
... Read More
Written By: Anshumala | Published : May 23, 2019 10:01 AM IST
स्पर्म एलर्जी क्या है और इसके कारण और लक्षणों को जानें। © Shutterstock.
स्पर्म एलर्जी या सेमिनल प्लाज्मा हाइपरसेंसिटिव या वीर्य एलर्जी एक दुर्लभ यौन संचारित रोग है जो कि महिलाओं के प्रजनन तंत्र को प्रभावित करता है। हालांकि ये एलर्जी बहुत ही कम महिलाओं को प्रभावित करती है। यह एलर्जी केवल तब हो सकती जब शुक्राणु आपके शरीर के साथ सीधे संपर्क में आते हैं। अगर आपका साथी कंडोम का इस्तेमाल कर रहा है तो आप इस रोग से बचाव कर सकती हैं। जानें, इस बीमारी के कारण, लक्षण और उपचार क्या हैं।
ह्नयूमन सेमीनल प्लाजमा हाइपरसेंसिटिव या शुक्राणु एलर्जी आमतौर पर तब होती है जब आपका शरीर आपके साथी के वीर्य में मौजूद कुछ प्रोटीन या रसायनों की एलर्जी प्रतिक्रिया के संपर्क में आता है। वीर्य में एलर्जी ग्लाइकोप्रोटीन के कारण होती है जो प्रोस्टेट ग्लैंड से निकलता है।
स्पर्म एलर्जी के लक्षण शरीर के माध्यम से फैल सकते हैं। संभोग के बाद जब आपका शरीर शुक्राणु के संपर्क में आता है तो उसेक लगभग 10 से 20 मिनट के बाद इसके लक्षण दिखाई देने लगते हैं। शुक्राणु एलर्जी के संकेत प्रजनन अंगो तक ही सीमित नहीं होते हैं। ये शरीर के अन्य किसी भी अंग में हो सकते हैं। स्पर्म एलर्जी के लक्षणों में निम्न शामिल हैं।
जननांग में खुजली
छोटे दाने निकलना
जलन
छाती में घुटन
बेहोशी
घरघराहट
सूजन
सांस लेते वक्त परेशानी
पेशाब करते वक्त दर्द
एग्जिमा
अधिक हल्दी-दूध पीना बढ़ा सकती है पुरुषों में इंफर्टिलिटी की समस्या, जानें इसके अन्य नुकसान
शारीरिक असुविधा के अलावा, स्पर्म एलर्जी पति और पत्नी के रिश्ते को भी प्रभावित करती है। इस रोग के कारण महिलाएं को आमतौर पर फिजियोलॉजिकल समस्या होने लगती है जिससे रिश्ते में इंटिमेसी कम हो जाती है। इंटिमेसी में कमी होने के कारण रिश्ते और विवाहित जीवन पर बुरा असर होता है। इस रोग के दौरान आप और आपके साथी को एक दूसरे से बात करनी चाहिए और ऐसे मतभेदों को स्पष्ट रुप से सुलझाने के लिए विशेषज्ञ या मनोवैज्ञानिक से संपर्क करें।
यदि आप एस्पर्म एलर्जी से पीड़ित हैं, तो आपका डॉक्टर इन उपचारों का सुझाव देगा, इंट्रावेजाइनल सेमीनल ग्रेडिड चैलेंज और इंट्रायूटेरिन इनसेमीनेशन। इन दोनों उपचार का मुख्य उद्देश्य आपके शरीर में वीर्य को सहन करने की क्षमता को बढ़ाना होता है।
एक्यूपंचर दूर करे इंफर्टिलिटी प्रॉब्लम, बढ़ाए प्रेगनेंसी की संभावनाएं