Best Tips for Healthy life in hindi : सालभर में कर ली ये 5 चीजें तो नहीं पड़ेगी डॉक्टर के क्लीनिक जाने की जरूरत, जानें हेल्दी रहने के 5 बेस्ट टिप्स

सबसे पहले अपने जीवन में डॉक्टर्स के महत्त्व को समझें। किसी भी बीमारी का आंकलन या मरीज़ के पूरी तरह से ठीक हो जाने की अंतिम पुष्टि केवल सम्बंधित डॉक्टर ही कर सकता है, भले ही मरीज़ ठीक महसूस क्यों न कर रहा हो।

WrittenBy

Written By: Jitendra Gupta | Published : August 10, 2021 5:41 PM IST

देखा गया है कि कोरोना महामारी के इस दौर में लोगों ने पहले से कहीं ज्यादा डॉक्टर्स के महत्त्व को समझा है, डॉक्टर्स की बदौलत हम कोरोना से इस हद तक बचाव सुनिश्चित कर पाए हैं। लेकिन इसी कड़ी में चिंताजनक बात यह है कि पहले से ही बहुत बड़े तबके में डॉक्टर की सलाह को नज़रंदाज़ किया जाता है। जैसे लगातार कोई शारीरिक समस्या होने पर जांच करवाने के बजाय घरेलू उपचार में समाधान ढूंढना, विशेषज्ञ, डॉक्टर से परामर्श के बजाय केमिस्ट को ही समस्या बताकर दवाएं लेना, इलाज होने पर थोड़ा सा ठीक महसूस होते ही दवाएं बीच में छोड़ लापरवाही शुरू करना आदि ऐसे कारक हैं जिनके कारण केवल समस्या में इजाफा होता है। आइये जानते हैं इन आदतों के क्या क्या नुक्सान हो सकते हैं जिनसे बचाव आवश्यक है।

श्री बालाजी एक्शन मेडिकल इंस्टिट्यूट की हेड ऑफ़ द डिपार्टमेंट, जनरल एंड मिनिमल एक्सेस सर्जरी, सीनियर कंसल्टेंट, डॉक्टर सुभाष अग्रवाल का कहना है कि इसमें कोई दोराय नहीं कि हमारे समाज के एक बहुत बड़े तबके को इस मामले में समझदारी अपनाने की ज़रूरत है। सबसे पहले अपने जीवन में डॉक्टर्स के महत्त्व को समझें। किसी भी बीमारी का आंकलन या मरीज़ के पूरी तरह से ठीक हो जाने की अंतिम पुष्टि केवल सम्बंधित डॉक्टर ही कर सकता है, भले ही मरीज़ ठीक महसूस क्यों न कर रहा हो, उसको तब तक खुद को ठीक नहीं मानना चाहिए जब तक कि वही डॉक्टर पूरी तरह से ठीक घोषित न कर दे। लेकिन ऐसे बहुत तरह की लापरवाहियां हैं जो वृहत स्तर पर की जातीं हैं लेकिन उसके नुकसान ऐसे हैं कि कोई भी हैरान रह जाए :-

1.खुद से दवाएं लेना या सेल्फ मेडिकेशन :-

अक्सर बहुत से लोग अपनी बीमारी जानते ही खुद दवाओं का सेवन करने लगते हैं। जैसे अक्सर बहुत से लोग लगातार पेट में गैस की शिकायत करते हैं और तरह तरह के चूरन या इन्टरनेट से देखकर दवाएं खाने लगते हैं, और चिंताजनक रूप से यह लापरवाही सबसे आम लापरवाहियों में से एक है। ऐसे लोगों को चेत जाना चाहिए कि इन दवाओं के बिना किसी सही प्रिस्क्रिप्शन के सेवन और वह भी लम्बे समय तक हड्डियों को प्रभावित कर सकता है। इस आदत को आज ही छोड़ें, और यदि लगातार पेट में दर्द या गड़बड़ी की समस्या है तो डॉक्टर से सलाह लें, जांच करवाएं, उसी के अनुसार अपना खान पान सुधारें, और दवाएं लें खुद से कोई दावा न लें। ठीक इसी तरह से लगातार सरदर्द से परेशान लोगों को समझना चाहिए, यह दर्द यदि लगातार रह रहा है तो या तो यह किसी बड़ी बीमारी का लक्षण है या अस्वस्थ जीवनशैली के कारण है, लेकिन दोनों ही विषयों में डॉक्टर ही अंतिम पुष्टि कर सकता है।

2.प्रिस्क्रिप्शन पूरा न लेना :-

किसी बीमारी पर डॉक्टर द्वारा लिखी गईं दवाएं बीमारी या समस्या को खत्म करने के लिए होतीं हैं जिसकी एक तय अवधि होती है और उसी अवधि के अनुसार दवाएं पूरी लेना बेहद ज़रूरी होता है। लेकिन इन्हें हल्का सा आराम आते ही बहुत से मरीज़ पूरी दवा नहीं लेते। आराम महसूस होना ठीक हो जाने की निशानी नहीं है, इसके नुक्सान उठाने पड़ सकते हैं। जैसे डायबिटीज़ एवं ब्लड प्रेशर के रोगी यदि तय नियम से दावा न लें तो उनका खून का दौरा बुरी तरह से प्रभावित हो सकता है, आंखों की रौशनी प्रभावित हो सकती है और किडनी का संचालन पूरी तरह से प्रभावित हो सकता है, और बहुत से मामलों में यौन जीवन पर भी असर पड़ सकता है। इसलिए उस तय अवधि में ठीक महसूस होने पर डॉक्टर को धन्यवाद करें लेकिन इलाज पूरा होने तक लगातार डॉक्टर की सलाह का पालन करें।

3. पोस्ट ऑपरेटिव केयर की अनदेखी :-

सबसे पहले यह समझें कि ऑपरेशन का प्रोसीजर मात्र व्यक्ति को बेहोश करके उसके अन्दर के अंगों का संचालन ठीक करके उसे समान्य स्थिति में ला देना नहीं होता। ऑपरेशन होते समय खासकर बड़ी सर्जरी के पश्चात मरीज़ की इम्युनिटी बहुत कम होती है, इसलिए आपने कभी देखा होगा कि किसी थोड़े से भी बीमार व्यक्ति को उसके करीब आने से मना किया जाता है, मरीज़ के आस पास बेहद सफाई और एहतियात की सलाह दी जाती है। और साथ ही अंदरूनी अंगों को ठीक से संचालन में आते आते समय लगता है। लेकिन बहुत से मरीज़ ऑपरेशन होते ही ठीक महसूस होने पर चलने फिरने लगते हैं, ऐसे में अंदरूनी अंग प्रभावित तो होते ही हैं साथ ही दवा सही से न लेने पर टाँके के ज़ख्म परेशान कर सकते हैं। इसलिए जब तक डॉक्टर की और से पुष्टि न हो मरीज़ को पूरी तरह से ठीक न माना जाए और सलाह का पालन किया जाए।

4.डायग्नोसिस और सटीक इलाज का महत्त्व :-

अक्सर बहुत से लोग उपरोक्त के अलावा एक कदम और आगे जाते हैं। वे अपनी बीमारी का डायग्नोसिस तो करवा लेते हैं, लेकिन उसके आगे इलाज करवाने नहीं जाते और बीमारी बढ़ती रहती है। कई बार तो ठीक उसी बीमारी से जूझ रहे अन्य किसी दोस्त या रिश्तेदार से पूछ कर दवाएं लेने लगते हैं। जैसे जांच में यदि डायबिटीज या हृदय रोगकी पुष्टि हो गई तो ठीक उसी बीमारी से जूझ रहे किसी अन्य व्यक्ति से की सलाह से या तो दवाएं लेना शुरू कर देते हैं या डर के मारे इलाज ही नहीं करवाते। ऐसे में अक्सर देर होने पर अन्दर ही अन्दर अंग सड़ने (गैंगरीन) लगते हैं और ऑपरेशन से उस गैंगरीन को निकालना पड़ता है, और कैंसर की एडवांस्ड स्टेज तक पहुंचना तो आम है। यदि कोई भय और शंका भी हो तो उसे केवल सम्बंधित डॉक्टर ही दूर कर सकता है।

5.सालाना चेक अप का महत्त्व :-

सालाना चेक अप का महत्त्व अभी भी बहुत से लोग नज़रंदाज़ करते हैं, क्योंकि यहाँ मसला बीमारियों के इलाज पर अधिक और बचाव का बेहद कम माना जाता है। जो लोग इनके प्रति सजग हैं वे बेहतर बता पायेंगे कि उनको कैसे आने वाले जोखिम रोकने में मदद मिली। रक्त व यूरिन की पहले से की जाने वाली जांच शरीर में आ रहे बदलावों से आगाह करवाने में मदद करतीं हैं, और ये जांच बीमारी से बचाव के साथ साथ डॉक्टर को सही आंकलन करने में भी मदद करते हैं। इसलिए इन चेक अप्स को ज़रूर करवाएं और अनावश्यक कष्ट से बचें।

Add The Health Site as a Preferred Source Add The Health Site as a Preferred Source

Disclaimer: The content on TheHealthSite.com is only for informational purposes. It is not at all professional medical advice. Always consult your doctor or a healthcare specialist for any questions regarding your health or a medical condition.