कोविड रोगियों को अल्जाइमर से बचने के लिए इलाज के साथ-साथ रखना चाहिए इन 4 बातों का ख्याल, तेज और दुरुस्त रहेगी याददाश्त

ब्राज़ील के एक अध्ययन के अनुसार अल्जाइमर के मरीज़ को कोविड संक्रमण के कारण मृत्यु का तीन गुना अधिक जोखिम होता है।

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Written By: Jitendra Gupta | Published : September 21, 2021 1:59 PM IST

दुनिया भर में कोविड महामारी ने अपनी शुरुआत से ही न केवल संक्रमण के अनुसार हमारी जिंदगी को बदल दिया है बल्कि पहले से गंभीर बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए भी चुनौतियां कड़ी कर दी है। एक अल्जाइमर के गंभीर मरीज़ को आमतौर पर तनाव, गुस्सा, चिडचिडापन आदि का अतिरिक्त जोखिम रहता है ऐसे में उन्हें किसी सहायक की और हरेक स्तर पर देखभाल की ज़रूरत होती है। इसमें कोई शक नहीं कि कोविड महामारी के दौरान अल्जाइमर के जूझ रहे लोगों का इलाज व्यापक स्तर पर प्रभावित हुआ है। और साथ ही कोविड संक्रमण भी उनके लिए आम व्यक्ति से ज्यादा जोखिम भरा साबित हो सकता है। ब्राज़ील के एक अध्ययन के अनुसार अल्जाइमर के मरीज़ को कोविड संक्रमण के कारण मृत्यु का तीन गुना अधिक जोखिम होता है।

कोविड के दौरान अल्जाइमर रोगी को क्या नुकसान

कोविड के दौरान उनकी क्या चुनौतियां रहीं बता रहें हैं धर्मशिला नारायणा सुपरस्पेशेलिटी अस्पताल के सीनियर कंसल्टेंट, न्यूरोलॉजी डॉक्टर अमित श्रीवास्तव बताते हैं कि हाल ही में यूके में हुए एक अध्ययन (यूके बायोबैंक स्टडी जो कि 40,000 प्रतिभागियों पर की गई) ने कोविड होने के बाद लगातार स्कैन की मदद से मस्तिष्क में हुई क्षति (मस्तिष्क की कोशिकाओं को क्षति) के साक्ष्य पाए।

उन्होंने कहा कि ये मरीज डिमेंशिया के लक्षण वाले या डिमेंशिया के ऐसे मरीज़ थे जिनकी समझने की क्षमता में अचानक गिरावट की शिकायत थी। साथ ही कोविड सम्बंधित नियमों के कारण लम्बे समय तक आइसोलेशन ने, ख़ासकर अस्पतालों में रहने वाले अल्जाईमर के मरीजों पर बहुत गहरा असर डाला है। इसके अलावा व्यापक कारणों और रुकावटों के कारण से बहुत

से मरीजों का इलाज बीच में रुक गया था और कुछ समय बाद दोबारा से शुरु किया जिसका उनके रोग पर असर होना स्वाभाविक है।

अभी के दौर में अल्जाइमर के रोग की स्थिति के बारे में बता रहे हैं नई दिल्ली स्थित श्री बालाजी एक्शन मेडिकल इंस्टिट्यूट के सीनियर कंसलटेंट, न्यूरोलॉजिस्ट, डॉक्टर राजुल अग्रवाल का कहना है कि अल्जाइमर के सन्दर्भ में अभी के दौर को देखते हुए तो पहलुओं पर विशेष रूप से नज़र डालना जरूरी है:-

1-युवा से ज्यादा बुजुर्ग

जनसंख्या का बहुत बड़ा हिस्सा उम्र की ढलान की ओर जा रहा है। यानी वरिष्ठ नागरिकों की संख्या में इज़ाफ़ा हो रहा है जिसके परिणामस्वरुप ज्यादा लोगों के अल्जाइमर के जोखिम में आने की संभावना है।

2-याददाश्त हो रही कम

दूसरा महत्वपूर्ण पहलू यह है कि कोविड संक्रमण के आने के बाद से अल्जाइमर के बहुत से मारीज़ों में याददाश्त जाने की प्रक्रिया तेज़ होती देखी जा रही है, क्योंकि कोविड का संक्रमण निश्चित न्यूरोलॉजिकल सिस्टम को व्यापक रूप से प्रभावित करने की क्षमता रखता है। यह कहा जा सकता है कि आने वाले समय में अल्जाइमर के मरीज़ों की संख्या व्यापक रूप से बढ़ने की सम्भावना है।

3-पहले से रहता है कई दूसरे रोगों का खतरा

अल्जाइमर के मरीज़ को पहले से ही निमोनिया जैसे संक्रमण से भी अतिरिक्त रूप से जोखिम होता है, ऐसे में कोविड का संक्रमण इनके लिए ज्यादा घातक हो सकता है। इसलिए ज़रूरी है कि लगातार इलाज के साथ साथ इन मरीज़ों का कोविड के संक्रमण से बचाव अतिरिक्त सावधानी के साथ किया जाए।

अल्जाइमर मूल रूप से कैसी बीमारी है और कोविड का इस पर क्या प्रभाव है इस पर व्यापक चर्चा कर रहे हैं गुरुग्राम स्थित नारायणा सुपरस्पेशेलिटी अस्पताल के कंसल्टेंट, न्यूरोलॉजी डॉक्टर साहिल कोहली।

डॉ. कोहली के मुताबिक, अल्जाइमर का सीधा संबंध व्यक्ति की याददाश्त, सोचने समझने की क्षमता और व्यवहार से होता है। शुरुआती स्टेज में इसके लक्षण मामूली नज़र आ सकते हैं, लेकिन जैसे जैसे बीमारी मस्तिष्क में क्षति पहुँचाना शुरू करती है, लक्षण गंभीर होते जाते हैं। रोग के गंभीर होने की गति हरेक व्यक्ति में अलग हो सकती है। लेकिन आम तौर पर अल्जाइमर

के साथ लोग लक्षण इखने के बाद 8 साल बाद तक जीवित रह सकते हैं, और यह सीमा 20 वर्ष तक भी जा सकती है।

कितना घातक है अल्जाइमर रोग

भारत में 4 मिलियन से ज्यादा लोग डिमेंशिया से जूझ्र रहे हैं। विश्व में ऐसे मरीजों की संख्या 44 मिलियन है, वैश्विक रूप से या बीमारी एक ग्लोबल हेल्थ क्राइसिस के रूप में सामने आ रही है जिसे और भी गंभीरता से लिया जाना चाहिए। अल्जाइमर एक बहुत आम डिमेंशिया का प्रकार है और इसके 60 से 70 फ़ीसदी मामलों में नज़र आता है।

आंकड़े यह भी कहते हैं कि यह साल 2030 तक भारत में दोगुना हो जाएगा और साल 2050 में तिगुना। इसके आम लक्षण :-

1- याददाश्त का कमज़ोर होता जाना जिसके कारण दैनिक जीवन बहुत प्रभावित होता है, महत्वपूर्ण तारीखें भूलने से लेकर एक ही जानकारी बार बार मांगना आदि।

2- एकाग्रता में कमी और पहले के मुकाबले कामों को करने में देर लगाना।

3- योजनायें बनाने, आंकड़ों आदि के साथ काम करने में बहुत ज्यादा समस्या का सामना करना।

4- घर के आम कामों को भी करने में समस्या का सामना करना, घर के आस पास तक जाने में भी रास्ते याद न रहना।

5- पढ़ने, आंकलन करने, दूरी मापने, रंगों की अलग पहचान करने आदि में समस्या आना।

6- बोलने, लिखने, बातचीत में हिस्सा लेने या जारी रखने शब्दों के चयन में दिक्कत आना।

7- चीज़ें रखकर भूलना, ढूंढ न पाना।

8-सामाजिक गतिविधियों से दूरी बना लेना। ऐसे लोग अपने शौक, खेल, पारिवारिक आयोजनों आदि से भी दूरी बना लेते हैं।

9- मूड, व्यक्तित्व में बदलाव आना. कन्फ्यूज्ड, शक्की हो जाना, तनाव में चले जाना, यहाँ तक कि डरे हुए रहना ।

सही इलाज के लिए है ज़रूरी :-

1- सही समय पर डायग्नोसिस

2- बेहतर क्रियाकलापों में मन लगाना

3- व्यवहार और लक्षणों पर काम करना

4- देखभाल करने वाले व्यक्ति की उपस्थिति

कोविड और अल्जाइमर :-

बहुत से अध्ययनों में पाया गया है कि कोविड संक्रमण के कारण भूलने की समस्या, क्रियान्वयन में दिक्कतें आदि जैसी जटिलताएं भी आ सकती हैं। साथ ही अन्य अध्ययन बताते हैं कि कोविड अल्जाइमर से जुड़े लक्षणोंको और गंभीर बना सकता है। क्लीवलैंड में हुए एक अध्ययन में वायरस और अल्जाइमर से सम्बंधित प्रोटीन/जींस जैसे डिमेंशिया के बीच संबंध पाया गया। हलांकि इनकी अंतिम पुष्टि के लिए और भी शोध व अध्ययन की ज़रूरत है और समय के साथ चीज़ें और साफ़ तौर पर सामने आएंगी।

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