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उप्र के मथुरा में फूड पॉइजनिंग से 2 मासूमों की मौत, सेप्टिक शॉक की संभावना

मथुरा में खाद्य विषाक्तता के कारण बारह बच्चे बीमार हो गए, जिनमें से दो की जान चली गई। बच्चों को डी-हाईड्रेशन और सेप्टिक शॉक की शिकायत भी बताई जा रही है।

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Written By: Yogita Yadav | Published : August 30, 2019 2:49 PM IST

उत्तर प्रदेश के मथुरा में राजकीय बाल गृह (शिशु) में फूड पॉइजनिंग के कारण दो मासूमों की जान (septic shock) चली गई, जबकि दस बच्चे अभी अस्पताल में भर्ती हैं। तीन दिन से दो साल के बच्चे और छह माह की एक बच्ची की उल्टी और दस्त से हालत खराब थी। मथुरा के जिलाधिकारी सर्वज्ञ राम मिश्रा ने कहा, "खाद्य विषाक्तता के कारण बारह बच्चे बीमार हो गए, जिनमें से दो की जान चली गई।" उन्होंने 24 घंटे के भीतर रिपोर्ट मांगी है। बच्चों को डी-हाईड्रेशन और सेप्टिक शॉक (septic shock) की शिकायत थी।

दो साल से छोटे हैं बच्‍चे 

उन्होंने कहा कि यह खाद्य विषाक्तता का मामला प्रतीत होता है। ये बहुत छोटे बच्चे हैं इसलिए उचित देखभाल की जानी चाहिए थी, और उच्च अधिकारियों को जल्दी से सतर्क होना चाहिए था। मिश्रा ने कहा, कर्मचारियों ने कुछ लापरवाही की है। मामला हमारे संज्ञान में लाया जाना चाहिए। जांच का आदेश दिया गया है। उन्होंने 24 घंटे के अंदर मामले पर रिपोर्ट मांगी है। उन्होंने कहा कि जो भी दोषी होंगे उनसे कड़ाई से निपटा जाएगा।

देखभाल में हुई लापरवाही

ज्ञात हो कि दस बच्चे अभी भी जिंदगी और मौत (septic shock) से जूझ रहे हैं। इनमें चार आगरा और छह मथुरा जिला अस्पताल में भर्ती हैं। मामले की जांच एडीएम फाईनेंस को सौंपी गई है। राजकीय बाल गृह (शिशु) में 50 बच्चे हैं। इनमें दो साल से कम आयु के 20 बच्चे हैं। यहां तीन दिन पहले बच्चों को उल्टी-दस्त की शिकायत होनी शुरू हुई।

डी-हाईड्रेशन और सेप्टिक शॉक की शिकायत 

बच्चों को डी-हाईड्रेशन और सेप्टिक शॉक (septic shock) की शिकायत थी। इस दौरान दो वर्षीय गोपाल और छह माह की अंशिका की हालत बिगड़ी। शिशु गृह के जिम्मेदारों ने पहले इसे हल्के में लिया। हालत बिगड़ने पर दोनों को आगरा के एसएन मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया, जहां दोनों की मौत हो गई।

क्‍या है सेप्टिक शॉक (septic shock)

जब शरीर के टिश्यूज में इन्फेक्शन फैल जाता है तो इससे लड़ते हुए शरीर के अन्य अंगों को भी नुकसान पहुंचता है। इन्फेक्शन कंट्रोल न हो पाए तो यह स्थिति सेप्टिक शॉक (septic shock) में बदल जाती है। ऐसे में दवाइयों का असर पहले की तुलना में कम हो जाता है। रक्त में इन्फेक्शन फैल जाता है। यह स्थिति इतनी घातक है कि इसमें कई बार बच्चे की जान भी चली जाती है।

सेप्टिक शॉक के लक्षण (septic shock)

  • बच्चे का सुस्त होना
  • चेहरे पर पीलापन या सफेद होना
  • सांस लेने में तकलीफ या बेहोश होना
  • पेशाब करने में दिक्कत होना
  • पेट खराब रहना
  • पीलिया होना या उल्टी आना ये हैं बीमारी फैलने के कारण
  • हाईजीन व सफाई नहीं रखना
  • एक मरीज से दूसरे में फैलना
  • खांसी या सांस या छींक से दूसरों में होना
  • बीमारी होने पर लापरवाही बरतना
  • डॉक्टर्स को नहीं दिखाना
  • यह बीमारी सांस या खांसी से भी दूसरों बच्चों में फैल सकती है।

अपनाएं ये उपाय (septic shock)

अकसर साफ सफाई न रखने  या दूषित भोजन-पानी के कारण बच्‍चों में इंफेक्‍शन (septic shock causes) हो जाता है। इसलिए जरूरी है कि इस स्थिति से बचा जाए। बच्‍चों को अगर उल्‍टी या दस्‍त होते हैं तो उन्‍हें लिक्विड डाइट देते रहें और फौरन डॉक्‍टर को दिखाएं।

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