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Written By: Jitendra Gupta | Updated : February 3, 2021 12:12 PM IST
कोरोना पॉजिटिव मरीजों का ये 1 टेस्ट बताएगा कब हालत होगी खराब, जानें कब जाना पड़ सकता है अस्पताल
कोरोना वायरस को यूं तो लोग एक साल से करीब जानने लगे हैं लेकिन अभी भी इसकी सटीकता का पता लगा पाना हर किसी के लिए मुश्किल है। शुरुआत में मरीज को हल्के लक्षण दिखाई देते हैं, जो कुछ ही दिनों या सप्ताह के भीतर इतने खतरनाक हो जाते हैं कि किसी व्यक्ति की मौत भी हो सकती है। वैज्ञानिक अब ऐसे तरीके ढूंढ रहे हैं, जिससे ये पता लगाया जा सके कि कौन कोरोना के सबसे गंभीर लक्षणों का सामना कर रहा है। जी हां, सेंट लुईस के वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसिन द्वारा किए गए एक अध्ययन में ये बताया गया है कि उन्होंने एक ऐसा तरीका ढूंढ निकाला है, जिससे ये पता लगाया जा सकता है कि अस्पताल में भर्ती मरीज को क्या गंभीर परेशानी या फिर उसकी मौत हो सकती है। आइए जानते हैं कौन सा है ये तरीका।
एक रेपिड ब्लड सैंपल टेस्ट, जिसमें आपके 'माइटक्रोनड्रियल डीएनए' को मापा जाता है ये पता लगाने में मददगार है कि आगे चलकर मरीज को किसी प्रकार की गंभीर परेशानी तो नहीं होने वाली।
अध्ययन में ये बताया गया कि कोरोना का सबसे अनछुआ पहलू यही है कि डॉक्टर अब भी इस बात का पता लगाने में समर्थ नहीं है कि अस्पताल में भर्ती होने वाले नए कोरोना के मरीजों में आगे चलकर गंभीर दिक्कतें होंगी या नहीं। इसमें उन्हें ब्रीदिंग ट्यूब लगाना, किडनी डायलिसिस और अन्य जरूरी सहायता शामिल है।
हालांकि उम्र और चिकित्सा इतिहास के जरिए आमतौर पर परिणामों का अंदाजा लगाया जा सकता है लेकिन किसी कम जोखिम वाले मरीज को देखकर ये पता लगा पाना मुशंकिल है कि उसकी कोरोना संक्रमण से मौत भी हो सकती है।
इस अध्ययन में टीम ने ये पता लगाया है कि 'माइटक्रोनड्रियल डीएनए' लेवल कोरोना के मरीजों में 10 गुना तक बढ़ जाता है। ये खासकर उन लोगों में देखा गया, जिनमें गंभीर फेफड़ों से जुड़ी शिकायत थी या फिर जिनकी मौत हुई।
अध्ययन में ये पाया गया कि जिन लोगों का 'माइटक्रोनड्रियल डीएनए' छह गुना तक बढ़ जाता है उन्हें ट्यूब के सहारे सांस देनी होती है, जबकि जिनका 'माइटक्रोनड्रियल डीएनए' लेवल तीन गुना तक बढ़ जाता है उन्हें आईसीयू में भर्ती करना होता है। वहीं जिन लोगों का 'माइटक्रोनड्रियल डीएनए' लेवल सबसे कम स्तर के मुकाबले 2 गुना होता है उनके मरने की संभावना ज्यादा होती है।
'माइटक्रोनड्रियल डीएनए' आपकी कोशिकाओं से निकलकर आपके खून में पहुंचते हैं, जो कि इस बात का संकेत है कि आपके शरीर में एक खतरनाक प्रकार का कोशिकाओं की मृत्यु शुरू हो चुकी है।
अध्ययन के शुरुआती नतीजे काफी संतोषजनक हैं लेकिन अध्ययन के निष्कर्षों की पुष्टि के लिए और अधिक शोध की आवश्यकता है।
स्लीप एपनिया
बीएमजे ओपन रेस्पिरेटरी रिसर्च में प्रकाशित एक हालिया अध्ययन के मुताबिक, वे लोग, जो इस समस्या का शिकार उन्हें कोरोना की गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ेगा।
स्मोक
जामा इंटरनल मेडिसिन में प्रकाशित एक अध्ययन के मुताबिक, शोधकर्ताओं ने ये पता लगाया है कि चाहे आप धूम्रपान करते हों या नहीं आपको गंभीर शिकायत हो सकती है। टीम ने 7,102 कोरोना मरीजों का विश्लेषण किया और ये पता लगाया कि जो लोग धूम्रपान करते हैं उनके 2.25 गुना ज्यादा अस्पताल में भर्ती होने की संभावना होती है, खासकर उन लोगों की तुलना में जो धूम्रपान नहीं करते हैं।
आपका ब्लड टाइप A
अध्ययनों में ये पता लगाया है कि आपका ब्लड टाइप भी आपके संक्रमण का शिकार होने की संभावना को बढ़ाता है। रिपोर्ट के मुताबिक, जिन लोगों का ब्लड टाइप A है उनके कोरोना से संक्रमित होने की संभावना बहुत आम है।
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