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ठंडे-गर्म मौसम में बच्चों और बूढ़ों को होती हैं ये 2 परेशानियां, एक्सपर्ट से जानें बचाव के आसान उपाय
बदलता मौसम हम सभी के लिए परेशानी लेकर आता है और इस बात को सभी जानते हैं। जैसे-जैसे फरवरी का महीना शुरू होगा वैसे-वैसे ठंड का मौसम हल्का होना शुरू हो जाएगा। भले ही कम होता स्मॉग लोगों की सुबह की सैर व गुनगुनी धूप का मजा बढ़ा दे लेकिन प्रदूषक तत्व हवा की परत में अभी भी बने हुए हैं, जिसके कारण खुली हवा में अचानक सांस लेना और बिना सुरक्षा के कोई गतिविधि करना किसी भी तरह से सही नहीं रह गया था। स्वास्थ्य की दृष्टि से इन सर्दियों में बेहद सावधानियां बरतने की आवश्यकता है, खासकर बुजुर्गों और बच्चों के विषय में। ठंड में आलस और कठिनाइयों के चलते इन दिनों में समाज इन दोनों वर्गों की जीवनशैली में तेज़ी से बदलाव आते हैं। एक ओर बच्चे जहां खेल कूद में कमी कर देते हैं वहीँ बुजुर्गों में कई तरह के संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है, जोड़ों व शरीर के कई भागों में दर्द की शिकायत रहती है। क्योंकि ये दोनों वर्ग ही देखभाल के मामले में बहुत हद तक युवाओं पर निर्भर होते। आइए जानते हैं बदलते मौसम में बच्चों और बूढ़ों को होने वाली परेशानियां।
सर्दियों में बढ़ते हृदयरोग के जोखिम के विषय पर प्रकाश डाल रहे हैं डॉक्टर मितेश बी शर्मा, डायरेक्टर एंड सीनियर कंसल्टेंट, सीटीवीएस, धर्मशिला नारायणा सुपरस्पेशेलिटी अस्पताल:-
यहां यह भ्रम दूर करने की ज़रूरत है कि सर्दियों में केवल खांसी जुकाम, फ्लू आदि ही हो सकता है। सर्दियों में मौसम के अनुकूल मानव शरीर में कुछ अन्य बदलाव होते हैं जिनसे बहुत सी अन्य बड़ी बीमारियों का भी जन्म होता है। ज़रूरी है की इन तमाम बीमारियों के बारे में जानकारी बढाई जाये और उसकी रोकथाम के उपाय किये जाएं।
बढ़ता है हृदयरोग का जोखिम:- दरअसल सर्दियों में मौसम की वजह से रक्त की नसों में सिकुड़न आती है जिसकी वजह से हृदय की और जाने वाली रक्त वाहिकाओं में रक्त संचालन प्रभावित होता है। परिणामस्वरूप स्ट्रोक व हृदयरोग का खतरा बढ़ जाता है, ऐसे में जो लोग पहले से ही किसी प्रकार से हृदयरोग से ग्रसित हैं वे अपने सुरक्षा की दृष्टि से अपने ऊपर विशेष ध्यान दें। बच्चों को सही से गर्म कपड़े पहना कर रखें, बाहर से खेलकर आते ही तुरंत कपड़े न बदलने दें। बच्चों को खूब खेलने और बुजुर्गों को हल्के फुल्के व्यायाम के लिए प्रोत्साहित करें ताकि शरीर में रक्तचाप सामान्य बना रहे और रक्त वाहिकाएं सुचारू रूप से काम करतीं रहें।
सर्दियों में पेशाब संबंधी समस्याएं भी सामने आतीं हैं जिसके बारे में विस्तार से बता रहे हैं डॉक्टर अतुल गोस्वामी, चीफ एंड सीनियर कंसल्टेंट, यूरोलॉजी एंड केटीयू, श्री बालाजी एक्शन मेडिकल इंस्टिट्यूट :-
किडनी व पेशाब संबंधित समस्याएं:- सर्दियों में मौसम की वजह से शरीर में कम पसीना आता है, और शरीर की तरलता बार बार पेशाब आने से बैलेंस होती है। कई बार देखा गया है कि पेशाब बार बार न जाने के उद्देश्य से वे इस मौसम में पानी का सेवन भी कम देते हैं। ऐसे में चाहिए वे भरपूर मात्रा में पानी लें क्योंकि सर्द मौसम में भी शरीर में तरलता की आवश्यकता होती है बस उसके बैलेंस होने का तरीका बदल जाता है, इसलिए पानी कम पीना कोई विकल्प नहीं है। इसके अलावा हालाँकि 50 वर्ष की उम्र के बाद प्रोस्टेट बढ़ने की समस्या आम है लेकिन सर्दियों में खासतौर पर इससे सम्बंधित कठिनाइयाँ हमारे बुजर्गों को आतीं हैं। ऐसे में उनका समय समय पर टेस्ट उपचार व डॉक्टर से परामर्श जारी रखें।
मौसम के अनुसार बच्चों की देखभाल की ज़िम्मेदारी अधिक बढ़ जाती है उनके बचाव तरीकों के बारे में डॉक्टर विक्रम कुमार, सीनियर कंसल्टेंट, पीडियाट्रिक गेस्ट्रोएंट्रोलोजी, हेपेटोलॉजी एंड पीडियाट्रिक लिवर ट्रांसप्लांट, जेपी अस्पताल, नोएडा बताते हैं कि:-
बच्चों के लिए करें उदाहरण पेश:- इन सर्दियों में अपने बच्चों को स्वस्थ रखने के इस तरीके को अपनाएं। बच्चों के विषय में अभिभावक इस बात का ध्यान रखें कि बच्चों को अच्छी जीवनशैली सिखाने के मकसद से उनको डांट कर किसी बात के लिए मनाने के बजाय ख़ुद वह काम करके उदाहरण पेश करें, तभी उनको वही काम करने के लिए प्रोत्साहित करें। जैसे बच्चों को स्वस्थ खान पान की आदत डालने के लिए उनको सख्ती से इस बात के लिए मजबूर करने के बजाय ख़ुद भी वही खाना उनके साथ बैठ कर खाएं, उनको खेल कूद के लिए प्रोत्साहित करें और ख़ुद भी उनके साथ दौड़ भाग करें, न कि ख़ुद अस्वस्थ जीवनशैली के साथ रहकर उनको सख्ती के साथ स्वस्थ होने की ज़बरदस्ती करें।
छोटे बच्चों का रखें खास ख्याल:- मौसम बदलने से बीमारियों का जोखिम खासकर छोटे बच्चों में बढ़ जाता है। देखा गया है कि मौसम में बदलाव होते ही बच्चे अकसर कई बीमारियों की चपेट में आ जाते है, जैसे खांसी, ज़ुखाम, बुखार, आदि। यहां ओपीडी की यदि बात करें तो बाकी समय के मुकाबले तकरीबन 20 फ़ीसदी नए मामले बच्चों के आने लगते हैं। पर इस बात का विशेष ध्यान ध्यान दें कि बच्चों और बड़ों का इलाज एक समान नहीं किया जा सकता। बच्चे नाज़ुक होतें और उनको बीमारियों का जोखिम ज्यादा होता है और उनका इलाज भी सोच समझकर किया जाना आवश्यक है। बिना डॉक्टर की सलाह के किसी भी प्रकार की दवा, स्टीम, नैब्युलाइज़र आदि का प्रयोग न करें साथ ही किसी भी घरेलू नुस्खे का प्रयोग बच्चों पर ना करें। इसलिए सर्दियों के मौसम में बच्चों का खास ख्याल रखें, टोपी, मोज़े व गर्म कपड़ो में ढक कर रखें।
बाहर से अचानक घर आकर कपडे न बदलें, कुछ मिनट रूककर कपड़े बदलें, ताकि शरीर का तापमान अनुकूल हो सके।