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Written By: Jitendra Gupta | Published : May 24, 2023 6:40 PM IST
Image credits by: 4 तरह की जांच से पता चल सकता है हाइपो और हाइपरथायराइडज्म! एक्सपर्ट से जानें थायराइड के दोनों प्रकार के लक्षण
थायराइड एक ऐसी समस्या जिससे इस दौर में तमाम लोग परेशान हैं। इसके लक्षण इतने सामान्य होते हैं कि आप उन्हें गंभीरता से ले नहीं पाते। जबकि यदि आप इसके लक्षणों को पहले से समझ जाएं और तो समय रहते इसकी रोकथाम कर सकते हैं। दिल्ली के धर्मशिला नारायणा सुपरस्पेशलिटी अस्पताल में एंडोक्रिनोलॉजिस्ट और डायबेटोलॉजिस्ट, डॉ. के.एस. बरार का कहना है कि अगर आपको अत्यधिक थकान हो रहा है, बालों के झड़ने की समस्या है, महिलाओं में पीरियड का समय से न आना, मानसिक तनाव, शरीर में पसीने की समस्या और बार बार भूख लगना आदि कुछ लक्षण हैं जो सामान्य तौर पर हर किसी के साथ होते ही रहते हैं और अगर आपके ये लक्षण बढ़ते ही जा रहे हैं तब आपका समय रहते इलाज कराना आवश्यक हो जाता है। यही थायराइड के लक्षणों की पहचान है। हालांकि थायराइड विकार की समस्या पुरुषों से ज्यादा महिलाओं में देखने को मिलती है।
इसके लक्षण अधिकतर महिलाओं में दिखाई देते हैं दुनिया भर की हर 8 में 1 महिला में ये लक्षण पाये जाते हैं। एक आंकड़ें के मुताबिक विश्व की 60% महिलाओं में ये समस्या पाई जाती है और वे इन लक्षणों से अनजान हैं। थायराइड प्रमुख तौर पर दो प्रकार की होती है-
हाइपरथायराडिज्म में थायराइड हार्मोंन अत्यधिक मात्रा में बनने लगते हैं। इसके लक्षण सामान्य हैं जैसे
1-शरीर का वजन कम होना
2-मन में घबराहट या चिंता होना
3- मन में बेचैनी
4-अचानक मूड बदलना
5- घेंघा रोग
6-थकान
7- सांस फूलना
8- दिल की धड़कन तेज होना
9- नींद कम आना
10- शरीर में ज्यादा गर्मी लगना
11- अधिक प्यास लगना
12- बालों का झड़ना
13- आंखों में लालपन या फिर सूखापन होना
हाइपरथायराडिज्म स्पष्ट कारणों की अभी तक पता नहीं चल सका है और इसी वजह से इसके रोकथाम में दिक्कतें आ रही है। हालांकि इसके बचाव के लिए तनाव और धूम्रपान की लत है तो उसे दूर करना चाहिए साथ ही संतुलित आहार लेने से हाइपरथायराडिज्म के खतरे को कम किया जा सकता है।
हाइपरथायराडिज्म में अगर सही समय पर जांच करा लिया गया तो फिर इलाज में मदद मिलती है। इसमें मरीज के परिवार के बारे में पूछा जाता है ये पता लगाने के लिए कि ये अनुवांशिक है या नहीं फिर मरीज के गर्दन के हिस्सेकी जांच की जाती है। हाइपरथायराडिज्म की जांच कई प्रकार से की जाती हैः
• खून की जांच की जाती है जिसमें मरीज का टीएसएच लेवल, टी3 और टी4 लेवल चेक किया जाता है।
• थायराइड ग्रंथी के द्वारा आयोडीन के इस्तेमाल की न्यूक्लियर इमेजिंग की जाती है।
• मरीज के आंखों की जांच की जाती है।
• मरीज के ग्रंथी पर असमान्य गांठ की जांच की जाती है।
दवाओं और सर्जरी के माध्य में हाइपरथायराडिज्म के लिए उपचार किया जाता है।
•हाइपरथायराडिज्म के उपचार के लिए कई प्रकार की दवाएं हैं जिन्हे खाने की सलाह दी जाती है जैसे रेडियोएक्टिव आयोडीन एबलेशन, थायराइड रोधी दवाएं जैसे निओमरकाजोल और सूजन रोधी दवाएं दी जाती हैं जिससे इन लक्षणों से राहत मिल सके।
• इसमें सर्जरी के माध्यम से थायराइड ग्रंथि के प्रभावित हिस्से को निकाला जाता है।
• आंखों का सूखापन दूर करने के लिए आर्टिफिशियल टियर्स का इस्तेमाल किया जाता है।
इसमें थायराइड ग्रंथी सामान्य से कम मात्रा में हार्मोन का स्राव करती है। इसके भी लक्षण सामान्य ही होते हैं बस अंतर हाइपरथायराइड के लक्षण से थोड़ा अलग होता है जैसे- शारीरिक थकान बना रहना, वजन का बढ़ना, त्वचा में रूखापन, बोलों के झड़ने की समस्या, नाखूनों का कमजोर होना, ज्यादा सर्दी लगना, अवसाद, गला बैठना, मांसपेशियों में अकड़न होना, मानसित तनाव का होना आदि
हाइपोथायराइडिज्म की प्रमुख वजह अनुवांशिक और हार्मोनल है जिसकी वजह से इसे रोकना कठिन है। फिर भी अगर संतुलित आहार अपनाया जाए और पर्याप्त मात्रा में आयोडीन की मदद से हाइपोथायराइडिज्म पर रोक लगाई जा सकती है।
हाइपोथायराइडिज्म की जांच मरीज के लक्षण के आधार पर की जाती है। इस स्तर क्या है ये जानने के लिए चिकित्सीय परीक्षण और टेस्ट भी किये जाते हैं। इसमें खास तौर अनुवांशिक कारणों का भी पता लगाना आवश्यक होता है। हाइपोथायराइडिज्म की जांच निम्न तरीकों से की जाती है-
• मरीज के खून की जांच की जाती है और उसके खून का टीएसएच लेवल, टी3 और टी4 लेवल चेक किया जाता है।
• मरीज के थायराइड ग्रंथि का अल्ट्रासाउंड किया जाता है।
दवाओं और जीवनशैली में बदलाव के माध्यम से हाइपोथायराइडिज्म पर लगाम लगाया जा सकता है।
• हाइपोथायराइडिज्म का सबसे सामान्य उपचार नियमित थायरोक्सिन की खुराक है। इसका इलाज जैसे ही शुरू हो नियमित खून की जांच करानी चाहिए ताकि खून के हार्मोन लेवल के अनुसार खुराक में बदलाव करके इसे जड़ से खत्म किया जा सके। हाइपोथायराइडिज्म के इलाज में कई आयुर्वेदिक दवाएं असरदायक होती हैं आप अपने चिकित्सक से आयुर्वेदिक दवाओं के इस्तेमाल और खुराक के बारे में बात कर सकते हैं। इसमें आप योग और अपनी जीवनशैली में बदलाव कर के भी लाभ पा सकते हैं
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