40 की उम्र के बाद महिलाओं को जरूर कराना चाहिए ये 5 टेस्ट

बीमारियों के होने से पहले ही अगर उनका पता चल जाये तो बचना आसान होता है। ब्रेस्ट कैंसर और डायबिटीज की बीमारियों का अगर पहले से ही पता चल जाये तो बढ़े खतरे को टाला जा सकता है।

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Written By: akhilesh dwivedi | Updated : November 26, 2018 4:25 PM IST

महिलाओं में 40 की उम्र के बाद कई तरह की बीमारियों की संभावना बढ़ जाती है। महिलाओं में इस उम्र के बाद हार्मोनल बदलाव आने लगते हैं। हार्मोनल बदलाओं और बीमारियों के खतरे से बचने के लिए 40 की उम्र के बाद कुछ जरूरी जांच महिलाओं को करना चाहिए। बीमारियों के होने से पहले ही अगर उनका पता चल जाये तो बचना आसान होता है। ब्रेस्ट कैंसर और डायबिटीज की बीमारियों का अगर पहले से ही पता चल जाये तो बढ़े खतरे को टाला जा सकता है। हम यहां कुछ टेस्ट जो खास तौर से 40 प्लस महिलाओं के लिए जरूरी हैं बता रहे हैं। मुख्यतः 5 टेस्ट ही जरूरी हैं।

ब्रेस्ट कैंसर स्क्रीनिंग : 40 के बाद ब्रेस्ट कैंसर के होनेके चान्सेस ज्यादा होते है इसलिए समय रहते इसकी जांच करते रहें। इसके लिए मेमोग्राफी करना होगा। हर 2 साल पर ये जांच करा लेनी चाहिए।

डाइबिटीज़ टेस्ट: हर 6 महीने पर इस टेस्ट को करना आफ्टर 40 जरूरी है। शुरुआत में डिटेक्ट होने पर इसपर कंट्रोल करने आसान होता है। ये भी पढ़ेंः जानिए डायबिटीज के मरीजों के लिए HbA1c टेस्ट HPLC method से कराना क्यों है जरूरी।  

सर्वाइकल कैंसर स्क्रीनिंग: पेप स्मीयर टेस्ट सर्वाइकल कैंसर की जांच के लिए किया जाता है। वैसे तो इसकी जांच 30 के बाद से ही हर पांच साल पर करना चाहिए लेकिन 40 के बाद तो ये जरूरी टेस्ट में शामिल होना ही चाहिए। 65 साल के होने तक सर्वाइकल कैंसर का खतरा ज्यादा होता है। ये टेस्ट यूट्रेस और यूट्रेस सी जुड़ी नलियों में होने वाले इंफेक्शन और सूजन को पता करने किये होता है।

साइकोलॉजिकल स्क्रीनिंग: आफ्टर 40 मूड स्विंग के कारण डिप्रेशन के साथ कई और प्रॉब्लम जुड़ने लागती हैं। नींद न आना, चिड़चिड़ापन, जीने की इच्छा की कमी जैसे लक्षण अचानक से गंभीर हो कर सामने आते हैं। ये सब 75 प्रतिशत फीमेल्स में होता ही है क्योंकि हार्मोनल चेंजेस के कारण ऐसा होना पोसिबल है। इसके लिए स्क्रीनिंग टेस्ट होता है जिनमे साइकोलॉजी से जुड़े प्रश्नों के आधार पर डॉक्टर्स इलाज करते हैं।

ओस्टियोपोरोसिस टेस्ट: वैसे तो अब ये किसी भी उम्र में होने लगा है लेकिन आफ्टर 40 इसका इफेक्ट तेज़ी से होता है। हड्डियों मका भुरभुरापन इस बीमारी की मुख्य वजह है। कैल्शियम और फॉस्फोरस की शरीर मे होती कमी के कारण शरीर अपनी जरूरत को पूरा करने के लिए हड्डियों से कैलशियम लेने लगता है और परिणामस्वरूप हड्डियां पावडर बनने लगती है और हलकी चोट से भी हड्डी टूटने और स्लिप डिस्क जैसी समस्याएं होने लगती हैं। इससे बचने के लिए जरूरी है कि ओस्टियोपोरोसिस का टेस्ट जरूर कराया जाय।

थाइरॉइड टेस्ट: इसकी जांच की भी कोई उम्र वैसे तय नही लेकिन जरूरी है कि आफ्टर 40 इसकी जांच जरूरी है। थाइरॉइड धीरे धीरे पूरी बॉडी के सिस्टम पर अटक करता है और फिज़िकली ही नही मेंटली भी प्रॉब्लम क्रिएट करता है।

ब्लड प्रेशर/ कैलेस्ट्रोल: 40 प्लस फीमेल्स को वीकली या मंथली बीपी टेस्ट करना चाहिए। अगर डाइबिटीज, हार्ट या किडनी की प्रॉब्लम हो तो ये जांच और जरूरी हो जाता है। फीमेल्स अपनी हेल्थ को लेकर बहुत कॉन्शियस नही होतीं। इसलिए कुछ जांच इनके लिए जरूरी हो जाती है। थीके इसी तरह हर साल कैलेस्ट्रोल की जांच भी करना जरूरीहै। पिटसबर्ग यूनिवर्सिटी में हुई स्टडी में भी ये पाया गया है कि कैलेस्ट्रोल टाइप-1 डाइबिटीज़ और हार्ट से जोड़े रोगों को बढ़ाता है।

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