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Written By: Anshumala | Updated : December 7, 2020 1:00 AM IST
पीरियड्स में हद से ज्यादा कम होती है ब्लीडिंग, कहीं आपको लाइट पीरियड्स की समस्या तो नहीं, जानें इसके लक्षण, कारण।© Shutterstock.
What is Light periods in Hindi: पीरियड्स (Periods) आमतौर पर 21 से 35 दिनों के गैप में होता है, लेकिन कुछ महिलाओं में यह 25 दिनों के गैप में भी हो जाता है। कई बार किसी-किसी महिला को हेवी ब्लीडिंग होती है, तो किसी-किसी में स्पॉटिंग या डॉट्स की तरह ब्लड आता है। पीरियड्स में ऐसी समस्या आने को लाइट पीरियड्स (Light periods in Hindi) कहते हैं। पीरियड्स होने पर रक्त प्रवाह दो से सात दिनों तक होता है। किसी-किसी महिला में यह 4 दिनों में ही समाप्त हो जाती है। इस दौरान आपको बहुत कम ब्लीडिंग हो, तो इसे नजरअंदाज किए बिना डॉक्टर से संपर्क करें। खासकर, कम उम्र की युवतियों को इसे गंभीरता से लेना चाहिए। जानें, लाइट पीरियड्स के कारण, लक्षण क्या (Light periods symptoms and causes in Hindi) हैं...
पीरियड्स सिर्फ दो दिन होना, उसमें भी बेहद कम रक्त स्त्राव।
स्पॉटिंग के रूप में ब्लीडिंग होना।
अनियमित पीरियड्स होना।
लगातार लाइट पीरियड्स हो, तो नजरअंदाज ना करें।
किशोरावस्था और मेनोपॉज में लाइट पीरियड्स की समस्या (What is Light periods in Hindi) हो सकती है। इसमें इर्रेगुलर पीरियड्स अनुभव कर सकती हैं। इस दौरान भी कम ब्लीडिंग होती है। मुख्य कारण है हार्मोनल इम्बैलेंस।
यदि आपका वजन अधिक है या फिर अनहेल्दी ईटिंग हैबिटों को अपनाती हैं, तो भी पीरियड्स प्रभावित होती है। बहुत कम वजन होने के कारण पीरियड्स अनियमित हो सकती है। वजह है शरीर के हार्मोन सामान्य रूप से काम नहीं करते हैं।
यदि आप गर्भवती हैं, तो यह संभावना है कि आपको पीरियड्स नहीं होगा। कुछ महिलाओं को हल्की स्पॉटिंग या ब्लीडिंग हो सकती है जिसे आप पीरियड्स समझ लेते हैं लेकिन असल में ये इम्प्लांटेशन ब्लीडिंग है। यह ओव्यूलेशन के कारण होती है। जब अंडा यूटेरस वॉल से जुड़ता है।
यदि आप अपने शिशु को स्तनपान कराती हैं, तो मिल्क प्रोडक्शन हार्मोन ओव्यूलेशन को कम करता है। इससे पीरियड्स अनियमित हो जाती है। बच्चे को जन्म देने के कुछ महीनों बाद तक पीरियड्स आना बंद रहता है। ऐसे में आपको पीरियड्स में ब्लड फ्लो बहुत कम या स्पॉटिंग के रूप में हो सकता है।
हार्मोनल बर्थ कंट्रोल पिल्स के सेवन से भी लाइट पीरियड्स हो सकता है। ये सभी पिल्स अंडे को रिलीज होने से रोकते हैं। शरीर में अंडा रिलीज नहीं होगा, तो गर्भाशय में थिक लाइनिंग बनने में समस्या आती है। इस वजह से पीरियड्स के दौरान रक्त स्त्राव कम हो जाता है या फिर इर्रेगुलर पीरियड्स हो सकता है।
तनाव कई रोगों का जड़ है। यदि आप तनाव (Stress) ग्रस्त रहती हैं, तो मस्तिष्क मेंन्सट्रुअल साइकल हार्मोन को बदल सकता है, जिसकी वजह से पीरियड्स मिस या बहुत हल्का हो सकता है।
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