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यूं पहचानें यूटीआई के लक्षण। © Shutterstock
मानसून अपने साथ कई बीमारियां लेकर आता है, जिसमें एक है यूटीआई (UTI in Women)। मानसून में तापमान कम हो जाता है। तापमान में अचानक कमी या बदलाव आने से रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है, जिससे कई तरह के इंफेक्शन होने की आशंका बढ़ जाती है। मानसून के मौसम में नमी अधिक होती है, जिसमें बैक्टीरिया को तेजी से पनपने का मौका मिल जाता है। पुरुषों के मुकाबले महिलाओं में मूत्रमार्ग (UTI in Women) संबंधित संक्रमण यानी यूटीआई अधिक होता है। ऐसा इसलिए, क्योंकि महिलाओं का मूत्रमार्ग पुरुषों की तुलना में छोटा होता है।
यूटीआई से महिलाओं को योनी संक्रमण (UTI in Women in monsoon) भी हो सकता है, जिससे पेल्विक इन्फ्लेमेट्री डिजीज (महिलाओं के प्रजनन अंगों के ऊपरी भाग का संक्रमण, पीआईडी) होने की आशंका रहती है। यूटीआई का इलाज समय पर नहीं किया जाए, तो इससे पीआईडी की समस्या हो सकती है। बार-बार यूटीआई से ग्रस्त महिलाओं में गर्भधारण की सम्भावना प्रभावित हो सकती है।
बारिश के मौसम में देर तक प्राइवेट पार्ट को गंदा ना छोड़ें। चूंकि, बारिश में नमी अधिक होती है, तो प्राइवेट पार्ट्स की साफ-सफाई पर ध्यान रखना जरूरी है। रात में सोते समय या तो पैंटी ना पहनें या फिर साफ पैंटी पहनकर सोएं। पीरियड्स के दौरान साफ-सफाई पर अधिक ध्यान दें। प्रत्येक 4 घंटे पर पैड बदल लें। यूटीआई का समय पर उपचार जरूरी है। देर करने पर संक्रमण किडनी को भी नुकसान पहुंचा सकता है। रक्त परिसंचरण में फैलकर शरीर के अन्य अंगों तक पहुंच सकता है।
इससे किडनी संबंधी रोग हो सकते हैं और अंडाणु बनने की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है, जिससे गर्भधारण में समस्या आ सकती है। मेनोपॉज की उम्र में पहुंच चुकी हैं, तो बारिश के मौसम में वजाइना के भाग को अधिक साफ करें वरना ऑर्थोपिक वेजाइनल डीजेनरेशन (योनी मार्ग में सिकुड़न, दर्द) होने की आशंका बढ़ सकती है। इससे भी मानसून सीजन में आपको यूटीआई हो सकता है।
मानसून के दौरान महिलाओं में यूटीआई की समस्या बहुत पाई जाती है। लक्षणों में पेशाब करने के समय दर्द, जलन, सनसनाहट, बार-बार पेशाब आना, पेट के निचले हिस्से में दर्द, बुखार आदि आम हैं। जांच नहीं कराने पर बैक्टीरिया ब्लैडर में ऊपर जाकर किडनी तक पहुंच सकता है, जिससे सूजन एवं जलन हो सकती है। यह स्थिति आपके लिए गंभीर हो सकती है। मानसून में बैक्टीरिया के तेजी से पनपने के कारण संक्रमण होने का खतरा बढ़ जाता है।
यूटीआई की समय पर जांच हो जाए तो एंटीबायोटिक्स के जरिए आसानी से उपचार हो सकता है। यूरिन कल्चर जांच से इसका पता लगाया जा सकता है और मूत्र में बैक्टीरिया की संख्या से संक्रमण की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है। समय पर जांच और उपचार किया जाए तो भविष्य में रोग बढ़ने की संभावना से बचा जा सकता है। इस दौरान पेय पदार्थ जैसे पानी, फलों का ताजा रस, सूप आदि खूब पिएं। इससे मूत्र की मात्रा बढ़ेगी और संक्रमण की आशंका कम हो जाएगी। इसके अलावा मौसमी फल खूब खाएं और मूत्र को ज्यादा समय तक रोक कर न रखें।
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