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सर्वाइकल कैंसर को सबसे जानलेवा कैंसर माना जाता है और बहुत सी महिलाएं बिना इलाज के ही दम तोड़ देती हैं। भारत सहित दुनियाभर में ये कैंसर एक प्रकार का चिंता का विषय है। ये कैंसर 15 साल की उम्र में ही महिलाओं का अपना शिकार बनाना शुरू कर देता है और इस उम्र से ही महिलाओं को सर्वाइकल कैंसर होने का खतरा रहता है। सर्वाइकल कैंसर यूट्रस के निचले भाग में होता है, जो कि वजाइना में जाकर खुलता है। वजाइना में खुलने के कारण ही इसे सर्विक्स कहा जाता है। यह कैंसर तब होता है जब सर्विक्स में कोशिकाएं आसामान्य रूप से बढ़ने लगती है और नियंत्रण से बाहर हो जाती है। लेकिन यह बात बहुत कम लोगों को पता है कि अगर इस कैंसर की पहचान शुरुआत में पता चल जाए तो इसे होने से रोका जा सकता है।
पैप टेस्ट से सर्विक्स में असामान्य कोशिकाओं का पता लगाया जाता है अगर इस टेस्ट को नहीं किया गया और शुरुआत में इसका पता नहीं चला तो यह कैंसर लाइलाज हो जाता है। डॉक्टर आपको डायल्यूट एसेटिक सोल्यूशन (सिरका का सोल्यूशन) सर्विक्स तक करने के लिए कह सकता है इस सोल्यूशन से सर्विक्स का असामान्य भाग सफेद हो जाता है। इसके बाद प्रभावित जगह पर बायोप्सी की जाती है।
ये वायरस मुख्य रूप से जननांग से ट्रांसमिट होता है यह जननांग की त्वचा से संपर्क करने से फैलता है। ऐसा जरूरी नहीं है कि बिना सम्भोग किये ही वायरस आपको संक्रमित करेगा। इसलिए यह जरूरी है कि आप सभी सुरक्षा का पालन करें। लेकिन, यह अभी भी स्पष्ट नहीं हो पाया है कि क्या सुरक्षा निर्देशों को पालन करने से महिलाएं एचपीवी से संक्रमित होने से पूरी तरह से बची रहती है। बिना सम्भोग किये हुए वायरस ट्रांसमिट हो सकता है, विशेषज्ञों ने इस तरह के वायरस ट्रांसमिशन को देखा है। यह महिलाओं में स्वच्छता की कमी के कारण हो सकता है। सर्वाइकल कैंसर होने के अन्य प्रत्यक्ष फैक्टर में शामिल हैंः
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भारत में 2050 तक 50,000 सर्वाइकल कैंसर के केसेस को खत्म करने का लक्ष्य रखा है। इस उद्देश्य को पूरा करने के लिए जल्द से जल्द सामूहिक वैक्सीनेशन प्रोग्राम को शुरू करने की जरुरत है। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि 90% लड़कियों को 15 वर्ष की उम्र तक और 70% महिलाओं को 35 वर्ष उम्र तक एचपीवी वैक्सीन लग जाए और उनकी स्क्रीनिंग हो जाए।
सर्वाइकल कैंसर महिलाओं में होने वाला सबसे ज्यादा जानलेवा और खतरनाक कैंसर है। एचपीवी स्ट्रेंन के 150 से ज्यादा टाइप हैं जिनमे से दो सबसे शक्तिशाली टाइप हैं- पहला है एचपीवी -16 और दूसरा है एचपीवी -18, इन्हीं से सर्वाइकल कैंसर होता हैं।
एचपीवी एचआईवी की तुलना में ज्यादा वायरल है क्योंकि यह केवल प्रोटीन और डीएनए से बना होता हैं और इसका कोई एनवेलप भी नहीं होता है, जिसकी वजह से इसे ख़त्म करना थोड़ा मुश्किल हो जाता है। इसलिए इसे केवल वैक्सीनेशन के माध्यम से ही ख़त्म किया जा सकता है। एचपीवी वैक्सीन पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं लेकिन लोगों में इसके बारे में ज्यादा जागरूकता नहीं है। उपलब्धता के बावजूद वैक्सीन को लगवाने वाले बहुत ही कम लोग है। इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि महिलाएं अक्सर अपने स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की अनदेखी करती हैं।