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Written By: Anshumala | Published : March 7, 2020 1:24 PM IST
International Women's Day 2020: महिलाओं में होने वाली मानसिक बीमारी ''सुपरवूमेन सिंड्रोम'' के बारे में कितना जानती हैं आप?
सुपर वुमन सिंड्रोम एक ऐसा सिंड्रोम है, जिसमें महिला घर परिवार व बाहर की जिम्मेदारियों को पूरा करने की जद्दोजहद में कुछ इस कदर व्यस्त हो जाती है कि उसके पास खुद को देने के लिए समय व ऊर्जा होती ही नहीं है। इतना ही नहीं, अगर महिलाएं किसी भी क्षेत्र में अपने लक्ष्यों को पूरा नहीं कर पाती, तो वह खुद को ही दोष देने लगती है। इतना ही नहीं, यह स्थिति कभी-कभी इतनी घातक हो जाती है कि महिला अवसाद में चली जाती है।
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इस सिंड्रोम के लिए सेरोटोनिन की कमी भी एक मुख्य कारण बन सकती है। दरअसल, सेरोटोनिन एक बेहद महत्वपूर्ण ब्रेन केमिकल है, जो व्यक्ति की उदासी को दूर करके व मूड को अच्छा बनाकर उसे तनावग्रस्त होने से बचाता है। मस्तिष्क में सेरोटोनिन के स्तर को बढ़ाने के लिए दवाइयों का सहारा लिया जा सकता है। इसके अतिरिक्त मसाज थेरेपी व धूप में बैठने भी सेरोटोनिन हार्मोन में वृद्धि होती है।
– इस सिंड्रोम से बचने के लिए आत्म-अनुशासन जरूरी है। जिस तरह महिला अपने घर-परिवार व ऑफिस के कार्यों के लिए समय निकालती है, ठीक उसी तरह खुद को नियमित रूप से समय देना शुरू करें। उन कामों को करें, जो आपको अंदर से खुशी दे।
– भागदौड़ भरी जिन्दगी में थोड़ा ठहराव लाएं। अपनी प्राथमिकताओं को सुनिश्चित करें। एक वक्त में अधिक काम करने से बचें। घर पर ऑफिस का काम न करें। हाल ही में मां बनी हैं, तो इसे प्राथमिकता दें।टेंशन से खुद को दूर रखें।
– एक हेल्दी दिनचर्या स्वस्थ व अवसादमुक्त जीवन की ओर पहला कदम हो सकती है। इसके लिए अपनी दिनचर्या में कुछ आवश्यक बदलाव करें। मसलन, डेली लाइफ में व्यायाम को जगह दें। इससे मस्तिष्क में हैप्पी हार्मोन रिलीज होते हैं और आप खुद को अधिक ऊर्जावान व खुश महसूस करती है। इसके अतिरिक्त हेल्दी डाइट लें। सोने का समय सुनिश्चित करें। ऐसे बदलाव करके आप सुपर वुमन सिंड्रोम से बच सकती हैं।