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0-3 महीने के बच्चों को भी होता है ब्रेन ट्यूमर! स्टडी में खुलासा घटकर इतनी हो जाती है इन बच्चों की उम्र
जैसा कि हम सभी जानते हैं कैंसर एक घातक बीमारी है, जो किसी भी व्यक्ति की उम्र को कम कर सकती है। हाल ही में यूनिवर्सिटी ऑफ कोलारेडो कैंसर सेंटर के शोधकर्ताओं ने सबसे कम उम्र के मरीजों में ब्रेन ट्यूमर का पता लगाया है। इन मरीजों की उम्र मात्र नवजात से 3 महीने की है, जिनका जिंदा रहने की दर 1 साल से 19 साल की उम्र की तुलना में होने वाले ब्रेन ट्यूमर से पीड़ित बच्चों के मुकाबले पांच साल से आधी है। अध्ययन के निष्कर्ष जर्नल ऑफ न्यूरो ओंकोलॉजी में प्रकाशित हुए हैं।
सीयू स्कूल ऑफ मेडिसिन में हेमाटोलॉजी-ओंकोलॉजी के एसोसिएट प्रोफेसर एमडी एडम ग्रीन और उनके सहयोगी शोधकर्ताओं ने 0 से 19 साल की उम्र के करीब 14,500 बच्चों के डेटा का विश्लेषण किया, जो ब्रेन ट्यूमरसे पीड़ित थे। उन्होंने सबसे कम उम्र के मरीजों में सबसे खराब नतीजे पाए हैं।
ग्रीन ने बताया कि नवजात और बच्चों में ब्रेन ट्यूमर आमतौर पर नहीं पाया जाता है लेकिन इनमें हमें कुछ मामले देखने को मिले हैं। उन्होंने कहा कि हमारे पास उपचार के वह विकल्प मौजूद नहीं हैं, जो कि बड़े बच्चों पर प्रयोग किए जाते हैं। हम ये भी जानते हैं कि नवजात खुद से लक्षणों को नहीं बता पाते हैं जैसे बड़े बच्चे अक्सर कर सकते हैं।
ग्रीन और उनके साथी शोधकर्ताओं ने नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट के सर्विलांस, एपिडमियोलॉजी एंड रिजल्ट प्रोग्राम से प्राप्त डेटा का यूज किया। ये प्रोग्राम एक नेशनल कैंसर रजिस्ट्री है, जिसमें अमेरिका की एक चौथाई से ज्यादा आबादी का डेटा है और ये देश की विविधता को दर्शाती है।
शोधकर्ताओं ने इस डेटा को बचपन में होने वाले ब्रेन ट्यूमरसे जोड़ा और उन्होंने इसे तीन समूहों में विभाजित किया। पहला समूह 0 से 3 महीने, दूसरा 3 से 6 महीने और तीसरा समूह 6 से 12 महीने। इसके बाद उन्होंने इन तीनों समूहों से प्राप्त डेटा को 1 से 19 साल की उम्र के बच्चों के डेटा से मिलाया।
ग्रीन ने कहा कि उन्होंने पाया कि नवजात बच्चों में होने वाले ब्रेन ट्यूमर का प्रकार बड़े बच्चों के मुकाबले थोड़ा अलग होता है और ये अपने आप में ही एक महत्वपूर्ण चीज है, जिसका हमें पता चला है। सबसे जरूरी चीज, जो सामने आई है वो ये है कि नवजात बच्चों में ब्रेन ट्यूमर के कारण बचने की संभावना बड़े बच्चों के मुकाबले बहुत कम होती है फिर चाहे ब्रेन ट्यूमर का प्रकार कोई सा भी हो।
अध्ययन के निष्कर्ष बताते हैं कि 0 से 3 महीने के आयु वर्ग के बच्चों में पांच साल तक जिंदा रहने की दर 30 से 35 फीसदी होती है, जबकि 1 से 19 साल के आयु वर्ग के बच्चों में पांत साल तक जिंदा रहने की दर 70 फीसदी होती है। वहीं 3 से 6 महीने और 6 से 12 महीने के बच्चों में पांच साल तक जिंदा रहने की दर बड़े बच्चों के मुकाबले भी काफी कम होती है।