
विद्या शर्मा
विद्या शर्मा को डिजिटल मीडिया में लगभग 3 साल का अनुभव है। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता ... Read More
Medically Verified By: Dr Kapil Kumar
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लोगों को यह जानकारी बिल्कुल नहीं है कि कुछ बीमारियों का इलाज सिर्फ ऑपरेशन द्वारा ही संभव है, यही कारण है कि लोग अस्पताल जाने की बजाय घर पर ही समस्या को ठीक करने की कोशिश करते हैं। मेडिकल साइंस में कई बीमारियों का इलाज दवाइयों, फिजियोथेरेपी और सही जीवनशैली से संभव है। लेकिन शरीर में कुछ ऐसी समस्याएं हो जाती हैं, जिन्हें सिर्फ दवाओं से ठीक करना असंभव होता है।
जब तक सर्जरी के जरिए उस खराबी को ठीक न किया जाए या प्रभावित अंग को आवश्यकतानुसार न हटाया जाए, तब तक बीमारी स्थायी रूप से ठीक नहीं होती। आइए नारायणा अस्पताल, दिल्ली के वरिष्ठ सलाहकार- गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल (जीआई) सर्जन एवं जीआई ऑन्कोलॉजिस्ट डॉक्टर कपिल कुमार कुर्सीवाल से जानते हैं कि कौन सी बीमारियां बिना ऑपरेशन के ठीक नहीं हो सकती हैं।
गॉल ब्लैडर पेट के ऊपरी दाहिने हिस्से में स्थित एक छोटी थैली होती है। इसे हिंदी में पित्ताशय की थैली कहा जाता है। यह लिवर द्वारा बनाए गए पित्त को स्टोर करती है। जब पित्त में कोलेस्ट्रॉल या बिलीरुबिन का संतुलन बिगड़ता है, तो वे सख्त होकर पथरी का रूप ले लेते हैं।
गुर्दे (किडनी) की पथरी तो पेशाब के रास्ते बाहर निकल सकती है, लेकिन पित्ताशय की बनावट ऐसी होती है कि वहां से पथरी खुद बाहर नहीं निकल सकती। अगर दवाइयों से इसे गलाने की कोशिश की जाए या यह अपने स्थान से खिसक जाए, तो यह पित्त की नली (Bile Duct) में फंस सकती है। इससे पीलिया या अग्न्याशय में सूजन जैसी जानलेवा स्थिति बन सकती है।
डॉक्टर बताते हैं कि इसका एकमात्र स्थायी इलाज कोलेसिस्टेक्टॉमी (Cholecystectomy) है, जिसमें ऑपरेशन के जरिए पित्ताशय को ही बाहर निकाल दिया जाता है। आधुनिक समय में यह लैप्रोस्कोपिक (दूरबीन) तकनीक से बहुत आसानी से हो जाता है।
जब शरीर का कोई आंतरिक अंग (जैसे आंत) मांसपेशियों या टिश्यूज (ऊतकों) की कमजोरी के कारण बाहर की ओर उभर आता है, तो उसे हर्निया कहते हैं। यह आमतौर पर पेट, नाभि या जांघ के ऊपरी हिस्से (Inguinal Hernia) में देखने को मिलता है।
हर्निया मांसपेशियों की दीवार में हुआ एक शारीरिक छेद या गैप (mechanical defect) है। दुनिया की कोई भी दवा या एक्सरसाइज फटी हुई या कमजोर हो चुकी मांसपेशी को अपने आप नहीं जोड़ सकती। बेल्ट या सपोर्ट पहनने से दर्द में अस्थायी राहत मिल सकती है, लेकिन यह बीमारी का इलाज नहीं है।
हर्निया का एकमात्र समाधान हर्नियोप्लास्टी (Hernioplasty) है, जिसमें सर्जरी करके बाहर निकले हिस्से को वापस अंदर किया जाता है और मांसपेशियों को मजबूती देने के लिए एक जाली (Mesh) लगाई जाती है।
उम्र बढ़ने, मधुमेह या किसी चोट के कारण आंखों के प्राकृतिक लेंस (Natural Lens) का धुंधला या सफेद हो जाना मोतियाबिंद कहलाता है। इसके कारण आंखों की रोशनी धीरे-धीरे कम होने लगती है और मरीज को सब कुछ धुंधला दिखाई देता है। मोतियाबिंद में दवाएं असरदार नहीं होतीं, क्योंकि यह आंखों के लेंस के प्रोटीन में आया एक स्थायी भौतिक बदलाव है। कोई भी आई ड्रॉप, चश्मा या दवा इस जमे हुए धुंधलेपन को साफ नहीं कर सकती।
मोतियाबिंद के इलाज की बात करें तो फेकोइमल्सीफिकेशन (Phacoemulsification) तकनीक द्वारा धुंधले हो चुके प्राकृतिक लेंस को हटाकर उसकी जगह एक नया पारदर्शी कृत्रिम लेंस (Intraocular Lens - IOL) लगाया जाता है।
डॉक्टर बताते हैं कि पेट के निचले दाहिने हिस्से में स्थित छोटी आंत और बड़ी आंत के जोड़ पर एक छोटी सी थैली होती है जिसे अपेंडिक्स कहते हैं। जब इसमें किसी रुकावट या संक्रमण के कारण सूजन आ जाती है, तो पेट में अचानक और तेज दर्द शुरू हो जाता है। अपेंडिसाइटिस में केवल दवाओं से स्थायी इलाज संभव नहीं है। शुरुआती चरण में एंटीबायोटिक्स से सूजन और दर्द कुछ समय के लिए कम हो सकते हैं, लेकिन यह इसका स्थायी समाधान नहीं है। अगर समय पर ऑपरेशन न किया जाए, तो अपेंडिक्स पेट के अंदर फट सकता है, जिससे पूरे पेट में जानलेवा संक्रमण फैल सकता है। इसका एक ही इलाज है और वह यह कि अपेंडेक्टॉमी (Appendectomy) के जरिए संक्रमित अपेंडिक्स को काटकर शरीर से तुरंत बाहर निकाल दिया जाए।
डॉक्टर के अनुसार "जब जोड़ों, खासकर घुटनों के बीच की कार्टिलेज उम्र या घिसाव के कारण पूरी तरह खत्म हो जाती है और हड्डियां आपस में रगड़ने लगती हैं, तो इसे एडवांस ऑस्टियोआर्थराइटिस कहते हैं। इसमें पेनकिलर और सप्लीमेंट्स कुछ समय तक दर्द कम कर सकते हैं, लेकिन घिस चुके कार्टिलेज को दोबारा नहीं बना सकते। जब हड्डियां आपस में टकराने लगती हैं, तो चलना-फिरना भी मुश्किल हो जाता है।
इसलिए इलाज के तौर पर नी रिप्लेसमेंट (घुटने का प्रत्यारोपण) ही इसका अंतिम और असरदार इलाज है, जिसमें क्षतिग्रस्त हिस्से को हटाकर धातु या प्लास्टिक का आर्टिफिशियल जोड़ लगाया जाता है।
डिस्क्लेमर: कई बीमारियों का इलाज दवाइयों या फिर घरेलू उपचार से संभव नहीं हो सकता है। कुछ के लिए सिर्फ ऑपरेशन की ही जरूरत होती है। ऐसे में आप इन बताई गई बीमारियों को अनदेखा न करें और अगर समस्या थोड़ी भी बढ़ रही है तो तुरंत डॉक्टर के पास जाएं।