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Written By: Editorial Team | Published : January 26, 2019 1:37 PM IST
एक अध्ययन में यह दावा किया गया है कि आशावादी महिलाओं में टाइप 2 मधुमेह से पीड़ित होने का खतरा कम हो सकता है। © Shutterstock.
एक अध्ययन में यह दावा किया गया है कि आशावादी महिलाओं में टाइप 2 मधुमेह से पीड़ित होने का खतरा कम हो सकता है। रजोनिवृत्ति (मेनोपॉज) के बाद महिलाओं पर किए गए एक अध्ययन में इस बात का दावा किया गया है कि आशावाद जैसे व्यक्तित्व के सकरात्मक लक्षणों को रखने वाली महिलाओं में टाइप 2 मधुमेह के खतरे को कम करने में मदद मिल सकती है।
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महिला स्वास्थ्य पहल (डब्ल्यूएचआई) नामक एक दीर्घकालिक अध्ययन के आंकड़ों पर यह शोध आधारित है। पत्रिका 'मेनोपॉज में प्रकाशित इस अध्ययन में 1,39,924 महिलाओं को शामिल किया गया और इन महिलाओं को मधुमेह की बीमारी नहीं थी लेकिन 14 वर्षों में टाइप 2 मधुमेह के 19,240 मामलों की पहचान की गई।
अध्ययन के अनुसार ज्यादा आशावादी रहने वाली महिलाओं की तुलना कम आशावादी रहने वाली महिलाओं से की गई। नॉर्थ अमेरिकी मनोपॉज सोसाइटी (एनएएमएस) के कार्यकारी निदेशक जोअन पिंकर्टन ने कहा, ''व्यक्तित्व के लक्षण पूरे जीवनकाल स्थिर रहते हैं, इसलिए उन महिलाओं में मधुमेह का जोखिम अधिक पाया गया जो कम आशावादी हैं और नकारात्मक सोच रखती है।