International Women's Day 2020: महिलाओं में होने वाली मानसिक बीमारी ''सुपरवूमेन सिंड्रोम'' के बारे में कितना जानती हैं आप?

महिलाओं में होने वाली एक मानसिक बीमारी है, ”सुपर वुमन सिंड्रोम”। ''विश्व महिला दिवस 2020'' पर जानें किस तरह से महिलाएं इस रोग के बारे में जानकर इसके लक्षणों और कारणों को कर सकती हैं कम...

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Written By: Anshumala | Published : March 7, 2020 1:24 PM IST

International Women's Day 2020 in hindi : पूरी दुनिया में 8 मार्च को "अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस 2020'' सेलिब्रेट किया जाता है। आजकल की महिलाएं हर क्षेत्र में पुरुषों से कंधे से कंधा मिलाकर चल रही हैं। कुछ महिलाएं तो ऐसी होती हैं कि खुद को हर काम या मोर्चे पर सबसे बेहतर साबित करने की कोशिश करती हैं। इसके लिए वो रात-दिन एक कर देती हैं। अपनी सेहत की फिक्र किए बिना हर चीज में अव्वल आने की कोशिश करती रहती हैं। कुछ महिलाओं पर इसका सनक सवार हो जाता है। दरअसल, ऐसा करना एक मानसिक बीमारी है, जिसे ”सुपर वुमन सिंड्रोम” (superwoman syndrome) नाम दिया गया है। यह एक ऐसा मानसिक अवसाद है, जिसमें महिला जब खुद को हर मोर्चे पर परफेक्ट नहीं दिखा पाती है, तो उसके अंदर आत्मग्लानि आ जाती है। इस स्थिति को नजरअंदाज करना नुकसानदायक साबित हो सकता है।

क्या है सुपर वुमन सिंड्रोम (what is superwoman syndrome)

सुपर वुमन सिंड्रोम एक ऐसा सिंड्रोम है, जिसमें महिला घर परिवार व बाहर की जिम्मेदारियों को पूरा करने की जद्दोजहद में कुछ इस कदर व्यस्त हो जाती है कि उसके पास खुद को देने के लिए समय व ऊर्जा होती ही नहीं है। इतना ही नहीं, अगर महिलाएं किसी भी क्षेत्र में अपने लक्ष्यों को पूरा नहीं कर पाती, तो वह खुद को ही दोष देने लगती है। इतना ही नहीं, यह स्थिति कभी-कभी इतनी घातक हो जाती है कि महिला अवसाद में चली जाती है।

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सेरोटोनिन हो सकता है कारण

इस सिंड्रोम के लिए सेरोटोनिन की कमी भी एक मुख्य कारण बन सकती है। दरअसल, सेरोटोनिन एक बेहद महत्वपूर्ण ब्रेन केमिकल है, जो व्यक्ति की उदासी को दूर करके व मूड को अच्छा बनाकर उसे तनावग्रस्त होने से बचाता है। मस्तिष्क में सेरोटोनिन के स्तर को बढ़ाने के लिए दवाइयों का सहारा लिया जा सकता है। इसके अतिरिक्त मसाज थेरेपी व धूप में बैठने भी सेरोटोनिन हार्मोन में वृद्धि होती है।

सुपर वुमन सिंड्रोम से कैसे बचें

– इस सिंड्रोम से बचने के लिए आत्म-अनुशासन जरूरी है। जिस तरह महिला अपने घर-परिवार व ऑफिस के कार्यों के लिए समय निकालती है, ठीक उसी तरह खुद को नियमित रूप से समय देना शुरू करें। उन कामों को करें, जो आपको अंदर से खुशी दे।

– भागदौड़ भरी जिन्दगी में थोड़ा ठहराव लाएं। अपनी प्राथमिकताओं को सुनिश्चित करें। एक वक्त में अधिक काम करने से बचें। घर पर ऑफिस का काम न करें। हाल ही में मां बनी हैं, तो इसे प्राथमिकता दें।टेंशन से खुद को दूर रखें।

– एक हेल्दी दिनचर्या स्वस्थ व अवसादमुक्त जीवन की ओर पहला कदम हो सकती है। इसके लिए अपनी दिनचर्या में कुछ आवश्यक बदलाव करें। मसलन, डेली लाइफ में व्यायाम को जगह दें। इससे मस्तिष्क में हैप्पी हार्मोन रिलीज होते हैं और आप खुद को अधिक ऊर्जावान व खुश महसूस करती है। इसके अतिरिक्त हेल्दी डाइट लें। सोने का समय सुनिश्चित करें। ऐसे बदलाव करके आप सुपर वुमन सिंड्रोम से बच सकती हैं।

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