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क्या आप जानते हैं कि दुनियाभर में कितने लोग वाकई में तंबाकू का यूज कर रहे हैं? ग्लोबल एडल्ट तोबाको सर्वे इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में कुल आबादी का 28.6 फीसदी हिस्सा तंबाकू का उपयोग कर रहा है और वो भी मात्र 15 साल से ऊपर के लोग, जिसमें बच्चे भी शामिल हैं। बात करें व्यस्क आबादी की तो देश में 25 फीसदी लोग यानी की 23 करोड़ से ज्यादा लोग रोजाना तंबाकू का सेवन करते हैं जबकि 3 करोड़ लोग किसी मौके पर तंबाकू का सेवन करते हैं। वहीं बात करें ग्रामीण इलाकों की तो हर तीसरा व्यक्ति और शहरी क्षेत्र का हर पांचवा व्यक्ति तंबाकू का इस्तेमाल कर रहा है।
वहीं भारत में ज्यादातर लोग खैनी, गुटखा, जर्दा जैसे बिना धुएं वाले तंबाकू उत्पादों का सेवन करते हैं। हालांकि बीड़ी, सिगरेट और हूक्का भी चलन में है, जिनका इस्तेमाल भारी मात्रा में किया जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इन सभी प्रकार के तंबाकू का इस्तेमाल आपके फेफड़ों के साथ-साथ शरीर के दूसरे अंगों को भी नुकसान पहुंचाता है। आइए जानते हैं कौन से हैं ये दूसरे अंग।
बहुत से लोग ये मानते हैं कि धूम्रपान करने से सिर्फ फेफड़ों और हृदय पर ही हानिकारक प्रभाव पड़ता है लेकिन बहुत कम लोग ही इस बात को जानते हैं कि निकोटीन आपके मस्तिष्क के लिए भी खतरनाक साबित हो सकता है। निकोटीन मस्तिष्क में कई न्यूरोट्रांसमीटर (जो संकेत भेजता है) के मार्ग में बाधा पैदा करने का काम करता है। चूंकि निकोटीन न्यूरोट्रांसमीटर एसिटाइलकोलाइन के आकार में समान होता है, जो मस्तिष्क में संकेतों को बढ़ाने का काम करता है, जिससे आपके लिए एक समय पर एक चीज को सोच पाना मुश्किल हो जाता है। इसलिए आपका दिमाग भी उतना ही प्रभावित होता है, जितना कि फेफड़े और दिल।
ऐसी बहुत सी इंफ्लेमेटरी बीमारियां हैं, जो हमारे दांत की सेहत को दुरुस्त रखने वाले टिश्यू को प्रभावित करती हैं, जिसमें पेरीओडोंटाइटिस भी शामिल हैं। पेरीओडोंटाइटिस को आप अपने मुंह की अच्छी तरह से सफाई कर ठीक कर सकते हैं और रोक सकते हैं। पीरियोडोंटियम में चार टिश्यू होते हैं, जिसमें सीमेंटम, जिंजिवा, एल्वोलर बोन और पीरियोडोंटल लिगामेंट्स शामिल होते हैं। जब आप नियमित रूप से तंबाकू का उपयोग करते हैं, तो इस जोखिम का जोखिम बहुत तेजी से बढ़ जाता है और आप इस रोग का शिकार हो जाते हैं।
धूम्रपान करने से न सिर्फ आपका मुंह बल्कि गला और नलिका भी प्रभावित होती है साथ ही प्रभावित होता है आपका पाचन तंत्र भी। धूम्रपान एसोफैगस और पैन्क्रियाटिक कैंसर दोनों को नुकसान पहुंचाने का काम करता है। यहां तक कि वे लोग, जो धूम्रपान करते हैं लेकिन श्वास नहीं लेते हैं उन्हें मुंह के कैंसर का जोखिम बढ़ जाता है। इसके अलावा, धूम्रपान इंसुलिन को भी प्रभावित करता है, जिससे धूम्रपान करने वालों में इंसुलिन रेजिस्टेंस का भी शिकार हो जाते हैं। ये दोनों चीजें डायबिटीज और उससे संबंधित जटिलताओं का खतरा बढ़ा देती हैं।
धूम्रपान करने से आपके पूरे कार्डियोवैस्कुलर सिस्टम को नुकसान पहुंचाता है। जब आप निकोटिन का सेवन करते हैं तो यह रक्त वाहिकाओं को सिकोड़ने का काम करता है, जिससे रक्त का प्रवाह बाधित होता है। समय के साथ-साथ, रक्त वाहिकाओं के लगातार सिकुड़ने और क्षतिग्रस्त होने से पेरिफेरल आर्टरी डिजीज हो सकती है। इसके अलावा धूम्रपान करने से ब्लड प्रेशर की समस्या भी हो जाती है और आपकी नसें कमजोर हो जाती है और नसों में रक्त के थक्के बढ़ जाते हैं, जो स्ट्रोक का कारण बन सकते हैं।