ज्यादातर महिलाओं को होती हैं ब्रेस्ट कैंसर से जुड़ी ये गलतफहमियां, ऑन्कोलॉजिस्ट ने बताई सच्चाई

Common Myths About Breast Cancer: ब्रेस्ट कैंसर से जुड़ी आज भी लोगों को बहुत की गलतफहमियां हैं, जिनके कारण लोगों के मन में डर और भ्रम बना हुआ है। इस लेख में कैंसर स्पेशलिस्ट ऐसी ही कुछ गलतफहमियों को दूर करेंगे।

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Written By: Mukesh Sharma | Published : April 15, 2026 8:34 PM IST

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Medically Verified By: Dr. Lakhan Kashyap

Breast Cancer Myths: ब्रेस्ट कैंसर आज भी भारत में ऐसा टॉपिक है, जिसके बारे में महिलाएं खुलकर बात नहीं कर पा रही हैं। खासतौर पर ग्रामीण महिलाओं के लिए आज भी यह टॉपिक चर्चा करने के लिए बहुत मुश्किल बन जाता है। यही कारण है कि इसके बारे में ज्यादा बात नहीं हो पाती है और जब ऐसे किसी टॉपिक पर खुलकर बात नहीं हो पाती है, तो उसके बारे में बहुत ही गलतफहमियां बन जाती हैं। पुणे के बानेर में स्थित मणिपाल हॉस्पिटल, कंसल्टेंट और मेडिकल ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. लखन कश्यप ने इस बारे में कई महत्वपूर्ण जानकारियां दी और ब्रेस्ट कैंसर से जुड़ी कई ऐसी गलतफहमियों को दूर करने की कोशिश की जिसके बारे में हम इस लेख में जानेंगे। ब्रेस्ट कैंसर के मामले हमारे देश में तेजी से बढ़ रहे हैं और इससे रोकने के लिए सबसे ज्यादा जरूरी है इसके बारे में पूर्ण जानकारी।

ब्रेस्ट कैंसर को लेकर आज भी समाज में कई तरह की गलतफहमियां फैली हुई हैं। क्लिनिक में रोज ऐसे मरीज और उनके परिवार मिलते हैं, जो बीमारी से ज्यादा इन मिथकों के कारण डर और भ्रम में रहते हैं। एक डॉक्टर के तौर पर यह साफ दिखता है कि सही जानकारी की कमी कई बार इलाज में देरी करा देती है। इसलिए इन आम मिथकों को समझना और दूर करना बेहद जरूरी है।

Dr. Lakhan Kashyap, Consultant Medical Oncology - Manipal Hospital, Baner, Pune

मिथक 1: स्तन कैंसर सिर्फ बुजुर्ग महिलाओं को होता है

यह ब्रेस्ट कैंसर से जुड़ी सबसे आम गलतफहमी है, क्योंकि ब्रेस्ट कैंसर सिर्फ बुजुर्ग महिलाओं में ही नहीं होता है। हालांकि, उम्र बढ़ने के साथ-साथ ब्रेस्ट कैंसर का जोखिम भी बढ़ता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि कम उम्र की महिलाएं सुरक्षित हैं। आजकल 30-40 की उम्र में भी स्तन कैंसर के केस सामने आ रहे हैं। इसलिए किसी भी उम्र में स्तन में गांठ, बदलाव या असामान्य लक्षण दिखें तो उसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, क्योंकि ये ब्रेस्ट कैंसर के लक्षण हो सकते हैं।

मिथक 2: दर्द नहीं है तो गांठ खतरनाक नहीं

अक्सर हम मरीजों व उसके परिवार वालों को यह कहते हुए सुनते हैं कि “दर्द नहीं है, तो चिंता की बात नहीं होगी।” लेकिन सच यह है कि स्तन कैंसर की शुरुआती गांठ अक्सर बिना दर्द की होती है। दर्द का न होना सुरक्षित होने का संकेत नहीं है। अगर स्तन में कोई नई गांठ महसूस हो, स्किन में बदलाव दिखे या निप्पल से डिस्चार्ज हो, तो तुरंत जांच करवाना जरूरी है।

(और पढ़ें - क्या स्तनपान कराने से कैंसर का खतरा बढ़ता है?)

मिथक 3: परिवार में किसी को नहीं हुआ, तो मुझे भी नहीं होगा

कैंसर के मामलों में यह भी अक्सर देखी जाने वाली एक बड़ी गलतफहमी है, खासतौर पर ब्रेस्ट कैंसर के मामले में। हां, फैमिली हिस्ट्री होने से जोखिम बढ़ सकता है, लेकिन ज्यादातर मामलों में मरीजों के परिवार में पहले किसी को कैंसर नहीं होता। इसलिए केवल फैमिली हिस्ट्री के आधार पर खुद को सुरक्षित मान लेना सही नहीं है। हर महिला को अपनी बॉडी के बदलाव पर ध्यान देना चाहिए।

मिथक 4: बायोप्सी या जांच से कैंसर फैल सकता है

कई बार मरीज जांच कराने से डरते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि बायोप्सी से कैंसर फैल जाएगा, लेकिन यह धारणा पूरी तरह गलत है। बायोप्सी एक सुरक्षित प्रोसीजर है और इसे कराना बेहद जरूरी है। ऐसा इसलिए क्योंकि बायोप्सी व अन्य जांच कराकर ही तो डायग्नोसिस होता है। बिना सही जांच के इलाज शुरू करना संभव नहीं है, और जांच में देरी से ही बीमारी बढ़ने का खतरा होता है।

मिथक 5: स्तन कैंसर का मतलब है पूरा स्तन हटाना

पहले जब मेडिकल साइंस इतना एडवांस नहीं था, तब अक्सर ऐसा करना पड़ता था। लेकिन अब ऐसे मामले काफी हद तक कम हो गए हैं और हर केस में पूरा स्तन हटाना अब जरूरी नहीं है। कई मरीजों में ब्रेस्ट कंजर्विंग सर्जरी संभव होती है, जिसमें केवल प्रभावित हिस्सा निकाला जाता है और स्तन का आकार काफी हद तक सुरक्षित रखा जाता है। इसके अलावा दवाइयों, रेडिएशन और टार्गेटेड थेरेपी के जरिए भी बेहतर परिणाम मिल रहे हैं।

क्लिनिकल अनुभव यही बताता है कि स्तन कैंसर का डर अक्सर जानकारी की कमी से बढ़ता है। जितनी जल्दी सही जानकारी और जांच होगी, उतना ही इलाज आसान और सफल होने की संभावना बढ़ेगी। एक और बात जो अक्सर समझानी पड़ती है कि हर बदलाव कैंसर नहीं होता, लेकिन हर बदलाव को नजरअंदाज करना भी ठीक नहीं है। समय पर जांच कराने से कई बार शुरुआती स्टेज में ही बीमारी पकड़ में आ जाती है।

अंत में, सबसे जरूरी है – डर नहीं, जागरूकता। सही जानकारी ही सबसे बड़ा बचाव है।

अस्वीकरण: प्रिय पाठकों यह आर्ट‍िकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।

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