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Written By: Yogita Yadav | Updated : January 28, 2019 4:50 PM IST
दिल्ली के क्नॉट प्लेस में 5 फरवरी को हो रही इस यात्रा का उद्देेश्य माहवारी से जुड़े मिथ्स को तोड़ना और अवसाद भरे इस समय को आत्मविश्वास में बदल देना है।
माहवारी यानी मासिक धर्म पर अब भी लोग बात करने की बजाए फुसफुसाने से काम चला लेना बेहतर समझते हैं, जबकि यह महिलाओं खासतौर से किशोरियों की सेहत से जुड़ा बहुत अहम मुद्दा है। शर्म, संकोच और सामाजिक आग्रहों के कारण कितनी ही लड़कियों को इससे जुड़ी हाइजीन और स्वास्थ्य संबंधी विषयों की जानकारी नहीं मिल पाती। इसी कमी को महसूस करते हुए दिल्ली की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ सुरभि सिंह इस पर वृहत अभियान चला रहीं हैं। जिसमें वे माहवारी से जुड़ी जागरुकता के लिए लगातार काम कर रहीं हैं।
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कौन हैं डॉ सुरभि
डॉ सुरभि सिंह दिल्ली के मयूर विहार में किरण मेडिकेयर एंड मेटरनिटी क्लिनिक चला रही हैं। वे पिछले 14 वर्ष से इस क्षेत्र में कार्यरत हैं। इस दौरान उन्होंने अनुभव किया कि माहवारी पर अब भी बात करते हुए बहुत संकोच महसूस किया जाता है। खासतौर से नई उम्र की लड़कियों को इस पर चुप रहने की सलाह दी जाती है, जिससे उनका यह समय तनाव और उदासी से भरा गुजरता है।
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जरूरी है बात करना
डॉ सुरभि कहती हैं, ‘’भारत जैसे देश में जब माहवारी पर बात हो तो सिर्फ़ स्वच्छता पर बात करने से नहीं चलेगा। यहां तो अभी बात करना भी ठीक नहीं समझा जाता। इसीलिए हमने सोचा कि पहले जागरुकता पर बात करें और लोगों को बतायें की बात करना क्यूं ज़रूरी है? इसके लिए हमने माहवारी जागरुकता दिवस मनाने की ठानी। हमारे मासिक चक्र जैसा एक ही महीना है जो 28 दिन का है, जी हाँ फ़रवरी ! फ़रवरी की 5 तारीख़ क्योंकि औसतन हमारा मासिक चक्र भी पांच दिन तक चलता है। इसे उत्सव के तौर पर मनाते हुए दुनिया को बताना ज़रूरी है कि मासिक चक्र में आने वाले ख़ून का रंग लाल है और लाल रंग प्रतीक है ख़ुशी, प्यार और उत्सव का न कि शर्म का और घृणा का।
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दिल्ली की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ सुरभि सिंह इस पर वृहत अभियान चला रहीं हैं। जिसमें वे माहवारी से जुड़ी जागरुकता के लिए लगातार काम कर रहीं हैं।
5 फरवरी को होगी पैड यात्रा
इस वर्ष भी डॉ सुरभि अपनी टीम और स्कूली बच्चों के साथ माहवारी जागरुकता दिवस पर पैड यात्रा निकालने जा रहीं हैं। पैड यात्रा में वे माहवारी और स्त्री स्वास्थ्य से जुड़े तमाम मुद्दो पर किशोर और किशोरियों को जागरुक करेंगी। यह यात्रा 5 फरवरी को दिल्ली के क्नॉट प्लेस यानी राजीव चौक के सेंट्रल पार्क में सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक होगी।
जरूरी है लड़कों को शामिल किया जाना
पैड यात्रा में होने वाले विभिन्न जागरुकता कार्यक्रमों में सिर्फ लड़कियों को ही शामिल नहीं किया जाता, बल्कि इसमें किशोरों और युवा लड़कों की भी बराबर की भागीदारी रहती है। इस बारे में डॉ सुरभि कहती हैं, ‘यह ऐसा मुद्दा है जिस पर अधूरी जागरुकता से काम नहीं चलेगा। पूरी सोसायटी का इसमें जागरुक होना जरूरी है। इसलिए हम हर बार अपने अभियानों में, खासतौर से जब कोई वर्कशॉप हो तो लड़कों को भी शामिल करते हैं। ताकि वे भी अपने साथ की लड़कियों, बहनों और माताओं की तकलीफ को समझें।
तनाव से आत्मविश्वास तक
डॉ सुरभि इन दिनों के बारे में प्रचलिए मिथकों के बारे में बात करते हुए कहती हैं, यह स्वास्थ्य से जुड़ा मसला है, इसलिए इस पर जागरुकता होनी चाहिए, न कि किसी तरह का तनाव या अवसाद। इन खास दिनों को लड़कियां बहुत ज्यादा तनाव में रहती हैं, इसलिए हमने अपनी पैड यात्रा का विषय तनाव से आत्मविश्वास तक रखा है। ताकि वे इस लाल रंग के अहमियत को समझें। यह प्यार और उत्सव का रंग है, उदासी और तनाव का नहीं।
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