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इन 4 बीमारियों को कंट्रोल करने से 80 फीसदी कम हो जाएगा पैरालिसिस का खतरा! जानें कौन सी बीमारियां बढ़ाती है खतरा
हमारी नसों में गोली की रफ्तार से बहने वाला खून अगर किसी अंग में न पहुंच पाए तो क्या होगा? जिस अंग में खून का प्रवाह बंद हो जाता है उस अंग का काम करना मुश्किल या फिर कहें नामुमकिन हो जाता है। ठीक इसी तरह अगर आपके मस्तिष्क में खून का प्रवाह बाधित हो जाता है तो आप ब्रेन स्ट्रोक का शिकार हो सकते हैं। आपको बता दें कि हर साल करीब 18 लाख लोग पैरालिसिस से अपनी जान गंवाते हैं। कहीं न कहीं खून के प्रवाह बाधित होने के लक्षण बहुत पहले हमारे शरीर में दिखाई देने शुरू हो जाते हैं, जिन्हें नजरअंदाज करने पर ये स्थिति पैदा होती है। इस लेख में हम आपको ऐसी बीमारियों के बारे में बता रहे हैं, जिन्हें कंट्रोल कर आप पैरालिसिस और लकवे को 80 फीसदी तक रोक सकते हैं।
लकवे और पैरालिसिस से बचने के लिए आप नारायणा सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल के सीनियर कंसल्टेंट-न्यूरोलॉजी डॉक्टर अमित श्रीवास्तव की इन बातों का ख्याल रखें, जिससे खतरा कम हो सकता है।
हाई ब्लड प्रेशर से पैरालिसिस आने की संभावना अधिक बनी रहती है इसलिए जीवनशैली में बदलाव करने की आवश्यकता है, साथ ही भोजन में नमक की बहुत कम इस्तेमाल करना चाहिए और जल्द से जल्द दवा के माध्यम से इसे नियंत्रित करने की आवश्यकता है। \
डायबिटीज भी आपको पैरालिसिस का शिकार बना सकती है, इसलिए आपको अपना ब्लड शुगर कंट्रोल करने की जरूरत होती है। डायबिटीज को कंट्रोल करने के लिए आपको उचित खानपान, व्यायाम व दवाओं का सही समय पर सेवन बहुत जरूरी है।
यह एक मिनी स्ट्रोक का लक्षण है जो 24 घंटे के अंदर उलट जाते हैं। यह एक प्रकार की प्रारंभिक चेतावनी होती है। जिन्हें इस प्रकार का छोटा स्ट्रोक आये वे तुरंत मरीज को अस्पताल लेकर पहुचें जिससे इसके बड़े रूप होने पर रोका जा सके।
अट्रियल फिब्रिलेशन को हिंदी भाषा में हृदय की अनियमित धड़कन के रूप में जाना जाता है, जिसकी वजह से आपकी नसों में खून के थक्के बन सकते हैं। अगर ये थक्के खून के साथ मस्तिष्क में पहुंच जाते हैं तो आप स्ट्रोक का शिकार हो सकते हैं, जो कि कई बार पैरालिसिस का भी कारण बन सकता है।
5.1- पैरालिसिस के साथ-साथ स्ट्रोक के आने के पीछे कहीं न कहीं कई प्रकार के हृदय रोग भी शामिल होते हैं, जिसमें शामिल हैं वाल्वुलर हार्ट डिजीज, रुमेटाइड हृदय रोग आदि।
5.2- क्रिटिकल कैरोटिड स्टेनोसिसः इस स्थिति में हमारे मस्तिष्क में रक्त आपूर्ति करने वाली रक्त वाहिकाओं के संकुचन से भी खतरा बना रहता है।
5.3-ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनियाः अत्यधिक खर्राटे लेना, सांस लेने में रुकावट के कारण रात में बार-बार जागना इससे भी मस्तिष्क पर असर पड़ता है।