वाइकल कैंसर के बारे में कोई नहीं जानता है।
इसके अलावा जो लोग जानते हैं उनके बीच सर्वाइकल कैंसर को लेकर गलत जानकारी व अफवाह फैली हुई हैं। आप तक सही जानकारी पहुंचे, इसलिए हमने एसएसओ कैंसर हॉस्पिटल के डायरेक्टर और सर्जिकल ऑन्कोलॉजिस्ट डॉक्टर प्रवीन कम्मार से बात की। उनका कहना है कि ‘जानकारी की कमी और कुछ गलत धारणाओं के कारण आज भी कई महिलाएं इसकी जांच समय पर नहीं करवा पातीं।’ आइए जानते हैं सर्वाइकल कैंसर से जुड़े ऐसे ही 5 आम लेकिन खतरनाक मिथकों के बारे में जानते हैं,, जिन्हें तोड़ना बेहद जरूरी है।
यह सबसे आम और सबसे खतरनाक मिथक है। सच यह है कि सर्वाइकल कैंसर की शुरुआत में अक्सर कोई लक्षण दिखाई ही नहीं देते। पीरियड्स बिल्कुल नियमित हो सकते हैं और महिला खुद को पूरी तरह फिट महसूस कर सकती है, फिर भी कैंसर की शुरुआती अवस्था मौजूद हो सकती है। यही कारण है कि केवल लक्षणों का इंतज़ार करना जोखिम भरा हो सकता है। नियमित Pap smear या HPV टेस्ट ही सही तरीका है।
कई महिलाओं को लगता है कि एक बार जांच normal आ गई या उन्होंने normal delivery कर ली, तो अब सर्वाइकल कैंसर का खतरानहीं रहता। जबकि सच्चाई यह है कि सर्वाइकल कैंसर किसी भी उम्र में और किसी भी stage पर develop हो सकता है। Screening एक बार की प्रक्रिया नहीं, बल्कि एक नियमित आदत होनी चाहिए, खासकर 30 साल की उम्र के बाद।
यह धारणा बिल्कुल गलत है। यह सच है कि HPV vaccine कम उम्र में लेने पर ज्यादा प्रभावी होती है, लेकिन शादी के बाद या बच्चों के बाद भी यह फायदेमंद हो सकती है। कई महिलाओं को यह नहीं पता कि HPV के कई strains होते हैं, और vaccine भविष्य के संक्रमण से सुरक्षा दे सकती है। इसलिए उम्र या शादी की स्थिति को vaccine से दूर रहने का कारण नहीं बनाना चाहिए।
सर्वाइकल कैंसर के शुरुआती stages में अक्सर ये लक्षण नहीं होते। जब ऐसे symptoms दिखाई देते हैं, तब तक बीमारी आगे बढ़ चुकी हो सकती है। Screening का मकसद बीमारी होने से पहले बदलाव पकड़ना होता है, न कि तब जब परेशानी शुरू हो जाए।
Menopause के बाद भी सर्वाइकल कैंसर का खतरा खत्म नहीं होता। कई मामलों में तो यह कैंसर 50–60 की उम्र के बाद detect होता है। इसलिए menopause के बाद भी डॉक्टर की सलाह अनुसार screening जारी रखना जरूरी है।
सर्वाइकल कैंसर से बचाव का सबसे मजबूत हथियार है – सही जानकारी, नियमित जांच और समय पर vaccine। मिथकों पर नहीं, मेडिकल साइंस पर भरोसा करें। जागरूक रहें, जांच कराएं और अपनी सेहत को प्राथमिकता दें, क्योंकि आपकी सेहत, आपकी जिम्मेदारी है।