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कोरोना के हल्के लक्षणों को गंभीर बना देते हैं ये 4 कारण, अच्छा भला इंसान गंवा सकती है अपनी जान
दिल्ली-एनसीआर जैसे इलाकों में जिस तरह के कोरोना को लेकर हालात है उससे ये अंदाजा लगाया जा सकता है कि संभावित रूप से कोरोना की तीसरी लहर ने हम सभी को घेर लिया है। हाई पॉजिटिविटी रेट होने के कारण अस्पतालों में फिर से मरीजों की तादात बढ़ रही है और लोगों के लिए बेड खोजना भी मुश्किल हो रहा है। ये हाल सिर्फ दिल्ली का नहीं है बल्कि महामारी की चपेट में आए कई शहरों का भी कुछ यही हाल है। हल्के और मामूली लक्षण वाले मामले कुछ लोगों के लिए गंभीर साबित हो रहे हैं।
बता दें कि कोरोना के 80 फीसदी से अधिक मामले प्रकृति में हल्के होते हैं लेकिन अस्पताल में भर्ती होने की दर और कोरोना के गंभीर मामलों ने मेडिकल एक्सपर्ट की चिंता बढ़ा दी है। ज्यादा हैरानी वाली बात यह है कि इनमें से कई अस्पताल में भर्ती होने के मामले 20-40 वर्ष के बीच के स्वस्थ आयु वर्ग के हैं। इस लेख में हम आपको ऐसे चार कारणों के बारे में बता रहे हैं, जो कोरोना के हल्के लक्षणों को गंभीर बनाने का काम करते हैं, जिससे आपका स्वास्थ्य खतरे में है। तो आइए जानते हैं इन चार कारणों के बारे में।
साइटोकिन स्टोर्म कोरोना संक्रमण के सबसे खतरनाक परिणामों में से एक बना हुआ है। यह आपके कोरोनावायरस संक्रमण को बढ़ाने का एक साइलेंट संकेत हो सकता है और आपके हल्के लक्षणों को गंभीर बना सकता है। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, वे कोरोना रोगी, जो साइटोकिन स्टोर्म का अनुभव करते हैं, उनमें बुखार, हल्का सिरदर्द और दौरे पड़ सकते हैं और आप पहले की तुलना में बहुत अधिक बीमार हो सकते हैं।
साइटोकिन स्टोर्म एक ऐसी स्थिति हैं, जिसमें आपका इम्यून सिस्टम आपकी हेल्दी कोशिकाओं पर ही हमला कर देता है और आपको बीमार बना देता है।
कोरोना वायरस से सबसे अधिक प्रभावित अंगों में से एक अंग है हमारा श्वसन तंत्र। यह वायरस फेफड़ों को ऑक्सीजन की आपूर्ति को नुकसान पहुंचा सकता है और सांस की तकलीफ और सांस लेने में कठिनाई जैसे लक्षणों को प्रेरित कर सकता है। 90 से नीचे के ऑक्सीजन स्तर को चेतावनी संकेत माना जाता है।
कई मामलों में, बाहर मौजूद पर्यावरणीय कारक भी कोरोना के लक्षणों को बढ़ाने का काम कर रहे हैं। प्रदूषण का संकट, ठंडा तापमान श्वसन संबंधी विकारों को बढ़ा रहा है। क्रॉनित समस्याओं से पीड़ित लोगों के लिए, कोरोना की मामूली मामला भी समस्याग्रस्त हो सकती है।
वहीं वायु प्रदूषण भी हमारे फेफड़ों को नुकसान पहुंचाने का काम करता है, इम्यूनिटी को कमजोर बनाता है और सूजन को बढ़ाने का काम करता है। कोरोना से संबंधित मृत्यु दर में वृद्धि के लिए भीषण वायु प्रदूषण जिम्मेदार रहा है।
कोरोना वायरस जैसी घातक महामारी को 11 महीने हो चुके हैं लेकिन इसके लक्षणों की प्रकृति अभी भी लोगों को भ्रमित कर रही है, जिसके कारण उन्हें ठीक होने का समय बढ़ रहा है। साधारण फ्लू जैसे संक्रमण का इलाज करने वाले लोग भी संक्रमण के बिगड़ने का कारण हो सकते हैं। वहीं इलाज में देरी भी कई मामलों को बिगाड़ने का काम कर रही है, जो कि स्वस्थ लोगों को भी गंभीर कोरोना की चपेट में ले रही है।