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Written By: Jitendra Gupta | Updated : February 2, 2021 5:21 PM IST
कोरोना काल में कैंसर मरीज अस्पताल जाते वक्त बरतें ये 5 सावधानियां, एक्सपर्ट की सलाह बचाएगी जान
कोविड महामारी के दौर में जहां संक्रमण का डर व्याप्त है वहीं कैंसर के मरीजों का इलाज बहुत से स्तरों पर बाधित हुआ है। यहां ध्यान देना होगा कि कोविड हमारे सामने एक बड़ी चुनौती के रूप में तो है ही जिससे निपटना जरूरी भी है। बीते समय कैंसर के इलाज के क्षेत्र में बहुत सी आधुनिकताएं आईं हैं, लेकिन फिर भी कैंसर का पता बहुत देर से ही चल पाता है। कोविड संक्रमण के कारण भी चुनौतियां निश्चित रूप से बढीं हैं। हाल ही में कुछ नई तकनीक कैंसर का पता लगाने और उसे ठीक करने में प्रभावी साबित हो रही हैं। आइए जानते हैं इस बारे में जरूरी जानकारी।
कैंसर के मरीज़ में कोविड के जोखिम और बीते वर्ष कैंसर के इलाज के लिए आईं तकनीकों के सन्दर्भ में डॉक्टर जे बी शर्मा, एचओडी एंड सीनियर कंसल्टेंट, मेडिकल ऑन्कोलॉजी, एक्शन कैंसर अस्पताल बताते हैं कि :-
हालांकि कोविड संक्रमण का जोखिम एक सामान्य व्यक्ति और कैंसर पीड़ित व्यक्ति में लगभग सामान ही होता है लेकिन संक्रमण की चपेट में आपने बाद उसके गंभीर होने का जोखिम कैंसर के मरीज में अधिक होता है। हमारे अस्पताल की अगर बात करूं तो बीते दिसम्बर तक हमारे यहाँ आने वाले तकरीबन 150 कैंसर के मरीज़ कोविड के संक्रमण की चपेट में आ गए, जिन्हें निश्चित रूप से अतिरिक्त सावधानी की ज़रूरत है। इसलिए पहली दृष्टि में कैंसर के मरीज़ों को कोविड के संक्रमण से बचने का हर संभव प्रयास करना चाहिए। साथ ही यदि कोविड वैक्सीन और कैंसर के मरीज़ों की बात है तो जो लोग कीमोथेरेपी पर चल रहे हैं, उन्हें कीमो पूरी होने तक वैक्सीन लगाने का इंतज़ार करना चाहिए और संबंधित डॉक्टर की सलाह पर कोविड वैक्सीन लगवानी चाहिए।
जहां तक बात है कैंसर के इलाज के क्षेत्र में आई आधुनिकता की तो इम्यूनोथेरेपी चर्चा में है।
इम्यूनोथेरेपी :- बीते 2 से 3 तीन वर्षों में इस इलाज के तरीके का आगमन हुआ है। साधारण भाषा में कहें तो इम्यूनोथेरेपी कैंसर मरीज़ के मरीज़ में उसकी इम्यूनिटी सिस्टम के साथ मिलकर काम करती है। दरअसल यह कैंसर के मरीज़ में “टी सेल्स” को स्टीमुलेट करती है जो कैंसर से लड़ने के लिए बॉडी को तैयार करती है। लंग, किडनी, ब्लेडर आदि के कैंसर समेत लगभग सभी तरह के कैंसर में प्रभावी है और बहुत से केसेस में चौथे स्टेज में भी इसके सकारात्मक परिणाम देखने को मिले हैं।
इसके तहत PD-1 और PDL-1 के विरुद्ध मोनोक्लोनल एंटीबॉडीज तैयार की जातीं हैं जो फार्मेसी लैब में विकसित की जातीं हैं और मरीज़ में इंजेक्शन के साथ दी जातीं हैं । इसके तहत मरीज़ का खून नहीं लिया जाता। इसमें मरीज़ के ट्यूमर टिश्यू पर PDL-1 की टेस्टिंग की जाती है, यदि यह पॉजिटिव आए तो इम्यूनोथेरेपी कारगर सिद्ध होती है. उदाहरण के लिए लंग कैंसर से पीड़ित व्यक्ति में 50 फ़ीसदी से अधिक PDL-1 पॉजिटिव निकलता है तो केवल इम्यूनोथेरेपी से भी इलाज किया जा सकता है, अन्यथा कीमोथेरेपी के साथ इम्यूनोथेरेपी दी जाती है और यह बहुत असरदार भी होती है। इलाज के इस तरीके के भविष्य में और भी व्यापक सम्भावना है और लोगों में इसकी जानकारी का प्रसार भी होना चाहिए।
कोविड महामारी के दौरान कैंसर के इलाज भी प्रभावित और बाधित हुए। ऐसे में रेडियोथेरेपी के संदर्भ में डॉक्टर कनिका सूद शर्मा, क्लिनिकल लीड एंड सीनियर कंसल्टेंट, ऑन्कोलॉजी, रेडियेशन ऑन्कोलॉजी, धर्मशिला नारायणा सुपरस्पेशेलिटी अस्पताल कहतीं हैं कि :-
सबसे पहले यह समझना होगा कि कोविड संक्रमण के डर के कारण अस्पताल न आना और कैंसर के इलाज में देरी करना बिल्कुल सही नहीं है क्योंकि जितना इलाज टलता जाएगा, कैंसर की स्तागेस उतनी ही बढ़ती जाएँगी और ठीक होने की गुंजाईश कम होती जायेगी। और प्रत्यक्ष रूप से कोविड से संक्रमित हो चुके कैंसर के मरीज़ों में सही समय पर इलाज के साथ सकारात्मक परिणामों की संभावना अधिक है। मेरे अपने अनुभव में तकरीबन 10 ऐसे मरीज़ हैं जिन्हें रेडियोथेरेपी के दिनों में कोविड का संक्रमण हुआ लेकिन उन्होंने दोनों से निडर होकर सामना किया और बेहतर स्थिति में है। वही बहुत से मरीज़ जो संक्रमण से डर के कारण अस्पताल नहीं आए उनकी समस्याएं बहुत बढ़तीं चली गईं।
रेडियेशन और इलाज की आधुनिकता : आजकल रेडियेशन थेरेपी बहुत आधुनिक रूप में सामने आ रही है। पहले के दौर की तुलना में अब रेडियेशन में कैंसर को बारीकी से टारगेट किया जाता है और उसके आस पास के टिश्यू को बचाने की अधिक सम्भावना होती है, जिससे अंगों पर कुप्रभाव आने का डर खत्म होगा, लेकिन इसका सही समय शुरू होना जारी रखना ज़रूरी होता है।
रेडियेशन और कोविड वैक्सीन :- निश्चित रूप से कैंसर के मरीज़ों को जो रेडियोथेरेपी पर हैं वे कोविड वैक्सीन ले सकते हैं।
कोविड संक्रमण के बाद कैंसर के इलाज के सन्दर्भ में डॉक्टर इंदु बंसल, डायरेक्टर एंड सीनियर कंसल्टेंट- रेडिएशन ऑन्कोलॉजी, नारायणा सुपरस्पेशेलिटी अस्पताल, गुरुग्राम बतातीं हैं कि :
क्योंकि कैंसर के मरीज़ की इम्यूनिटी तुलनात्मक रूप से कम होती है इसलिए उनमें कोविड के साथ साथ किसी भी संक्रमण का गंभीर रूप से होने का जोखिम होता है। साथ ही कैंसर के मरीज़ में इलाज के दृष्टिकोण से में सर्जरी आदि में दिक्कत आ सकती है। न्यूट्रोपेनिया, ब्लड काउंट कम होने के साथ साथ अन्य रोगों के होने का जोखिम तो पहले से होता है जिसके कोविड संक्रमण के बाद और भी जटिल होने की गुंजाइश होती है। इसलिए संक्रमण के डर के डर के कारण इलाज ही बीच में छोड़ देना न केवल नासमझी है बल्कि बेहद ख़तरनाक है। हमारे अस्पताल में इसी कड़ी में कैंसर केयर लॉन्च हो रहा है, जिसके ज़रिये कैंसर के इलाज को और भी विस्त्तार दिया जाएगा। कोविड महामारी में सभी कैंसर के मरीज़ अस्पताल आते वक्त कुछ बातों का ध्यान रखें :-
कोविड संबंधित सभी सावधानियों का पालन करें, और यदि कोई लक्षण देखें तो घबराएं नहीं, केवल डॉक्टर की सलाह ही उचित समाधान है। याद रखें कोविड की वैक्सीन और संक्रमण से बचाव के तरीके हैं और कैंसर का भी इलाज पूरी तरह से संभव है, इसलिए दोनों से घबराएं नहीं। केवल लक्षण महसूस होते ही डॉक्टर से संपर्क करें ताकि इलाज की सही दिशा तय की जा सके।