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हाई ब्लड शुगर बढ़ने पर इन 3 इंफेक्शन का खतरा सबसे ज्यादा, 25 फीसदी लोग तीसरे इंफेक्शन से परेशान
डायबिटीज एक ऐसी स्वास्थ्य स्थिति है, जो आपके स्वास्थ्य को कई तरीकों से प्रभावित करती है और कई अंगों को नुकसान पहुंचाती है। ब्लड शुगर लेवल का बढ़ना सीधे तौर पर आपके शरीर के कई अंगों को प्रभावित करता है और ढेर सारी दूसरी स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बनता है। अगर आप सही समय पर उपचार नहीं कराते हैं या फिर स्थिति को यूं ही नजरअंदाज करते रहते हैं तो ये आपको अंगों को नुकसान पहुंचाने के साथ-साथ नसों के लिए भी हानिकारक हो सकती है। आप चाहें टाइप-1 या फिर टाइप-2 डायबिटीज से परेशान हों इसके लक्षण बिल्कुल समान ही होते हैं और ढेर सारी परेशानियों का कारण बनती है। कुछ स्थितियों में ये शरीर में इंफेक्शन का भी कारण बनता है, जिसका पता आपको देर से ही चलता है। आइए जानते हैं डायबिटीज होने पर शरीर में कहां-कहां इंफ्केशन हो सकता है।
यीस्ट इंफेक्शन शरीर के किसी भी अंग पर होने वाला इंफेक्शन है, जैसे आपकी बगल, उंगली, मुंह और फिर प्राइवेट पार्ट। इस स्थिति से परेशान महिलाओं को रुई जैसा व्हाइट डिस्चार्ज होता है। डायबिटीज की बात करें तो आमतौर पर पुरुषों और महिलाओं के प्राइवेट पार्ट के आस-पास रैशेज हो जाते हैं, जिसके कारण पेशाब करते समय खुजली, जलन, खराश और चुभन जैसा महसूस होता है। यीस्ट इंफेक्शन से परेशान पुरुषों को पेशाब के वक्त गंध का अनुभव हो सकता है और स्किन में एक प्रकार का रूखा पन होता है, जिसके खींचने पर दर्द होता है। यीस्ट इंफेक्श को एक प्रकार का फंगस भी कहते हैं, जिसे कैंडिडा कहा जाता है और ये गर्म व नम परिस्थितियों में बढ़ता है।
डायबिटीज से पीड़ित लोगों को पेशाब में जलन होने लगती है, जो कि मूत्राशय में सूजन के रूप में भी जानी जाती है और मेडिकल की भाषा में इसे सिस्टिटिस भी कहते हैं। ये एक प्रकार का यूटीआई है। इस स्थिति से पीड़ित लोगों के ब्लैडर वॉल और लुमेन के भीतर हवा भर जाती है। सामान्य रूप से होने वाले यूटीआई में व्यक्ति को पेशाब करते समय दर्द, जलन या चुभन जैसा महसूस होता है। इसके अलाव बार-बार पेशाब जाने की इच्छा होना और गाढ़े रंग का पेशाब और पेशाब से तेज बदबू आना भी अन्य लक्षणों में शामिल हो सकता है। इतना ही नहीं व्यक्ति को पेट के निचले हिस्से में दर्द का अनुभव भी हो सकता है। यूटीआई के हल्के लक्षण अपने आप ही दूर हो जाते हैं लेकिन गंभीर मामलों में डॉक्टरी सलाह बहुत ही जरूर होती है।
अगर आप डायबिटीज का इलाज नहीं कराते हैं तो ये आपके पैरों में इंफेक्शन का भी कारण बन सकती है। ये पैरों के सॉफ्ट टिश्यू और उनके नीचे मौजूद हड्डी को प्रभावित करता है और स्किन खराब होने लगती है। 15 से 25 फीसदी डायबिटीज से पीड़ित लोगों को पैरों में इंफेक्शन जैसी समस्या होती है। सामान्य से गंभीर इंफेक्शन के जख्म एंटी-बायोटिक लेने पर ठीक हो जाते हैं लेकिन अगर इलाज न किया गया तो इंफेक्शन के दोबारा होने का जोखिम और खतरा बढ़ने की संभावना रहती है।
1- ब्लड शुगर को लेवल पर नजर रखें और समय पर दवा लें। अगर आपका ब्लड शुगर लेवल कंट्रोल में रहेगा तो इंफेक्शन का खतरा कम होगा।
2-उचित स्वच्छता बनाए रखें।
3-थक्कों और खरोंच से बचें। इसके लिए मोजे पहनें और अपने घाव का अच्छी तरह से इलाज करें।
4-योनि संक्रमण के लिए उचित शौचालय स्वच्छता का पालन करें।
5-संबंध बनाने के बाद पेशाब करें और ब्लैडर को खाली रखें।
6- एक दिन में पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं।